National Tourism Day : पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से 25 जनवरी को राष्ट्रीय पर्यटन दिवस (National Tourism Day 2023) मनाया जाता है। इस दिन को मनाने के पीछे मकसद होता है, उन पर्यटन स्थलों की जानकारी देना, जिनके बारे में लोगों को अधिक पता नहीं होता है। बिहार में कई ऐसे पर्यटक स्थल है जिसके बारे में यहां के लोग ही नहीं जानते हैं। जिसमें एक शेरशाह सूरी का मकबरा है। जिसे दूसरा ताजमहल कहते हैं। यहां पर घूमना एक शानदार अनुभव हो सकता है।
शेरशाह सूरी की याद में बना मकबरा
बिहार के सासाराम में अफगान बादशाह शेरशाह सूरी का मकबरा है। इसे सम्राट शेरशाह सूरी की याद में बनाया गया है। यह मकबरा इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण हैं। इसे दूसरा ताजमहल कहा जाता है। झील के बीच में स्थित शेरशार सूरी मकबरा को जो देखता है देखता रह जाता है।लाल बलुआ पत्थर से बने इस मकबरे का निर्माण काल शेरशाह सूरी के जीवन काल से शुरू हो गया था। कहा जाता है कि उनकी मौत के 3 महीने बाद इस मकबरे का निर्माण काम खत्म हुआ था। शेरशाह सूरी के मकबरे में शेरशाह और उनकी फैमिली को दफनाया गया था। मकबरे में कुल 25 कब्रें हैं।
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इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का बेहतरीन नमूना
बताया जाता है कि प्रसिद्ध वास्तुकार मीर मुहम्मद अलीवाल खान ने मकबरे को डिजाइन किया था।1540-1545 के बीच निर्मित यह मकबरा तीन मंजिला है। चारों तरफ पानी है। हालांकि अब इसके ऊपरी मंजिल पर जाना मना है। लेकिन पहले इसके ऊपर जाकर पूरे सासाराम का नजारा देखा जा सकता था। बिहार में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इस मकबरे का अब खास ख्याल रखा जा रहा है। इससे पहले इसकी स्थिति जर्जर हो चुकी थीं। 400 साल पुराने मकबरे को देखने के लिए 20-25 रुपए टिकट लगता है।
ऐसे पहुंचे सासाराम
बिहार के राजधानी पटना से सासाराम की दूरी 152 किलोमीटर के करीब है। चार से पांच घंटे यहां पहुंचने में लगता है। आप बस या ट्रेन से यहां पहुंच सकते हैं। मकबरा बीच शहर में स्थित है।
