प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संयुक्त कमांडर सम्मेलन में सुरक्षा बलों की ऑपरेशनल तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सशस्त्र सेनाओं को जरूरी हथियारों और प्रौद्योगिकी से लैस करने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उन्हें (सेना) नए व उभरते खतरों से निपटने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। पीएम मोदी ने आज भोपाल में संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन में सुरक्षा स्थिति व सशस्त्र सेनाओं की संचालन तैयारियों की समीक्षा के दौरान यह बात कही। प्रधानमंत्री एक दिन के दौरे पर सुबह भोपाल पहुंचे, जहां उन्होंने संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया।
प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने प्रधानमंत्री को सम्मेलन के दौरान विभिन्न विषयों पर हुई चर्चा से अवगत कराया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्र निर्माण में सशस्त्र सेनाओं की भूमिका व मित्र देशों में मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान चलाने की सराहना की। मोदी ने तीनों सेनाओं से नए और उभरते खतरों से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि सशस्त्र सेनाओं को जरूरी हथियारों व प्रौद्योगिकी से लैस करने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं।
आत्मनिर्भर भारत के विजन की सराहना
सम्मेलन के अंतिम दिन सशस्त्र सेनाओं में डिजिटलीकरण, साइबर सुरक्षा, सोशल मीडिया की चुनौती, अग्निवीरों की भर्ती और सेनाओं में एकीकरण जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शीर्ष कमांडरों के साथ सुरक्षा स्थिति व संचालन तैयारियों की समीक्षा की थी। उन्होंने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने व सरकार के आत्मनिर्भर भारत के विजन का समर्थन करने के लिए सशस्त्र सेनाओं की सराहना की।
आतंकवाद से निपटने के तरीकों पर भी बातचीत
माना जाता है कि चीन से सटी सीमा पर भारत की सुरक्षा चुनौतियां और पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद से निपटने के तरीके उन प्रमुख मुद्दों में शामिल थे, जिन पर वार्षिक संयुक्त कमांडर सम्मेलन में चर्चा हुई। सूत्रों ने बताया कि नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार कोरोना वायरस से संक्रमित होने के कारण सम्मेलन में शामिल नहीं हो सके। कहा जा रहा है कि कुमार की सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है। अधिकारियों ने कहा कि पीएम की उपस्थिति वाले कार्यक्रमों में भाग लेने वालों का मानक प्रोटोकॉल के तहत टेस्ट कराया गया।
चीन से सीमा पर गतिरोध जारी
यह सम्मेलन ऐसे समय में हुआ जब भारत और चीन के बीच करीब तीन साल से सीमा पर गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। गलवान घाटी, पैंगोंग त्सो, गोगरा (PP-17A) और हॉट स्प्रिंग्स (PP-15) से सैन्य टुकड़ियों की चार दौर की वापसी हो चुकी है। इसके बावजूद, भारतीय और चीनी सेनाओं के लगभग 60,000 से अधिक सैनिक एडवांस्ड हथियारों के साथ लद्दाख बॉर्डर पर तैनात हैं। भारतीय और चीनी सेन्य कमांडर्स के बीच अब तक 17 दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन दौलत बेग ओल्डी सेक्टर के डेपसांग और डेमचोक सेक्टर के चारडिंग नाला जंक्शन (CNJ) में समस्याएं अभी भी बरकरार हैं।
