मॉस्को। तेल की कीमत में वृद्धि के खिलाफ कजाखस्तान (Kazakhstan) में भड़का लोगों का गुस्सा सरकार के इस्तीफे के बाद भी थम नहीं रहा है। देशभर में हिंसक प्रदर्शन जारी है। राष्ट्रपति कासिम जोमार्ट तोकतावेय ने आपातकाल लगा दिया है। इसके बाद भी विरोध प्रदर्शन नहीं थमा तो राष्ट्रपति ने मदद की गुहार लगाई। रूस के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन (छह पूर्व सोवियत देशों के सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन) ने घोषणा की है कि वह कजाखस्तान में शांतिदूत भेजेगा।
दरअसल, तेल की कीमत में वृद्धि के खिलाफ शुरू हुआ उग्र विरोध प्रदर्शन प्रधानमंत्री अस्कार मामिन की सरकार के इस्तीफा के बाद भी थम नहीं रहा है। प्रदर्शनकारी सरकारी भवनों पर कब्जा कर रहे हैं और उनमें आग लगा रहे हैं। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, कजाकिस्तान के सबसे बड़े शहर अल्माटी में प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को राष्ट्रपति निवास और महापौर कार्यालय पर धावा बोल दिया और दोनों में आग लगा दी।
8 पुलिसकर्मियों की मौत
अल्माटी में पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई हैं। हाल के दिनों में प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस की कई बार भिड़ंत हो चुकी है। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए ठंड के मौसम में वाटर कैनन तैनात किए गए हैं। इसके साथ ही आंसू गैस के गोले दागे जा रहे हैं। गृह मंत्रालय ने कहा है कि अशांति में आठ पुलिस अधिकारी और राष्ट्रीय रक्षक सदस्य मारे गए और 300 से अधिक घायल हो गए। वहीं, नागरिक हताहतों पर कोई आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।
बता दें कि तेल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि ने कजाकिस्तान में सरकार गिरा दी थी। यहां पछले कई दिनों से जारी जारी हिंसक प्रदर्शनों की वजह से सरकार को इस्तीफा देना पड़ा। कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कसीम जोमार्ट तोकायेव ने बुधवार को सरकार का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। अलीखान समाईलोव को कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के कारण देश में 5 जनवरी से 19 जनवरी तक इमरजेंसी लगा दी गई है। राष्ट्रपति ने कहा- कजाकिस्तान में नई सरकार बनने तक वर्तमान सरकार के सदस्य अपना काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों को सब्सिडी देने पर भी विचार करने का आदेश दिया गया है।
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