राजा रघुवंशी हत्याकांड यह भी बता रहा है कि विवाह में कभी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। अगर किसी को लगता है कि उसका विवाह उसकी मर्जी के खिलाफ कराया जा रहा है, तो डरने के बजाय परिवार को बता देना चाहिए। परिवार को व्यक्ति की पसंद और सहमति का हमेशा सम्मान करना चाहिए। जब दो वयस्क एक-दूसरे को जीवन साथी के रूप में चुनते हैं, तो यह उनकी पसंद की एक अभिव्यक्ति है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत मान्यता प्राप्त है। सुप्रीम कोर्ट ने भी व्यक्ति की पसंद, उसके बुनियादी हक और आत्मसम्मान को अहम हिस्सा बताया है।
दुर्भाग्य है कि आज भी सामाजिक दबाव के चलते कई माता-पिता अपने बच्चों की शादी उनकी इच्छा के खिलाफ कर देते हैं, जिसके बाद कई अप्रिय घटनाएं सामने आती हैं। उन्हें इससे भी फर्क नहीं पड़ता कि वह उनके द्वारा कराए जा रहे है विवाह से वे खुश हैं या नहीं । उस समय परिवार सिर्फ और सिर्फ अपना सम्मान सर्वोपरि रखता है। राजा हत्याकांड अरेंज मैरिज करने वाले लोगों के लिए एक सबक है। पहले जब हमारे समाज में रिश्ते जोड़े जाते थे, तो सबसे पहले परिवार की पृष्ठभूमि की जांच की जाती थी। फिर आस-पड़ोस में रहने वालों से लड़के और लड़की के बारे में पूछा जाता था। उसके परिवार के बारे में जानकारी इकट्ठा की जाती थी, जांच-पड़ताल पूरी होने के बाद ही रिश्ता पक्का किया जाता था, पर अब ऐसा नहीं है। वर्तमान में लोग मेट्रोमोनियल साइट या एप्स पर जाकर रिश्ते पक्के कर लेते हैं। इंटरनेट मीडिया अकाउंट और बैंक बैलेंस देखकर रिश्ते पक्के करने का चलन भी बढ़ गया है। इस दौरान लड़के और लड़की की पृष्ठभूमि कैसी है ये सब नहीं देखा जाता ।
एक वफादार और भरोसेमंद जीवनसाथी मिले इसके लिए जिस लड़के या लड़की से शादी होने जा रही है उसकी पृष्ठभूमि की जांच जरूर करवानी चाहिए। अगर आप मेट्रोमोनियल साइट के जरिए किसी अनजान परिवार से जुड़ने जा रहे हैं, तो शादी से पहले परिवार और उनके रिश्तेदारों की पृष्ठभूमि की भी जांच करें। इसके लिए एक प्राइवेट डिटेक्टिव की मदद भी ले सकते हैं। आज के जमाने में सबसे ज्यादा सीक्रेट्स लोगों के फोन में होते हैं। ऐसे में शादी से पहले यह शर्त रखें कि दोनों के फोन में पासवर्ड नहीं होगा और दोनों एक-दूसरे के फोन में इंटरनेट मीडिया समेत सभी डिटेल्स चेक कर सकते हैं। यह सच है अपने बच्चों के लिए माता-पिता के भी कुछ अरमान होते हैं, लेकिन अब जमाना बदल गया है। अभिभावकों को बच्चों की शादी करने से पहले उनकी पसंद और नापसंद के बारे में पूछना चाहिए। बच्चे अगर अपनी पसंद से विवाह करना चाहते हैं, तो वे अभिभावक को अपने फैसले में शामिल करें। उनको भरोसा दिलाएं कि उन्होंने जिस शख्स को अपने जीवनसाथी के रूप में ‘चुना है, वह हर मायने में उनके लिए बेहतर है।
विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिल मलोट पंजाब
