संसद के शीतकालीन सत्र के पहले हफ्ते में राज्यसभा (Rajya Sabha) की कार्यवाही के लिए तय समय का सिर्फ 47.70 फीसदी ही इस्तेमाल हो पाया. 12 सांसदों के निलंबन और अन्य मुद्दों पर विपक्षी दलों के प्रदर्शन के कारण सदन की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा था. हालांकि हफ्ते के आखिरी दो दिनों में सदन की प्रोडक्टिविटी अच्छी रही है, जिससे सोमवार से सदन के सामान्य तरीके से चलने की संभावना है.
शुक्रवार को राज्यसभा में कामकाज 100 फीसदी हुआ और इससे पहले गुरुवार को 95 फीसदी प्रोडक्टिविटी रही. राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को कुछ विपक्षी नेताओं और मंत्रियों से मुलाकात की और 12 सांसदों के निलंबन को रद्द करने की विपक्ष की मांग पर दोनों पक्षों से चर्चा करने का अनुरोध किया. विपक्षी सांसद निलंबन के मुद्दे पर लगातार सदन के भीतर और संसद परिसर में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.
पहले हफ्ते सदन से कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने पर विधेयक और बांध सुरक्षा विधेयक पारित किए गए. 67 सूचीबद्ध तारांकित प्रश्नों में से 23 का जवाब मौखिक रूप से दिया है. वहीं 8 सूचीबद्ध प्रश्नों को हटा दिया गया, क्योंकि वे प्रश्न निलंबित सांसदों द्वारा पूछे गए थे. गुरुवार को राज्यसभा की कार्यवाही तय समय से 33 मिनट ज्यादा चली थी, जिसके कारण ओवरऑल प्रोडक्टिविटी सुधरकर 49.70 फीसदी हो गया.
शुक्रवार को राज्यसभा में 22 प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया गया, जिसमें एक पर चर्चा हुई. इनमें से संविधान की प्रस्तावना में संशोधन की मांग वाले एक विधेयक को रोक दिया गया.
जिन 12 सांसदों को निलंबित किया गया है, उनमें तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन और शांता छेत्री, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) के इलामारम करीम, कांग्रेस की फूलों देवी नेताम, छाया वर्मा, रिपुन बोरा, राजमणि पटेल, सैयद नासिर हुसैन, अखिलेश प्रताप सिंह, शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी और अनिल देसाई और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के विनय विस्वम शामिल हैं.
मानसून सत्र में सिर्फ 28 प्रतिशत हुआ था कामकाज
इससे पहले संसद के मानसून सत्र में सिर्फ 28 प्रतिशत कामकाज हुआ था. इस दौरान सदन में 28 घंटे 21 मिनट कामकाज हुआ और हंगामे के कारण 76 घंटे 26 मिनट का कामकाज बाधित हुआ था. यह 2014 में राज्यसभा के 231वें सत्र के बाद व्यवधानों और स्थगनों के चलते 4 घंटे 30 मिनट के साथ प्रतिदिन औसतन सबसे ज्यादा समय का नुकसान था.
सरकार ने एक बयान में कहा था, ‘‘साल 2014 के बाद सर्वाधिक व्यवधान के बावजूद राज्यसभा में प्रतिदिन 1.1 विधेयक पारित किया गया. यह वर्ष 2014 के बाद राज्यसभा में पारित किए गए विधेयकों का दूसरा सर्वाधिक आंकड़ा है.
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