महाराजराम कथा से होता है ‘महामोह’ का अंत: भार्गव मुनीष
मैनपुरी । अजय किशोर। शहर की पंजाबी कॉलोनी स्थित माहेश्वरी धर्मशाला में श्रीराम कथा एवं अष्टोत्तरशत् रुद्राभिषेक के दूसरे दिन अयोध्या के कथा व्यास भार्गव मुनीष महाराज ने श्रद्धालुओं को प्रभु भक्ति का रसपान कराया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य यजमान नेकराम कश्यप और रवीश मित्तल द्वारा व्यास पूजन व आरती के साथ किया गया। कथा के दौरान महाराज श्री ने भजनों की प्रस्तुति दी, जिस पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमने लगे।
महाराज श्री ने मोह की व्याख्या करते हुए कहा कि जब व्यक्ति का मोह ‘महामोह’ बन जाता है, तो राम कथा उसका अंत महिषासुर मर्दिनी की भांति कर देती है। उन्होंने मोह को दो श्रेणियों—ज्ञान परख और अज्ञान परख में विभाजित किया। उन्होंने समझाया कि जो व्यक्ति कर्तव्यों के साथ भगवत कार्य में लगा है वह ज्ञान परख मोह में है, जबकि केवल धन संचय में डूबा व्यक्ति अज्ञान परख मोह का शिकार है।
कथा व्यास ने जीवन में संतुलन का संदेश देते हुए कहा कि काम, क्रोध, लोभ और माया जैसी प्रवृत्तियां भगवान की ही देन हैं, बशर्ते वे एक मर्यादा और सीमा में रहें। उन्होंने जोर देकर कहा कि राम कथा के श्रवण से मनुष्य के समस्त विकार दूर हो जाते हैं। इस अवसर पर संजीव मिश्रा, आयोजक अवध विहारी पांडेय, साध्वी नैना गिरी और कुंवरानी शिवा कुमारी सहित बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।
