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Lawyer Mukul Rohatgi BIO: महज तीन दिन बहस और आर्यन खान को मिली बेल, कद ही कुछ ऐसा है मुकुल रोहतगी का

Admin
Last updated: अक्टूबर 29, 2021 7:10 पूर्वाह्न
By Admin 11 Views
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13 Min Read
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मुकुल रोहतगी (photo : सोशल मीडिया ) 

मुकुल रोहतगी (photo : सोशल मीडिया ) 

Lawyer Mukul Rohatgi BIO: देश में हर समय-समय पर कई ऐसे वकील हुए हैं जिन्होंने अपनी उपयोगिता सिद्ध की है। अपना नाम स्थापित किया है। इसके लिए न तो उन्हें मार्केटिंग करने की जरूरत होती है और न ही सुर्खियों में रहने के लिए किसी तरह का कोई हथकंडा अपनाना पड़ता है। हाल के दिनों में सबसे चर्चित रहा फिल्म अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान ( Shahrukh Khan son Aryan Khan) का क्रूज ड्रग्स केस (Aryan Khan drugs case) । इस मामले में आर्यन की गिरफ्तारी हुई। उनकी तरफ से दो दिग्गज वकील पहले सतीश मानशिंदे (Lawyer  Satish Manshinde)  और फिर अमित देसाई (Amit Desai) कोर्ट में उतरे। लेकिन, बेल नहीं दिलवा पाए। तब इस केस में एंट्री हुई मुकुल रोहतगी (Mukul Rohatgi) की। शाहरुख खान ने उन पर भरोसा जताया और रिजल्ट सामने था।

Contents
पूर्व अटॉर्नी जनरल थे मुकुल (Mukul was former Attorney General)मुकुल रोहतगी बायोग्राफी  (Mukul Rohatgi Biography)मुकुल रोहतगी की पर्सनल डिटेल (Mukul Rohatgi Personal details)गुजरात दंगा मामले में राज्य सरकार के वकील थे मुकुल रोहतगीआर्यन मामले में एनसीबी को बताया ‘शुतुरमुर्ग’ (Aryan Khan Case) अरुण जेटली से थी गहरी दोस्ती (Mukul Rohatgi ke dost Arun Jaitley)

मुकुल रोहतगी (Mukul Rohatgi) ने आर्यन मामले में अपनी ओर से दलीलें और तर्क तर्क रखे। एनसीबी, जो अब तक दबाव बनाए थी, रोहतगी के सामने उनकी एक न चली। नतीजा, आर्यन खान को गुरुवार को बेल मिल गई। जो काम सतीश मानशिंदे और अमित देसाई अब तक नहीं कर पाए थे, मुकुल रोहतगी ने अपने साथ तीसरी सुनवाई में ही कर दिया। अब सहज सवाल उठना लाजमी है, कि आखिर ये मुकुल रोहतगी हैं कौन? (kaun hain Mukul Rohatgi) तो चलिए आज हम आपको उनके बारे में बताते हैं।

पूर्व अटॉर्नी जनरल थे मुकुल (Mukul was former Attorney General)

जिन्हें नहीं पता है उन्हें बता दें कि मुकुल रोहतगी (Mukul Rohatgi) देश के पुराने और चर्चित वकील रहे हैं। लेकिन ये सुर्ख़ियों में 19 जून 2014 को तब आए थे जब उन्हें तत्काेलीन राष्ट्ररपति प्रणब मुखर्जी ने अटॉर्नी जनरल नियुक्तज किया था। जून 2017 तक वो देश के 14वें अटॉर्नी जनरल के पद पर रहे थे (served as the 14th Attorney General) । मुकुल रोहतगी के पिता (Mukul Rohatgi Father)  अवध बिहारी रोहतगी(Bihari Rohatgi) दिल्ली हाई कोर्ट के प्रतिष्ठित जज थे। जबकि खुद मुकुल, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ और सम्मानित वकील रह चुके हैं।

मुकुल रोहतगी बायोग्राफी  (Mukul Rohatgi Biography)

मुकुल रोहतगी का जन्म (Mukul Rohatgi Born): 17 August 1955

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मुकुल रोहतगी की उम्र (Mukul Rohatgi age): 66 years Mumbai

मुकुल रोहतगी राष्ट्रीयता (Mukul Rohatgi Nationality): Indian

मुकुल रोहतगी के पिता (Mukul Rohatgi Father): AB Rohatgi

मुकुल रोहतगी शिक्षा (Mukul Rohatgi Education) : Government Law College, Mumbai

मुकुल रोहतगी पिछला कार्यालय (Mukul Rohatgi Previous office): Attorney-General for India (2014–2017)

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मुकुल रोहतगी के बच्चे (Mukul Rohatgi Children) : Samir Rohatgi

मुकुल रोहतगी के भाई बहन (Mukul Rohatgi Siblings) : Madhulika Singla

मुकुल रोहतगी अटॉर्नी जनरल (Attorney General for India)

19 June 2014 – 18 June 2017

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा नियुक्त (Appointed by former President Pranab Mukherjee)

Preceded by Goolam Essaji Vahanvati

Succeeded by K. K. Venugopal

मुकुल रोहतगी की पर्सनल डिटेल (Mukul Rohatgi Personal details)

मुकुल रोहतगी राष्ट्रीयता (Mukul Rohatgi Nationality) : Indian

मुकुल रोहतगी निवास (Mukul Rohatgi Residence): New Delhi

मुकुल रोहतगी अल्मा मेटर (Mukul Rohatgi Alma mater): Government Law College, Mumbai

मुकुल रोहतगी पेशा (Mukul Rohatgi Occupation): Lawyer

मुकुल रोहतगी (फोटो : सोशल मीडिया ) 

मुकुल रोहतगी (फोटो : सोशल मीडिया ) 

1993 में सीनियर काउंसिल का दर्जा

चूंकि, मुकुल रोहतगी (Mukul Rohatgi) के पिता पेशे से वकील थे तो उनके लिए इस प्रोफेशन में आना आसान था। अक्सर वकालत से जुड़े लोगों का पारिवारिक इतिहास ऐसा ही रहा है। देश के कई ऐसे नामी वकील और जस्टिस हुए हैं जिनके परिवार से पहले ही कोई न कोई इस पेशे से जुड़े रहे हैं। खैर, वो बातें अपनी जगह। मुकुल रोहतगी जब दिल्ली से मुंबई आर्यन मामले में जिरह के लिए गए तो ये उनके लिए नया नहीं था। आपको शायद पता नहीं होगा, मुकुल रोहतगी ने अपने करियर (Mukul Rohatgi Career) की शुरुआत मुंबई से ही की थी। मुंबई स्थित गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से उन्होंने कानून की डिग्री हासिल की थी (Mukul Rohatgi Education) । इसके बाद उन्होंने योगेश कुमार सभरवाल के जूनियर के तौर पर कोर्ट में अपनी प्रैक्टिस शुरू की। बता दें, कि योगेश कुमार सभरवाल (वाई.के.सभरवाल) देश के 36 वें चीफ जस्टिस बने थे। वर्ष 1993 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें सीनियर काउंसिल का दर्जा दिया गया था। साल 1999 में मुकुल रोहतगी एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बने। उस वक्त केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी।

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के वक्त एडिशनल सॉलिसिटर जनरल रहे मुकुल रोहतगी (Mukul Rohatgi) साल 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान देश के अटॉर्नी जनरल बनाए गए (Attorney-General for India (2014–2017)।

गुजरात दंगा मामले में राज्य सरकार के वकील थे मुकुल रोहतगी

मुकुल रोहतगी (Mukul Rohatgi) सबसे ज्यादा उस वक्त सुर्खियों में रहे थे जब साल 2002 के चर्चित गुजरात दंगे मामले में वो राज्यख सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में बचाव के लिए उतरे थे। 2002 के गुजरात दंगों (Gujarat Danga ) और उस दौरान तत्कालीन गुजरात सरकार पर फर्जी एनकाउंटर जैसे कई गंभीर आरोप लगे थे, के बचाव में मुकुल रोहतगी की दलीलें सुप्रीम कोर्ट में काम कर गई। इसके बाद भी वो इस दंगे से जुड़े चर्चित ‘बेस्ट बेकरी’ कांड (Bestop Bakery kand) की भी पैरवी की। साथ ही साथ गुजरात दंगे के दौरान एक और चर्चित नाम रही जाहिरा शेख ममाले में भी सुप्रीम कोर्ट में जिरह की थी।

मुकुल रोहतगी (फोटो : सोशल मीडिया ) 

मुकुल रोहतगी (फोटो : सोशल मीडिया ) 

आरटीआई के जवाब से खुला फीस का राज

मुकुल रोहतगी (Mukul Rohatgi) की पहचान देश के उन चुनिंदा वकीलों में होती है जिनकी फीस सबसे ज्यादा है। लेकिन, ये भी सच है कि इन वकीलों की फीस चर्चा में जरूर रहती है लेकिन सत्यता की कोई कसौटी नहीं है। कोई ये स्पष्ट तौर पर नहीं बता सकता कि फलां केस में फलां वकील ने इतनी फीस ली है। मुकुल रोहतगी के साथ भी ये बातें अछूती नहीं है। लेकिन, रोहतगी की फीस (Mukul Rohatgi ki fees) तब सुर्ख़ियों में रही थी जब एक आरटीआई के जरिए कुछ जानकारी सामने आई थी। दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने मुकुल रोहतगी को सीबीआई कोर्ट के स्पेशल जज लोया की मौत मामले की जांच में स्पेशल प्रोसिक्यूटर नियुक्त किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस केस के लिए रोहतगी को 1.20 करोड़ रुपए दिए गए थे। हालांकि, अप्रैल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने जज लोया की मौत मामले में जांच की मांग को खारिज कर दिया था। तब मुकुल रोहतगी ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया था। साल 2018 में एक आरटीआई के जवाब में महाराष्ट्र सरकार ने बताया था, कि सीनियर काउंसिल मुकुल रोहतगी को राज्य् सरकार की तरफ से जज बीएच लोया केस में फीस के तौर पर 1.21 करोड़ रुपए दिए गए।

आर्यन मामले में एनसीबी को बताया ‘शुतुरमुर्ग’ (Aryan Khan Case) 

अब एक बार फिर लौटते हैं मुकुल रोहतगी (Mukul Rohatgi) और आर्यन खान मामले में। मुकुल रोहतगी जब इस मामले से जुड़े तो अपने मुवक्किल आर्यन का सपोर्ट करना तो बनता है। उन्होंने भी वैसा ही किया। सेशंस कोर्ट में जब आर्यन की जमानत याचिका खारिज हुई थी, उससे पहले ही मुकुल रोहतगी ने कहा था कि ‘आर्यन खान को कैद में रखने का कोई ग्राउंड नहीं है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) एक ‘शुतुरमुर्ग’ की तरह है। जिसने अपना सिर रेत में छिपाया हुआ है।’ दरअसल मुकुल रोहतगी का मानना रहा था कि सबूतों के अभाव में आर्यन को एक सिलेब्रिटी होने की कीमत चुकानी पड़ रही है। शायद इन्हीं दलीलों की वजह से इस केस में उनका आसान हो गया होगा। खैर, कोर्ट की इन बातों की हम समीक्षा नहीं कर सकते।

मुकुल रोहतगी (फोटो : सोशल मीडिया )  

मुकुल रोहतगी (फोटो : सोशल मीडिया )  

आर्यन के पक्ष में सबसे मजबूत दलील

पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी (Mukul Rohatgi) ने आर्यन मामले में कोर्ट के सामने अपनी दलीलें देते हुए कहा था, ‘जमानत एक मानक है, जेल एक अपवाद है। यह मुद्दा कई साल पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुलझाया गया था, क्योंकि संविधान का सबसे स्थापित सिद्धांत ‘जीवन का अधिकार’ और ‘स्वतंत्रता का अधिकार’ है। यह न केवल केवल भारतीयों के लिए, बल्कि भारत में विदेशियों के लिए भी है। अगर वो उसे ( उनका तात्पर्य आर्यन खान से) जमानत देना चाहते हैं, तो यह तुरंत किया जा सकता है। यहां तक कि सार्वजनिक अवकाश के दिनों में भी।’ आर्यन के पक्ष में उनकी ये दलील काफी कुछ समझा गई। आखिरकार, उन्होंने अपने मुवक्किल को बेल दिलवा ही दिया।

अरुण जेटली से थी गहरी दोस्ती (Mukul Rohatgi ke dost Arun Jaitley)

मुकुल रोहतगी (Mukul Rohatgi) एक सार्वजनिक चेहरा हैं। उनके और बीजेपी के दिग्गज नेता तथा पूर्व वित्त और कानून मंत्री स्व. अरुण जेटली के गहरी दोस्ती थी। मुकुल रोहतगी कई बार अरुण जेटली के साथ अपनी दोस्ती और वकीलों के तौर पर साथ में लोधी गार्डन के चक्कर काटने की घटनाओं आदि का भी जिक्र कर चुके हैं। इनके आपस के कई किस्से समय-समय पर सामने आते रहे हैं। साल 2019 में अरुण जेटली के निधन के बाद रोहतगी ने बताया था, कि दिल्ली हाईकोर्ट में उनका और अरुण जेटली का चैंबर अगल-बगल था। यह चैंबर अभी भी उनके पास है। लेकिन अब उनका दोस्त नहीं रहा। उन्होंने बताया था कि कई ऐसे मौके रहे थे जब जेटली के साथ उनकी तीखी बहस होती रही थी। दोनों ने कई मौकों पर एक-दूसरे के खिलाफ कड़े शब्दों का भी इस्तेमाल किया था, लेकिन अंत में दोनों दोस्त की तरह ही साथ बैठते थे। क्योंकि, ये उनका प्रोफेशन रहा है, जिसमें जिरह होती रहती है। इस बात को दोनों ही कभी गंभीरता से नहीं लेते थे।

जैसा हम पहले ही बता चुके हैं मुकुल रोहतगी (Mukul Rohatgi) के पिता अवध बिहारी रोहतगी दिल्ली हाईकोर्ट में जज थे। बाद में जब मुकुल ने मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल की तो ठीक बाद ही प्रैक्टिस शुरू कर दी। उन्होंने इधर-उधर समय जाया नहीं किया। बल्कि, अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं। लेकिन ये समझने की जरूरत है कि आर्यन खान मामले से जुड़ने पर उस केस ने इतनी सुर्खियां बटोरी तो उसकी एक बड़ी वजह मुकुल रोहतगी का बड़ा नाम का जुड़ना रहा है।

कलप्रिट तहलका (राष्ट्रीय हिन्दी साप्ताहिक) भारत/उप्र सरकार से मान्यता प्राप्त वर्ष 2002 से प्रकाशित। आप सभी के सहयोग से अब वेब माध्यम से आपके सामने उपस्थित है।
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