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आर्यन खान की रेव पार्टी: ये तो ड्रग्स का एक नमूना भर है, जानिए कहां से आता है ये नशा

Admin
Last updated: अक्टूबर 3, 2021 6:10 अपराह्न
By Admin 5 Views
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14 Min Read
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आर्यन खान की रेव पार्टी। (Social media)

आर्यन खान की रेव पार्टी। (Social media)

Mumbai Cruise drug bust: नारकोटिक्स कण्ट्रोल ब्यूरो ने मुंबई के पास एक शिप पर छापा मार कर शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया है। इस छापेमारी में एमडीएमए, कोकीन, एमडी, चरस और एक्सटेसी आदि ड्रग्स की बरामदगी की गई। बताया जाता है कि इस ड्रग मामले के तार बॉलीवुड ही नहीं बल्कि दिल्ली तक जुड़े हुए हैं।

लेकिन ये बरामदगी और गिरफ्तारी और ऐसी रेव पार्टियाँ कोई नई बात नहीं है। ऐसा न पहली बार हुआ है और न ये आखिरी बार है। ड्रग्स का जितना लंबा-चौड़ा रैकेट फैला हुआ है, उसमें शायद पकड़-धकड़ और बरामदगी बहुत मामूली होती है। जानकार बताते हैं कि दुनिया में कहीं भी जितनी ड्रग्स पकड़ी जाती हैं उसकी कई गुना ज्यादा पकड़ में नहीं आती हैं। एक अनुमान है कि अवैध ड्रग्स का मात्र पांच से सात फीसदी हिस्सा ही पकड़ में आता है।

– इस साल की शुरुआत में नारकोटिक्स कण्ट्रोल ब्यूरो ने बताया था कि पिछले पांच साल में ड्रग्स बेचकर दाऊद इब्राहिम के गिरोह ने करीब 1500 करोड़ रुपये कमाए हैं।

– दिल्ली पुलिस ने 2020 में 400 करोड़ रुपये की ड्रग्स बरामद कर 882 तस्करों को गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने 5,043 किलोग्राम हेरोइन, कोकीन, गांजा, अफीम और चरस आदि मादक पदार्थ बरामद किए। 2019 की तुलना में ये करीब 550 किलोग्राम ज्यादा है।

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– दिल्ली पुलिस के मुताबिक वर्ष 2020 में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और मणिपुर राज्यों से जुड़े नेटवर्क के तस्करों को पकड़ा गया जिनसे पता चला कि हेरोइन और स्मैक अफगानिस्तान से पाकिस्तान के रास्ते भारत और म्यांमार से उत्तर-पूर्वी राज्य से होती हुई उत्तर भारत पहुंच रही थी। जबकि कोकीन दक्षिण अफ्रीकी, अमेरिकी और दूसरे देशों से हवाई जहाज या कोरियर के रास्ते भारत लाई जाती है।

– संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रायोजित इंटरनेशनल नारकोटिक्स कण्ट्रोल बोर्ड की 2018 की सालाना रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत चरस, गांजे से लेकर कोकीन, एमडीएमए, एक्सटेसी, ट्रामाडोल, मेथाम्फेटामाइन जैसी डिज़ाइनर ड्रग्स के अवैध धंधे का एक बड़ा हब बन चुका है। 2016 में दुनिया में जितना गांजा पकड़ा गया उसका छह फीसदी यानी 300 टन अकेले भारत में पकड़ा गया था। 2017 में इसकी मात्रा 353 टन थी। यानी एक साल में 20 फीसदी का इजाफा।

– बिहार से लगी नेपाल सीमा भी ड्रग्स की तस्करी के लिए कुख्यात हो गई है। बिहार के जोगबनी स्थित इंडो-नेपाल बॉर्डर पर मादक पदार्थों की लगातार हो रही बरामदगी तथा तस्करों की गिरफ्तारी चौंकाने वाली है। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 महीनों में नेपाल के 280 लोगों की गिरफ्तारी 3 किलो से अधिक ब्राउन शुगर व अन्य नशीले पदार्थों के साथ की गई है। पूर्वोत्तर के राज्यों सहित नेपाल व बांग्लादेश से ड्रग्स की खेप पश्चिम बंगाल पहुंचती है, जहां से उसे डिमांड के अनुसार सीमांचल व नेपाल के इलाकों में पहुंचाया जाता है। ड्रग तस्करों का मजबूत नेटवर्क पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी, इस्लामपुर व पांजीपाड़ा में काम कर रहा है।

– नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 2020 के कोविड काल में नशीले पदार्थों की तस्करी बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार बिहार से त्रिपुरा, श्रीलंका, पाकिस्तान व अफगानिस्तान से नशीले पदार्थों की तस्करी की जा रही है।

– देश में याबा नामक एक नशीली दवा का धंधा भी बहुत चल रहा है। ये एक पार्टी ड्रग है। याबा को थाई भाषा में ‘पागलपन की दवा’ के नाम से जाना जाता है। इसका उत्पादन पूर्वी म्यांमार के शान, काचिन और दो अन्य राज्यों में होता है। याबा टैबलेट को बनाने वाली सभी अवैध फर्म्स भले ही म्यांमार में हैं। लेकिन इसके लिए कच्चा माल चीन से आता है। बांग्लादेश के सुरक्षा बलों के म्यांमार से मादक पदार्थों की तस्करी के पारंपरिक मार्ग पर अभियान चलाए जाने के कारण याबा टैबलेट म्यांमा से त्रिपुरा, मिजोरम और असम होते हुए बांग्लादेश पहुंचाई जाती है। जून 2021 तक बीएसएफ त्रिपुरा फ्रंटियर ने 34,674 याबा टैबलेट बरामद की थी।

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इन्टरनेट फार्मेसी

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के लोग कोकीन, हेरोइन, गांजे, मेथाक्वेलोन और केटामीन जैसी मादक दवाएं हासिल करने के लिए ‘अवैध इंटरनेट फार्मेसियों’ का खास कर डार्कनेट (गुप्त इंटरनेट नेटवर्क) पर इस्तेमाल कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में नशीले पदार्थों का ऑनलाइन ऑर्डर किए जाने और उनकी डिलीवरी के लिए कूरियर और डाक सेवाओं के इस्तेमाल की प्रवृति के उदाहरण देखे जा सकते हैं, जहां अधिकारियों ने इस तरीके को नशीले पदार्थों के धंधे के उभरते स्रोत के रूप में चिन्हित किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में साइकोट्रॉपिक पदार्थों वाली प्रिसक्रिप्शन दवाएं, खास कर ट्रैंक्विलाइज़र हासिल करने का मुख्य स्रोत कथित रूप से अवैध इंटरनेट फार्मेसियां बन गई हैं। रिपोर्ट में भारत में ऐसे ड्रग डीलरों की मौजूदगी का भी ज़िक्र है जो कि पूरी दुनिया में अवैध दवाएं बेचते हैं।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार 2017 में भारत में अधिकारियों ने 2 अवैध फार्मेसियों को पकड़ा था जो इंटरनेट पर दवाओं का कारोबार कर रहे थे। उनके पास से नशीले पदार्थों वाले 130,000 टैबलेट बरामद किए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इंटरनेट के जरिए नशीली दवाओं के वैश्विक कारोबार पर एक अन्य अध्ययन में डार्कनेट पर ड्रग्स के धंधे में शामिल कुछ कारोबारियों के दक्षिण एशिया में होने के संकेत मिलते हैं। विशेष रूप से, इस अध्ययन में भारतीयों द्वारा 1,000 से अधिक दवाएं 50 गुप्त ऑनलाइन बाजारों पर बिक्री के लिए डाले जाने की पहचान की गई।

ब्यूरो की 2017 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया कि ‘अवैध रूप से, लेकिन बिना सामने आए ड्रग्स हासिल करना संभव बनाने वाले ‘डार्कनेट’ की नए लोगों को ड्रग्स से जोड़ने की क्षमता चिंता बढ़ाने वाली है।’ रिपोर्ट के अनुसार गांजा या कैनबिस दक्षिण एशिया में, विशेष कर भारत और श्रीलंका में, सर्वाधिक इस्तेमाल किया जाने वाला मादक पदार्थ है। 2017 में पूरे क्षेत्र में सर्वाधिक मात्रा में इसकी खेपें पकड़ी गईं।

अफगानिस्तान है हेरोइन का सबसे बड़ा सप्लायर

भारत में हेरोइन का सबसे बड़ा सप्लायर अफगानिस्तान है। वहां से ड्रग्स पाकिस्तान के रास्ते भारत भेजी जाती हैं। जब से अफगानिस्तान में तालिबान का शासन हुआ है तब से हेरोइन की तस्करी में बहुत तेजी आई है। हाल ही में गुजरात में हेरोइन की बहुत बड़ी खेप पकड़ी गई थी। हजारों करोड़ रुपये का मादक पदार्थ टेलकम पाउडर की आड़ में लाया गया था जिसे भारत के विभिन्न भागों मे भेजा जाना था। बताया जाता है कि अफगानिस्तान में तालिबान का शासन आने के बाद ड्रग तस्करी में तेजी आई है और उसके इस काम में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई भी पूरी मदद कर रही है क्योंकि उसकी मदद के बिना अफगानिस्तान से ईरान पोर्ट पर माल भेजना संभव नहीं है। तालिबान को अफगानिस्तान में अपना शासन चलने के लिए पैसा चाहिए और ऐसे में उसकी सोच है कि जो माल उसके यहां आसानी से उपलब्ध है, उसे बेचकर ज्यादा से ज्यादा पैसा इकट्ठा किया जाए।

असल में अवैध ड्रग कारोबारियों के लिए भारत की स्थिति भी बेहद मुफीद है। इस वजह से भी भारत उनके निशाने पर रहता है। भारत के एक तरफ अफगानिस्तान है तो दूसरी तरफ म्यांमार है। इन दोनों देशों में ड्रग का अवैध कारोबार तेजी से फल-फूलता रहा है। इसलिए भारत को गोल्डेन ट्राइएंगल (इसका केंद्र म्यांमार) और गोल्डेन क्रीसेंट (इसका केंद्र अफगानिस्तान) के बीच फंसा हुआ कहा जाता है। दुनिया में इन दोनों देशों के जरिए बड़े पैमाने पर ड्रग्स का अवैध कारोबार चलता है।

13 सितंबर को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पकड़ी गई खेप के बाद नई दिल्ली, नोएडा, चेन्नई, कोयबंटूर, अहमदाबाद, मांडवी, गांधी धाम और विजयवाड़ा में ऑपरेशन चलाया गया। अकेले दिल्ली में 16.1 किलोग्राम हेरोइन पकड़ी गई। साफ है भारत में ड्रग कारोबार का नेटवर्क छोटे-छोटे शहरों तक पहुंच गया है। इसी तरह म्यांमार से करीब होने की वजह से पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में ड्रग्स का अवैध धंधा पैर पसार चुका है। अब तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत के लिए अवैध ड्रग्स कारोबार को रोकना नई चुनौती लेकर आ गया है।

हाल के महीनों में ड्रग्स की पकड़े जाने के मामले बढ़े हैं। अप्रैल में नौसेना ने श्रीलंका की एक मछली पकड़ने वाली नौका से 337 किलोग्राम हेरोइन जब्त की थी, जिसकी कीमत लगभग 3,000 करोड़ रुपये थी। ये हेरोइन ईरान-बलूचिस्तान क्षेत्र के पास मार्कन पोर्ट से लाई गई, जो अफगानिस्तान से हेरोइन की तस्करी के लिए बड़ा पोर्ट माना जाता है। अप्रैल में ही दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जांबिया के दो यात्रियों से 98 किलोग्राम हेरोइन जब्त हुई थी। मई में चेन्नई हवाई अड्डे पर तंजानिया के दो नागरिकों से इतनी ही मात्रा में हेरोइन पकड़ी गई थी। पिछले वर्ष महामारी और लॉकडाउन के बावजूद नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज एक्ट के तहत 59,806 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से 44 प्रतिशत ड्रग्स की तस्करी और बाकी व्यक्तिगत खपत से जुड़े थे।

85 फीसदी अफीम की खेती अफगानिस्तान में

संयुक्त राष्ट्र की ड्रग्स एंड क्राइम रिपोर्ट 2020 के अनुसार दुनिया की 85 फीसदी अफीम की खेती अफगानिस्तान में होती है। वर्ष 2020 में वहां पर अवैध अफीम की खेती 37 फीसदी बढ़कर 2,95,000 हेक्टेअर तक पहुंच चुकी है। अब तालिबान के नियंत्रण के साथ ही अफीम की खेती में बढ़ोतरी होनी तय है। ये भारत सहित पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ा खतरा है।

रेव पार्टी क्या है

मुंबई में शाहरुख़ खान का बेटा जिस शिप पर पकड़ा गया वहां रेव पार्टी चल रही थी। अब रेव पार्टी का मतलब ड्रग्स वाली पार्टी माना जाना लगा है लेकिन असली में ऐसा नहीं है। रेव पार्टी से तात्पर्य है मनोरंजन के लिए आयोजित किया गया एक ऐसा आयोजन जहाँ अँधेरे में डिस्को लाइट पर डीजे की गूंजती ध्वनियों और संगीत पर लोग थिरकते हैं। यानी ये एक ऐसी पार्टी होती है जहां तेज म्यूजिक के बीच उन्मुक्त वातावरण में लोग नृत्य-संगीत का आनंद लेते हैं। लेकिन आजकल रेव पार्टी बदनाम हो गई है क्योंकि आयेदिन ऐसी खबरें आती रहती हैं जब पुलिस ऐसी पार्टियों से भारी मात्रा में शराब, ड्रग्स, नशे की सामग्री, देह व्यापार से जुड़ीं चीजों को बरामद करती रहती है।

आजकल की रेव पार्टी का आयोजक पार्टी के बारे में सिर्फ खास सर्किल के लोगों को ही बताता है। बाहरी लोगों को जरा भी भनक नहीं लग पाती है। पहले रेव पार्टियां दिल्ली, महरौली, मुंबई, खंडाला, पुणे, पुष्कर मैकलिओडगंज, पार्वती वैली जैसी जगहों पर होती थीं लेकिन अब छोटे शहरों तक ये पहुंच गई हैं। नशे के घालमेल ने रेव पार्टी का स्वरूप भी बदल दिया है। पहले रेव पार्टी खुले में होती थी लेकिन अब छिपकर होने लगी है। नशीले पदार्थ बेचने वालों के लिए ये रेव पार्टियां धंधे की सबसे मुफीद जगह बन गई हैं। बताया जाता है कि इन पार्टियों में मॉडल, सेलिब्रिटी, एवं राजनेताओं के लड़के-लड़कियां जाते हैं।

कलप्रिट तहलका (राष्ट्रीय हिन्दी साप्ताहिक) भारत/उप्र सरकार से मान्यता प्राप्त वर्ष 2002 से प्रकाशित। आप सभी के सहयोग से अब वेब माध्यम से आपके सामने उपस्थित है।
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