अगर आपको हमेशा रहती है थकान तो हो जाइए सावधान
मायाल्जिक एन्सेफलोमाइलाइटिस/ क्रानिक थकान सिंड्रोम (एमई/सीएफएस) का नाम जितना जटिल है, यह बीमारी उतनी ही संवेदनशील है। इसे कभी-कभी केवल क्रानिक थकान के रूप में संदर्भित किया जाता है लेकिन थकान केवल इसके लक्षणों में से एक है। आस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं के मुताबिक, वास्तव में, एमई/ सीएफएस एक जटिल न्यूरोलाजिकल बीमारी है जो शरीर की लगभग हर प्रणाली को प्रभावित करती है। इसका नाम मांसपेशियों में दर्द (मायाल्जिया), मस्तिष्क की सूजन (एन्सेफलोमाइलाइटिस) और लंबे समय तक रहने वाली थकान को संदर्भित करता है जिसमें आराम करने से भी राहत नहीं मिलती है।
क्या है एम / सीएफएस : एमई / सीएफएस सभी उम्र के लोगों को प्रभावित करती है लेकिन आमतौर पर ये मध्य उम्र के दौरान ज्यादा देखने को मिलती है। यह महिलाओं में पुरुषों की तुलना में दो से तीन गुना अधिक सामान्य है । इस स्थिति के दो मुख्य लक्षण हैं। एक अक्षम करने वाली दीर्घकालिक थकान जिसमें आराम से भी राहत नहीं मिलती और दूसरा शारीरिक या मानसिक प्रयास के बाद लक्षणों का बिगड़ना । इसे पोस्ट- एक्सशनल माइलेज के रूप में जाना जाता है। इसका मतलब है कि थोड़ी सी मेहनत भी लक्षणों को बहुत खराब कर सकती है। यह अलग-अलग लोगों में भिन्न-भिन्न हो सकती है। इसके लक्षणों की बात करें तो ज्यादातर लोगों में दर्द, नींद की समस्या, संज्ञानात्मक कठिनाइयां (जैसे सोचने, याद रखने और निर्णय लेने में), फ्लू जैसे लक्षण, चक्कर आना, पाचन संबंधी समस्याएं, हृदय गति में उतार-चढ़ाव और कई अन्य समस्याएं शामिल हैं। कई शोधों से यह भी पता चलता है कि यह स्थिति शरीर की ऊर्जा उत्पादन (मेटाबालिज्म), संक्रमण से लड़ने (प्रतिरक्षा प्रणाली), मांसपेशियों तक आक्सीजन पहुंचाने और रक्तचाप व हृदय गति को नियंत्रित करने (वाहिकीय प्रणाली) के तरीके को भी प्रभावित करती है।
विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब
