भाजपाई सपेरों के चंगुल में फंसे जनपद के जुझारू नेता बने दंतविहीन सांप
बसपा प्रत्याशी पूजा गुप्ता के भाजपाई बनने से बढ़ीं मीरा गांधी की मुश्किलें
-मदन गोपाल शर्मा
एटा। नगर निकाय चुनाव में अपनी पत्नी और निर्दलीय प्रत्याशी मीरा गांधी की जीत को सुनिश्चित मानकर चल रहे पूर्व चेयरमैन राकेश गांधी की पेशानी पर बल जरूर पड़ गये होंगे। वे अब तक निश्चिंत थे कि चुनाव मैदान में तीन वैश्य महिला प्रत्याशी हैं। वैश्य वोट आपस में ही कट जायेगा और वे अन्य समाज के वोट से बढ़त लेकर विजयश्री प्राप्त कर लेंगे। उन्होंने यह स्वप्न में भी नहीं सोचा होगा कि बसपा प्रत्याशी पूजा गुप्ता भाजपा का दामन थाम लेंगीं। हालांकि निर्दलीय प्रत्याशी मीरा गांधी अपने पति राकेश गांधी की अपनी लोकप्रियता से मजबूत स्थिति में तो हैं लेकिन वैश्य वर्ग की बसपा प्रत्याशी पूजा गुप्ता के भाजपाई बनने से वह स्थिति नहीं रही है जो पहले दिखाई दे रही थी।
वैश्य समाज से ही कांगे्रस प्रत्याशी सीमा गुप्ता चुनाव मैदान में हैं। हालांकि कांगे्रस के पक्ष में कोई लहर या सहानुभूति नहीं है। जनपद में कांग्रेसियों की सिमटती संख्या के बावजूद भी सीमा गुप्ता पूरे जोश के साथ चुनाव प्रचार में जुट गई हैं।
समाजवादी पार्टी ने इस बार मुन्नी बेगम के नाम पर दांव लगाया है। इस बार भी चुनाव में मुस्लिम समाज से उतरीं मुन्नी बेगम पूर्व में कई नगर निकाय चुनाव लड़ चुके सपा नेता जहीर अहमद की मां हैं। जहीर अहमद एक बार तो चेयरमैन बनने के करीब पहुंच गये थे। लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। इस बार जहीर अहमद को पूरे मुस्लिम और समाजवादी पार्टी के परम्परागत वोट को मिलने का भरोसा है। हालांकि जहीर अहमद व्यवहार कुशल, मृदुभाषी व्यक्ति हैं उनका अन्य जातियों के वोटरों पर खासा प्रभाव है लेकिन कितना वोट उन्हें अन्य समाज का मिल सकेगा यह तो समय ही बतायेगा।
आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी राजकुमारी यादव के चुनाव मैदान में उतरने से यादव मतदाताओं में भी वोट का बंटवारा होगा चाहे प्रतिशत कुछ भी रहे। राजकुमारी यादव को मिलने वाला यादव वोट निर्दलीय प्रत्याशी मीरा गांधी को मिलने वाला ही होगा। पिछले दो चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशी रहे राकेश गांधी और उनकी पत्नी मीरा गांधी को ब्राह्मण समाज का वोट भी मिलता रहा था जो इस बार एकजुट होकर आम आदमी पार्टी की ओर जाता दिख रहा है। भाजपा द्वारा ब्राह्मण समाज की अनदेखी किये जाने से आहत पूरा समाज आम आदमी पार्टी के पक्ष में जाने के संकेत मिल रहे हैं। चुनाव में अन्तिम रात कत्ल की रात कही जाती है।
ब्राह्मण समाज का कहना है कि वे एक बार राकेश गांधी और दूसरी बार उनकी पत्नी मीरा गांधी को चुनाव जिता कर देख चुके हैं। समाज के कई संभ्रांत नागरिकों का कहना है कि इस बार नगर का चेयरमैन बदला जाना चाहिए। उनका कहना है कि बुर्जुगों को उठने-बैठने के लिए शहर के बीचोंबीच सिर्फ एक मेहता पार्क ही था जिसे राकेश गांधी ने अपने कार्यकाल में वीरान कर दिया। नगरपालिका में जानकारी रखने वालों का तो यहां तक कहना है कि राकेश गांधी ने मालियों और सफाई कर्मियों को बाबू बना दिया। शहर में सीवर की पाइप लाइन ने भी राकेश गांधी के पूर्व के कार्यकाल में पूरे शहर में किये गये गली और नाली निर्माण का ध्वस्त कर दिया। आज एटा शहर की गलियों की वही दशा है जो राकेश गांधी के कार्यकाल से पूर्व थी।
भाजपा प्रत्याशी सुधा गुप्ता को भी यह चुनाव आसान नहीं है क्योंकि पिछले चुनाव में भाजपाई होते हुए भी भाजपा के प्रत्याशी के खिलाफ भितरघात करने वाले आज भी भाजपा में ही हैं। उच्च पदों पर बैठे भाजपाई ही उन्हें धोखे का शिकार बनायेंगे। क्योंकि पिछले चुनाव में उन्हीं भाजपाईयों ने परदे के पीछे से निर्दलीय प्रत्याशी मीरा गांधी को जिताने में अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। धोखाधड़ी एटा के भाजपाईयों के रक्त में संचारित हो रही है। कभी कांगे्रस में मजबूत स्थिति बनाये रखने वाले जनपद के जुझारू नेता समझे जाने वाले प्रमोद गुप्ता को भाजपा में लाकर उनकी राजनीतिक हत्या कर दी गई है। निकाय चुनाव की घोषणा के छह माह पूर्व से वह नगर पालिका एटा के चेयरमैन बनने का सपना देख रहे थे, लेकिन भाजपा ने टिकट सुधा गुप्ता को देकर उनके अरमानों पर पानी फेर दिया है। बसपा नेता बबलू चैहान का भी भाजपा में आने से जुझारूपन देखने को नहीं मिल रहा है। वही हाल प्रशान्त गुप्ता (पी.जी.) और उनकी पत्नी पूजा गुप्ता का होगा। भाजपा सपेरे की तरह काम करती है जिस प्रकार सपेरा सांपों के दांत तोड़कर काटने का डर समाप्त कर देता है वैसे ही भाजपा ने विपक्षी दलों के जुझारू नेताओं को भाजपाई पट्टा पहनाकर उनके जुझारूपन को खत्म कर गुमनामी के गर्त में धकेलने का काम किया है।
