आओ ज्ञान का गीत सुनाएँ।
किताबों का उत्सव मनाएँ।।
सोच को नई धार दें हम।
पन्नों से उजाला लाएँ।।
अज्ञान के सारे पर्दों को।
शब्दों से आज हटाएँ।।
कलम बिके ये ठीक नहीं है।
सच की स्याही भर लाएँ।।
हर एक पन्ना मूल्य सिखाए।
संस्कारों को हम अपनाएँ।।
प्रश्नों से विश्वास जगाकर।
उत्तर तक हम पहुँच जाएँ।।
मेहनत को साथी बनाकर।
सपनों को सब सच बनाएँ।।
बीते डर और सारे भ्रम को।
अध्ययन से सब दूर भगाएँ।।
समय, समाज और जीवन को।
किताबों से हम समझ जाएँ।।
हवा और दौर के आगे।
सोच-समझ कर कदम बढ़ाएँ।।
ज्ञान तिरंगा हाथ में लेकर।
बुद्धि का नव गान सुनाएँ।।
मानवता में प्राण भरें हम।
शिक्षा को यूँ गले लगाएँ।।
नारे और बहसें छोड़ो।
चलो मजबूत चरित्र बनाएँ।।
ख्वाबों की ऊँची मंज़िल तक।
किताबों संग बढ़ते जाएँ।।
— डॉ. प्रियंका सौरभ
