
संजीत अपहरण हत्याकांड में आईपीएस अपर्णा गुप्ता पर लगाए गए आरोप सही निकले हैं। मामले की जांच कर रहीं लखनऊ की एक वरिष्ठ आईपीएस अफसर की जांच रिपोर्ट में इन्हें दोषी पाया है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट शासन को भेजकर आईपीएस पर कार्रवाई की संस्तुति की है। शासन जल्द ही दोषी आईपीएस अपर्णा गुप्ता पर बड़ी कार्रवाई कर सकता है।

उत्तरप्रदेश में कानपुर बर्रा के चर्चित संजीत यादव अपहरण हत्याकांड में परिजनों ने आरोप लगाया था कि तत्काली एसपी साउथ आईपीएस अपर्णा गुप्ता की लापरवाही से उनके बेटे की हत्या हुई है। इसमें आईपीएस अपर्णा गुप्ता को सस्पेंड करने के साथ ही जांच लखनऊ की एक आईजी स्तर के अफसर को दी गई थी।
आईजी ने मामले की जांच की तो चार प्रमुख बिंदुओं पर लापरवाही सामने आई। इन प्रमुख बिंदुओं के साथ आईपीएस अफसर ने अपने रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी है।
जांच में यह प्रमुख लापरवाही आई सामने
- जांच में सामने आया कि एसपी साउथ ने पूरे मामले के पर्यवेक्षण में घोर लापरवाही की थी। इसी के चलते एक महीने बाद अपहरण हत्याकांड का खुलासा हो सका।
- इसके बाद पीडि़त परिवार से समन्वय नहीं बना सकीं। पीडि़त परिवार को भरोसे में नहीं ले पाने के चलते केस बिगड़ता चला गया।
- पीडि़त परिवार ने आरोप लगाया था कि फिरौती की रकम पुलिस के साथ दी थी, लेकिन आईपीएस ने इस बात को खारिज कर दिया था। लेकिन बाद में खुद ही बयान दिया था कि पुल के ऊपर से बैग फेंका गया, लेकिन जब तक पुलिस सड़क से घूमकर पुल के नीचे पहुंची अपहरणकर्ता फरार हो गए।
- पुलिस ने दावा किया था कि फिरौती में नकली नोट दिए गए थे। लेकिन जब यह जांच हुई कि कौन पुलिस कर्मी पैसे लेने गया था…? तो किसी भी पुलिस कर्मी का नाम सामने नहीं आ सका।
बरेली के कारोबारी की पैरवी से भड़की जांच अफसर
शासन ने संजीत अपहरण हत्याकांड में आईपीएस अपर्णा गुप्ता की जांच लखनऊ के वरिष्ठ आईपीएस अफसर को सौंपी थी। इसके बाद तत्कालीन एसपी साथ को बचाने के लिए जांच अफसर से बरेली के रसूखदार व्यापारी ने जांच अफसर से पैरवी की थी। एड़ी से चोटी तक का जोर लगा दिया था।
सीनियर आईपीएस अफसर ने इसके बाद भी उनकी एक नहीं सुनी और साक्ष्य व बयान के आधार पर मामले में निष्पक्ष जांच करके आईपीएस को दोषी बनाया है। कानपुर के बर्रा निवासी 28 वर्षीय लैब टेक्नीशियन संजीत यादव की 26 जून, 2020 को अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अपहरणकर्ताओं ने 30 लाख रुपए की फिरौती मांगी थी।
संजीत को छुड़ाने के लिए घरवालों ने 30 लाख रुपए फिरौती की रकम पुलिस को दी थी। पुलिस ने बदमाशों को पकडऩे के लिए जाल बिछाया था, लेकिन बदमाश पुलिस को भी गच्चा देकर रकम लेकर फरार हो गए थे। एक महीने बाद पुलिस ने खुलासा किया। संजीत की हत्या के बाद शव पांडु नदी में फेंक दिया था।
संजीत अपहरण हत्याकांड में परिजन पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने सीबीआई से पूरे मामले की जांच कराने की मांग शासन से की थी। इसके बाद शासन के आदेश पर 13 अक्तूबर 2021 को सीबीआई की लखनऊ यूनिट ने मामले में एफआईआर दर्ज करके अपनी जांच शुरू कर दी है। सीबीआई ने परिजनों के बयान और बर्रा थाने से एक-एक दस्तावेज जुटाए हैं।

संजीत अपहरण हत्याकांड में आईपीएस अपर्णा गुप्ता पर लगाए गए आरोप सही निकले हैं। मामले की जांच कर रहीं लखनऊ की एक वरिष्ठ आईपीएस अफसर की जांच रिपोर्ट में इन्हें दोषी पाया है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट शासन को भेजकर आईपीएस पर कार्रवाई की संस्तुति की है। शासन जल्द ही दोषी आईपीएस अपर्णा गुप्ता पर बड़ी कार्रवाई कर सकता है।

उत्तरप्रदेश में कानपुर बर्रा के चर्चित संजीत यादव अपहरण हत्याकांड में परिजनों ने आरोप लगाया था कि तत्काली एसपी साउथ आईपीएस अपर्णा गुप्ता की लापरवाही से उनके बेटे की हत्या हुई है। इसमें आईपीएस अपर्णा गुप्ता को सस्पेंड करने के साथ ही जांच लखनऊ की एक आईजी स्तर के अफसर को दी गई थी।
आईजी ने मामले की जांच की तो चार प्रमुख बिंदुओं पर लापरवाही सामने आई। इन प्रमुख बिंदुओं के साथ आईपीएस अफसर ने अपने रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी है।
जांच में यह प्रमुख लापरवाही आई सामने
- जांच में सामने आया कि एसपी साउथ ने पूरे मामले के पर्यवेक्षण में घोर लापरवाही की थी। इसी के चलते एक महीने बाद अपहरण हत्याकांड का खुलासा हो सका।
- इसके बाद पीडि़त परिवार से समन्वय नहीं बना सकीं। पीडि़त परिवार को भरोसे में नहीं ले पाने के चलते केस बिगड़ता चला गया।
- पीडि़त परिवार ने आरोप लगाया था कि फिरौती की रकम पुलिस के साथ दी थी, लेकिन आईपीएस ने इस बात को खारिज कर दिया था। लेकिन बाद में खुद ही बयान दिया था कि पुल के ऊपर से बैग फेंका गया, लेकिन जब तक पुलिस सड़क से घूमकर पुल के नीचे पहुंची अपहरणकर्ता फरार हो गए।
- पुलिस ने दावा किया था कि फिरौती में नकली नोट दिए गए थे। लेकिन जब यह जांच हुई कि कौन पुलिस कर्मी पैसे लेने गया था…? तो किसी भी पुलिस कर्मी का नाम सामने नहीं आ सका।
बरेली के कारोबारी की पैरवी से भड़की जांच अफसर
शासन ने संजीत अपहरण हत्याकांड में आईपीएस अपर्णा गुप्ता की जांच लखनऊ के वरिष्ठ आईपीएस अफसर को सौंपी थी। इसके बाद तत्कालीन एसपी साथ को बचाने के लिए जांच अफसर से बरेली के रसूखदार व्यापारी ने जांच अफसर से पैरवी की थी। एड़ी से चोटी तक का जोर लगा दिया था।
सीनियर आईपीएस अफसर ने इसके बाद भी उनकी एक नहीं सुनी और साक्ष्य व बयान के आधार पर मामले में निष्पक्ष जांच करके आईपीएस को दोषी बनाया है। कानपुर के बर्रा निवासी 28 वर्षीय लैब टेक्नीशियन संजीत यादव की 26 जून, 2020 को अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अपहरणकर्ताओं ने 30 लाख रुपए की फिरौती मांगी थी।
संजीत को छुड़ाने के लिए घरवालों ने 30 लाख रुपए फिरौती की रकम पुलिस को दी थी। पुलिस ने बदमाशों को पकडऩे के लिए जाल बिछाया था, लेकिन बदमाश पुलिस को भी गच्चा देकर रकम लेकर फरार हो गए थे। एक महीने बाद पुलिस ने खुलासा किया। संजीत की हत्या के बाद शव पांडु नदी में फेंक दिया था।
संजीत अपहरण हत्याकांड में परिजन पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने सीबीआई से पूरे मामले की जांच कराने की मांग शासन से की थी। इसके बाद शासन के आदेश पर 13 अक्तूबर 2021 को सीबीआई की लखनऊ यूनिट ने मामले में एफआईआर दर्ज करके अपनी जांच शुरू कर दी है। सीबीआई ने परिजनों के बयान और बर्रा थाने से एक-एक दस्तावेज जुटाए हैं।
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