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लेख

निरस्त्रीकरण आज विश्व की आवश्यकता है (5 मार्च दिवस विशेष आलेख)

admin
Last updated: मार्च 4, 2025 3:29 अपराह्न
By admin 20 Views
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10 Min Read
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हर वर्ष 5 मार्च को ‘अंतर्राष्ट्रीय निरस्त्रीकरण और अप्रसार जागरूकता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि यह दिवस विशेष रूप से युवाओं में निरस्त्रीकरण के मुद्दों के बारे में जागरूकता और समझ को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। गौरतलब है कि इस दिवस की शुरुआत ‘शांति और सुरक्षा’ के लिए निरस्त्रीकरण और अप्रसार के महत्व को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2021 में संयुक्त राष्ट्र महासभा(यूएनजीए) द्वारा इसकी स्थापना की गई थी। यदि हम यहां इसके इतिहास की बात करें तो इस संदर्भ में 7 दिसंबर 2022 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव अपनाया और प्रति वर्ष 5 मार्च को ‘अंतर्राष्ट्रीय निरस्त्रीकरण और अप्रसार जागरूकता दिवस’ के रूप में घोषित किया। गौरतलब है कि 5 मार्च 2023 को अंतर्राष्ट्रीय निरस्त्रीकरण और अप्रसार जागरूकता दिवस का पहला आयोजन किया गया। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि प्रति वर्ष 24 से 30 अक्टूबर तक ‘संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण सप्ताह’ मनाया जाता है।कहना चाहूंगा कि इस सप्ताह का आयोजन निरस्त्रीकरण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए किया जाता है।इसी तरह से, परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस 26 सितंबर को मनाया जाता है।सच तो यह है कि आज पूरा विश्व बारूद के ढ़ेर पर खड़ा हुआ है। संपूर्ण विश्व में हथियारों की होड़ लगी हुई है। पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि आज विश्व में अमेरिका सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश है, जबकि रूस दूसरे स्थान पर है।फ्रांस, चीन और जर्मनी,इटली, यूनाइटेड किंगडम, स्पेन, दक्षिण कोरिया, इजरायल भी शीर्ष हथियार निर्यातक देशों में शामिल हैं।वास्तव में,वैश्विक हथियार व्यापार एक बहुत बड़ा उद्योग है, जो सदियों-सदियों से अस्तित्व में है। कहना ग़लत नहीं होगा कि हर साल दुनिया में अरबों डॉलर के हथियारों की खरीद-फरोख्त की जाती है। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2021 में दुनिया भर में हथियारों का व्यापार 127 बिलियन डॉलर था।आज स्थिति यह है कि दुनिया के विभिन्न हथियार निर्यातक देश हर साल हथियार बेचकर अरबों-खरबों रुपये कमाते हैं।स्वीडिश थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार, वर्ष 2019-23 की अवधि के लिए भारत दुनिया का शीर्ष हथियार आयातक था, जिसमें वर्ष 2014-18 की अवधि की तुलना में आयात में 4.7% की वृद्धि हुई थी। वहीं, यूक्रेन में युद्ध की पृष्ठभूमि में, रिपोर्ट में यह बात कही गई है कि वर्ष 2014-18 और वर्ष 2019-23 के बीच यूरोपीय देशों द्वारा हथियारों के आयात में 94% की वृद्धि हुई है। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2019-23 में 10 सबसे बड़े हथियार आयातकों में से नौ, जिनमें भारत, सऊदी अरब और कतर के शीर्ष 3 शामिल हैं, एशिया और ओशिनिया या मध्य पूर्व में थे। वर्ष 2022-23 में 30 से अधिक देशों से प्रमुख हथियारों का हस्तांतरण प्राप्त करने के बाद यूक्रेन वैश्विक स्तर पर चौथा सबसे बड़ा हथियार आयातक बन गया। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि यूरोप के राज्यों ने वर्ष 2014-18 और वर्ष 2019-23 के बीच प्रमुख हथियारों के अपने आयात को लगभग दोगुना (+94 प्रतिशत) कर दिया। वर्ष 2019-23 में एशिया, ओशिनिया और मध्य पूर्व में हथियारों की कहीं बड़ी मात्रा प्रवाहित हुई, जहां 10 सबसे बड़े हथियार आयातकों में से नौ हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका ने वर्ष 2014-18 और वर्ष 2019-23 के बीच अपने हथियारों के निर्यात में 17 प्रतिशत की वृद्धि की, जबकि रूस के हथियारों का निर्यात आधा हो गया। रूस पहली बार तीसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक था, जो फ्रांस से ठीक पीछे था। बहरहाल,कहना चाहूंगा कि आज अमरीका, रूस और चीन जैसी बड़ी ताक़तों की आपसी होड़ बढ़ने के कारण हथियारों के वैश्विक कारोबार में लगातार बढ़ोतरी हुई है।हैरानी की बात तो यह है कि आज पूरे विश्व में हथियारों का कारोबार तेज़ी से फल-फूल रहा है। हर साल हथियारों का कई बिलियन डॉलर का अंतरराष्ट्रीय कारोबार होता है। आंकड़े बताते हैं कि आज भारत दुनिया के हथियार बेचने वाले 25 बड़े देशों में की सूची में शामिल है।भारत 2015 से 2019 की अवधि तक दूसरा सबसे ज्यादा हथियार खरीदने वाला देश रहा। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2023-24 देश में 1.27 लाख करोड़ रुपये के हथियारों का निर्माण हुआ यानी रक्षा उत्पादन किया गया। यह उत्पादन वर्ष 2014-15 की तुलना में 2.7 गुना ज्यादा है। एक उपलब्ध जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार 2029 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। बहरहाल, कहना ग़लत नहीं कि हथियारों की होड़ के कारण आज दुनिया विनाश के मुहाने पर खड़ी हुई है। यदि हम यहां रूस-यूक्रेन युद्ध की ही बात करें तो तीन साल की जंग में यूक्रेन 18 प्रतिशत तक सिकुड़ गया है। दोनों देशों (रूस-यूक्रेन) के बीच विध्वंस, तबाही और बर्बादी में हजारों लाखों लोग मारे जा चुके हैं। एक उपलब्ध जानकारी के अनुसार रूस-यूक्रेन युद्ध से अब तक 1-1.5 खरब डॉलर (लगभग 80-125 लाख करोड़ रुपये) का नुकसान हो चुका है, जो कि बहुत बड़ी क्षति है। युद्ध के कारण कोई भी देश बहुत पीछे चला जाता है और उससे उबरना बहुत ही मुश्किल होता है। युद्ध के कारण आर्थिक व जान-माल को तो नुकसान पहुंचता ही है पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र भी व्यापक असर पड़ता है। पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि इजरायल में युद्ध ने 67.57 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचाया है, जहां स्वास्थ्य और शिक्षा का बजट जंग में खर्च हुआ। वहीं, गाजा और वेस्ट बैंक में 50 अरब डॉलर का निवेश बर्बाद हुआ, बेरोज़गारी दर 80% तक पहुंच गई और 61% लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। बहरहाल, पाठकों को बताता चलूं कि ‌निरस्त्रीकरण का मतलब है-‘ हथियारों को कम करना, सीमित करना या खत्म करना।’ वास्तव में, यह आम तौर पर किसी देश के सैन्य या किसी खास तरह के हथियारों को संदर्भित करता है। कहना ग़लत नहीं होगा कि निरस्त्रीकरण के ज़रिए, हथियारों की होड़ को रोका जा सकता है और मानवता के लिए खतरे को कम किया जा सकता है। यह निरस्त्रीकरण ही है जो किसी देश के नागरिकों के बीच पीड़ा को रोक सकती है,राज्यों से सैन्य व्यय का बोझ खत्म कर सकती है,परमाणु युद्ध की संभावना को कम कर सकती है तथा इसके जरिए ही सुरक्षा, शांति और मानवता के अस्तित्व को बढ़ाया जा सकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो निरस्त्रीकरण और अप्रसार जागरूकता के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस सामूहिक विनाश के हथियारों से उत्पन्न मौजूदा खतरे का एक अनुस्मारक है। वास्तव में यह वैश्विक कार्रवाई के लिए एक मंच प्रदान करता है और निरस्त्रीकरण और अप्रसार प्रयासों पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है और जागरूकता बढ़ाने और संवाद को बढ़ावा देकर, यह दिवस सभी के लिए एक सुरक्षित दुनिया बनाने में मदद करता है।यदि हम यहां इस दिवस के लक्ष्यों और उद्देश्यों की बात करें तो यह दिवस सामूहिक विनाश के हथियारों के खतरों और निरस्त्रीकरण और अप्रसार के महत्व के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देता है।यह आम आदमी के बीच निरस्त्रीकरण और अप्रसार मुद्दों के बारे में शिक्षा को बढ़ावा देता है तथा हथियारों के खतरे को कम करने और शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए कार्रवाई को प्रोत्साहित करता है। अंत में यही कहूंगा कि निरस्त्रीकरण प्रयास शांति और सुरक्षा को बढ़ाने , विभिन्न सशस्त्र संघर्षों को रोकने और उन्हें समाप्त करने और हथियारों के कारण होने वाली मानवीय पीड़ा को कम करने में योगदान करते हैं। वास्तव में आज मानवता की रक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना,मानवता के सिद्धांतों को बनाए रखना, देश के सभी नागरिकों की सुरक्षा करना, सतत विकास को बढ़ावा देना, राज्यों के बीच विश्वास और भरोसा बढ़ाना और सशस्त्र संघर्ष को रोकना और समाप्त करना बहुत ही जरूरी और आवश्यक है।

सुनील कुमार महला, फ्रीलांस राइटर, कालमिस्ट व युवा साहित्यकार, उत्तराखंड।

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