डिजिटल दौर में शिक्षक की बढती जिम्मेदारी
आज का समय डिजिटल प्रारूप का है। इसने छात्रों को सीखने के नए अवसर दिए हैं, लेकिन साथ ही शिक्षकों के सामने अनेक चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। डिजिटल युग में शिक्षक की भूमिका केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि उन्हें तकनीक, प्रबंधन, मूल्य- निर्माण और मनोवैज्ञानिक संतुलन का भी ध्यान रखना पड़ता है। सबसे पहली और बड़ी चुनौती है तकनीकी ज्ञान एवं उसका प्रयोग | डिजिटल युग में शिक्षकों के लिए केवल विषय का ज्ञान पर्याप्त नहीं है, उन्हें तकनीक से लैस होना अनिवार्य हो गया है। दूसरी बड़ी चुनौती है व्यक्तिगत संपर्क और भावनात्मक जुड़ाव का अभाव। पारंपरिक शिक्षा प्रणाली में शिक्षक और छात्र के बीच एक भावनात्मक संबंध होता था, जिससे शिक्षक न केवल ज्ञान देता था, बल्कि छात्र के व्यक्तित्व निर्माण, मूल्य शिक्षा और जीवन कौशल में भी योगदान करता था। लेकिन डिजिटल माध्यम में यह संबंध कमजोर पड़ता जा रहा है। वर्चुअल क्लासरूम में शिक्षक छात्रों की भावनाओं, उनके मनोभावों और सीखने में आने वाली कठिनाइयों को पूरी तरह नहीं समझ पाते। इससे शिक्षा में मानवीय स्पर्श कम हो रहा है। यह चुनौती इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि शिक्षा केवल तथ्यों का आदान- प्रदान नहीं है, बल्कि यह चरित्र निर्माण की प्रक्रिया भी है।
डिजिटल डिवाइस और ध्यान भटकाव भी शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती है। आनलाइन क्लास के दौरान छात्र अक्सर मल्टीटास्किंग करते हैं। क्लास में कई छात्र चुपके से स्मार्टफोन आदि लेकर आते हैं और इंटरनेट मीडिया या वीडियो गेम में व्यस्त रहते हैं। शिक्षक के लिए यह सुनिश्चित करना कठिन हो जाता है कि छात्र वास्तव में कितनी गंभीरता से पढ़ाई कर रहे हैं। इस कारण शिक्षण की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। इसके अलावा, डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध असीमित जानकारी का सही और गलत में अंतर करना भी छात्रों के लिए मुश्किल है। ऐसे में शिक्षक की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह छात्रों को विश्वसनीय और प्रामाणिक स्रोतों की पहचान कराना सिखाए। एक अन्य चुनौती है मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना। आनलाइन परीक्षाओं के दौरान नकल की आशंका अधिक रहती है। इससे न केवल मूल्यांकन की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है, बल्कि मेहनत करने वाले छात्रों के साथ अन्याय भी होता है। भाषा और संचार का बदलता स्वरूप भी शिक्षकों के लिए चुनौती है। एक और महत्वपूर्ण चुनौती है शिक्षक पर बढ़ता मानसिक और पेशेवर दबाव | डिजिटल युग में छात्रों और अभिभावकों की अपेक्षाएं कई गुना बढ़ गई हैं।
हालांकि यह कहना गलत होगा कि डिजिटल युग केवल चुनौतियां लाया है। इसने शिक्षकों को नए अवसर भी दिए हैं। वे अब वैश्विक ज्ञान से जुड़ सकते हैं, नवीन शिक्षण पद्धतियों का प्रयोग कर सकते हैं और छात्रों को बेहतर संसाधन उपलब्ध करा सकते हैं। ऐसे में शिक्षकों को इन चुनौतियों का समाधान खोजना होगा। इसके लिए आवश्यक है कि सरकार और शैक्षणिक संस्थाएं शिक्षकों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करें, उन्हें तकनीकी साधन उपलब्ध कराएं और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी पहल करें।
विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब
