श्रीनगर। भारी ठंड के बीच जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के बड़े हिस्से में बिजली गुल (Blackout) है। बिजली विकास विभाग के करीब 20 हजार कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। जम्मू-कश्मीर बिजली विकास विभाग को पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (Power grid corporation of India) में विलय करने और निजी कंपनियों को संपत्ति (Privatisation) सौंपने के सरकार के कदम के खिलाफ कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। कड़कड़ाती ठंड में बिजली बंद होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन के आग्रह पर बिजली स्टेशनों पर सैनिकों को तैनात किया गया है। बिजली सेवा बहाल करने की कोशिश जारी है।
जम्मू बिजली विभाग के कर्मचारियों की जारी हड़ताल से प्रभावित आवश्यक सेवाओं को बहाल करने के लिए सेना को तैनात किया गया है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रशासन के अनुरोध के बाद हड़ताल से उपजे हालात से निपटने के लिए यह तैनाती की गई। जम्मू संभागीय आयुक्त राघव लंगर ने सेना से आग्रह किया था कि बिजली विभाग के कर्मियों की हड़ताल के कारण जम्मू क्षेत्र में आवश्यक सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। हम मुख्य बिजली स्टेशनों और जलपूर्ति स्रोतों की बहाली के जरिए आवश्यक सेवाओं को सामान्य करने में सहायता के लिए भारतीय सेना की मदद चाहते हैं। सेना ने पत्र पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आवश्यक आपूर्ति बहाल करने के लिए अपने सैनिकों को महत्वपूर्ण बिजली स्टेशनों और मुख्य जलापूर्ति स्रोतों पर तैनात किया है।
अपरिहार्य हैं बिजली क्षेत्र में सुधार
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल पर जम्मू संभागीय आयुक्त राघव लंगर ने कहा कि बिजली विकास विभाग (पीडीडी) के कर्मचारियों के साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर विभिन्न स्तरों पर बातचीत हो चुकी है। बिजली क्षेत्र में सुधार अपरिहार्य हैं। केंद्र ने हमें इसे सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। बिजली क्षेत्र में आने वाली निधियों और अनुदानों को कुछ सत्यापन योग्य उद्देश्य मानदंड और प्राप्त करने योग्य मापदंडों के साथ जोड़ा जाएगा। लोगों को सप्ताह के सातों दिन चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना लक्ष्य है। सरकार जनहित की रक्षा के लिए ईमानदारी से काम कर रही है।
वहीं, पीडीडी हड़ताल पर जम्मू पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्प के एमडी शिव अनंत तायल ने कहा कि बिजली क्षेत्र के सुधारों में एक जनादेश कहता है कि सभी राज्यों में अलग-अलग बिजली उत्पादन ट्रांसमिशन वितरण कंपनियां होंगी। इसलिए वेतन का आंतरिक लेखा अलग-अलग किया जाता है। हमने समय पर वेतन का आश्वासन दिया है। उनकी अनबंडलिंग की मांग, यानी पिछली प्रणाली को लागू करना संभव नहीं है। क्योंकि ये बिजली क्षेत्र के सुधार पूरे भारत में लागू किए गए हैं। हमारी मंशा प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से बिजली स्टेशनों को खोलने की है।
क्या है कर्मचारियों की मांग?
हड़ताली कर्मचारियों ने फैसला किया है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, तब तक कोई मरम्मत और रखरखाव का काम नहीं करेंगे। कर्मचारी संपत्ति के निजीकरण, दैनिक वेतन भोगी बिजली कर्मचारियों के नियमितीकरण और वेतन जारी करने के सरकार के फैसले वापस लेने की मांग कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के सभी हिस्सों में कर्मचारी विरोध प्रदर्शन कर रहे। लाइनमैन से लेकर सीनियर इंजीनियर तक पीडीडी का हर कर्मचारी हड़ताल का हिस्सा है। अधिकारियों का कहना है कि हड़ताली कर्मचारियों के साथ बातचीत हुई, लेकिन स्थिति से निपटने में वे लोग असफल रहे।
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