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अंतराष्ट्रीय

जवाहिरी की मौत से पाकिस्तान ने अपने लिए सुरक्षित कर लिया आईएमएफ का लोन!

admin
Last updated: अगस्त 2, 2022 11:10 अपराह्न
By admin 17 Views
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Al Qaida Leader Ayman Al Zawahiri 5 Attack Incident From World Trade Center To Uss Coal Attack

अलकायदा सरगना अयमान अल-जवाहिरी का सफाया अपने दुश्मनों को खत्म करने की अमेरिकी विशिष्ट शैली का एक उदाहरण है. अचानक एक सशस्त्र ड्रोन कहीं से आता है और सटीक निशाने से अपने लक्ष्य पर हमला बोलकर गायब हो जाता है. कई मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि अमेरिका इस खूंखार आतंकवादी की बड़ी शिद्दत के साथ खोज कर रहा है. असल मेंअमेरिका अपने स्रोतों को छोड़कर किसी पर विश्वास नहीं करता. फिर वह संबंधित जानकारी की मानव जासूसों से पुष्टि करता है. इस दौरान वह पैसे की भी परवाह नहीं करता. ऐसे में सवाल उठते हैं कि जवाहिरी की हत्या में अमेरिकी ड्रोन ने कहां से उड़ान भरी, उसने कौन सा रास्ता अपनाया और उस क्षेत्र (अफगानिस्तान और पाकिस्तान) में अमेरिकी सहयोगी कौन हो सकते हैं?

Contents
साक्ष्य तो पाकिस्तानी मदद की तरफ करते हैं इशारेगंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है पाकिस्तानपाकिस्तान का आतंकी तमगालोन के बदले तो नहीं जवाहिरी

इस बारे में कोई सुराग उपलब्ध नहीं है कि पाकिस्तान के पूर्वी खैबर पख्तूनख्वा के एबटाबाद में एक सुरक्षित घर में अलकायदा के संस्थापक ओसामा बिन लादेन को अमेरिकी नेवी सील द्वारा मार दिए जाने के 11 साल बाद पाकिस्तानियों ने जवाहिरी के खात्मे में अमेरिका की मदद की है या नहीं. हालांकि, अमेरिका-पाकिस्तान सुरक्षा सहयोग उतना ही पुराना है, जितना कि पाकिस्तान का अस्तित्व.

साक्ष्य तो पाकिस्तानी मदद की तरफ करते हैं इशारे

पिछले साल अक्टूबर में यह बात सामने आई थी कि बाइडेन प्रशासन अमेरिकी सैनिकों के अफगानिस्तान से निकलने के बाद हवाई क्षेत्र का उपयोग के लिए पाकिस्तान के साथ बातचीत कर रहा था. यह बात तब उजागर हुई जब तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि वह अमेरिका को अपनी जमीन का उपयोग नहीं करने देंगे.

हालांकि, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस खबर का जोरदार खंडन किया था. इसके अगले ही दिन कहा गया था कि पाकिस्तान कभी भी अमेरिका को अपने हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की मंजूरी नहीं देगा. हालांकि, ऐसा कहने के पीछे इमरान समर्थकों को शांत रखना था.

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जवाहिरी की हत्या से दो बातें सामने आती हैं. पहली, अमेरिका ने अफगानिस्तान में अपने संपर्कों को बनाए रखा है और दूसरी, उसने तालिबान-नियंत्रित अफगानिस्तान में अपनी सैन्य गतिविधियों को बनाए रखने के लिए पाकिस्तान के साथ भी संबंध बनाए रखे हैं. तालिबान ने इस अमेरिकी हमले की निंदा की है, हालांकि पाकिस्तान चुप है.

गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है पाकिस्तान

असल में पाकिस्तान आर्थिक विनाश के खतरे का सामना कर रहा है. उसके पास बतौर विदेशी भंडार मात्र $8.5 बिलियन है, जिससे महज पखवाड़े भर के लिए आयात किया जा सकता है. पाकिस्तान पर कर्ज का भारी बोझ है और इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से राहत का इंतजार है. पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आईएमएफ ने नई शर्तें जोड़ दी हैं. इनमें से एक पाकिस्तान की ओर से यह गारंटी है कि उसके सहयोगी देश उसे $1.2 बिलियन के आईएमएफ बेलआउट पैकेज के बाद 4 बिलियन डॉलर सौंप देंगे. ध्यान रहे कि 2019 में आईएमएफ ने पाकिस्तान के साथ $6 बिलियन के बेलआउट पैकेज का समझौता किया था.

पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति ऐसी हो गई है कि कुछ दिन पहले सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को अमेरिकी उपविदेश मंत्री वेंडी शेरमेन से बात करनी पड़ी. इस दौरान बाजवा ने वेंडी से आईएमएफ पर अमेरिकी प्रभाव का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया था, ताकि उसे कर्ज मिल सके. हालांकि, इस पर अमेरिका ने क्या जवाब दिया, यह पता नहीं.

इमरान खान के बेदखली के बाद, मई में पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से मुलाकात की थी. बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया, “दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय शांति, आतंकवाद, अफगान स्थिरता, यूक्रेन के लिए समर्थन और लोकतांत्रिक मूल्यों पर अमेरिका-पाकिस्तान सहयोग के महत्व पर जोर दिया है.”

डॉन अखबार के अनुसार, दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बैठक से कुछ दिन पहले इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस के महानिदेशक (डीजी आईएसआई) लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम ने अपने तीन दिन की यात्रा दौरान अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन और सीआईए निदेशक विलियम जे बर्न्स सहित कई वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों से मुलाकात की थी.दोनों देशों के बीच आखिरी सुरक्षा स्तर की वार्ता जुलाई 2021 में हुई थी, जब तत्कालीन एनएसए मोईद यूसुफ ने व्हाइट हाउस में सुलिवन से मुलाकात की थी.

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डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, किसी भी पक्ष ने बातचीत के नतीजे का खुलासा नहीं किया, लेकिन माना जाता है कि यह बातचीत द्विपक्षीय सुरक्षा चिंताओं और अफगानिस्तान की स्थिति पर केंद्रित थी, क्योंकि अमेरिका का मानना है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में हालात संभालने के लिए मदद कर सकता है.

पाकिस्तान-अमेरिका संबंधों में अभूतपूर्व गिरावट के बाद लेफ्टिनेंट जनरल अंजुम की यात्रा हुई थी. असल में दोनों देशों के बीच खराब संबधों की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के इस दावे से हुई कि अमेरिका ने उनकी सरकार को गिराने के लिए विपक्षी नेताओं के साथ साजिश रची. अविश्वास प्रस्ताव में बाहर किए जाने से पहले, खान ने विदेशी दूतावास से मिले एक पत्र का हवाला दिया, जिसमें विस्तृत रूप से बताया गया था कि कैसे अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर खान पीएम बने रहे तो पाकिस्तान को नुकसान होगा.

पाकिस्तान का आतंकी तमगा

इस बीच, पिछले महीने ग्लोबल फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ से हटाने से पहले एक शर्त रखी थी. ग्रे लिस्ट ‘ब्लैक लिस्ट’ से एक पायदान ऊपर होती है. शर्त के मुताबिक, यह अपने अधिकारियों को यह जांच करने के लिए पाकिस्तान भेजेगा कि उसने अपनी जमीन से संचालित होने वाले आतंकवादी संगठनों की फंडिंग को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं.

पाकिस्तान जिस तंग स्थिति में है, उसे देखते हुए उसके पास अमेरिका के साथ सहयोग करने के अलावा और क्या विकल्प है? पाकिस्तान में अमेरिका विरोधी भावना के बावजूद इस्लामाबाद की सरकार को अमेरिका की इच्छा के आगे झुकना पड़ा है.

लोन के बदले तो नहीं जवाहिरी

अब, यहां प्रश्न जवाहिरी का आता है. हो सकता है कि पाकिस्तान ने अलकायदा प्रमुख के बारे में खुफिया जानकारी जुटाने में अमेरिका की मदद की हो, अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति दी हो और बदले में आईएमएफ से उसे वह लोन भी हासिल हो जाए जिसकी उसे बेहद जरूरत है. अमेरिका के लिए, यह सब बस एक सौदे की तरह है.

आने वाले दिनों में, अगर अपने हितों के लिए काम करने का यही पैटर्न सामने आता है, तो इमरान खान पीएमएल-एन सरकार पर और बड़े हमले करेंगे और पाकिस्तान में आम चुनाव हो सकते हैं. तब तक जनरल बाजवा रिटायर हो चुके होंगे. पाकिस्तान की राजनीति में और अराजकता फैलेगी, लेकिन इसकी परवाह किसे है?

कलप्रिट तहलका (राष्ट्रीय हिन्दी साप्ताहिक) भारत/उप्र सरकार से मान्यता प्राप्त वर्ष 2002 से प्रकाशित। आप सभी के सहयोग से अब वेब माध्यम से आपके सामने उपस्थित है।
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