कोलकाता। अभिनव बिंद्रा फाउंडेशन ट्रस्ट (ABFT) और ग्लोबल मेडटेक कंपनी हेल्थियम मेडटेक (Healthium Medtech,) ने शुक्रवार को ‘स्पोर्ट्स ऑफ लाइफ इनिशिएटिव फॉर स्पोर्ट्स के इलाज’ का शुभारंभ किया। इस अनोखी पहल के तहत चोटों की वजह से समाप्त होती स्पोर्ट्समैन की लाइफ को बचाया जाएगा और मेडिकल हेल्प देकर उनकी मैदान में पुनर्वापसी में मदद की जाएगी। एबीएफटी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य घायल खिलाड़ियों को चिकित्सा उपचार, डॉक्टरों, सर्जरी और पुनर्वास सुविधाएं प्रदान कर खेल की चोटों से उबरने और अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए सहायता करना है।
फ्री में सर्जरी की सुविधा देगा हेल्थियम
खिलाड़ियों को हेल्थियम आवश्यक आर्थ्रोस्कोपी प्रत्यारोपण एवं फ्री सर्जरी प्रदान करेगा। पूर्व भारतीय फुटबॉल कप्तान भाईचुंग भूटिया और देश के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता बिंद्रा ने स्पोर्ट ऑफ लाइफ पहल का उद्घाटन किया।
इस पहल का उद्देश्य खिलाड़ियों की मदद करना
स्पोर्ट्स ऑफ लाइफ इनिशिएटिव फॉर स्पोर्ट्स पहल का शुभारंभ करते हुए अभिनव बिंद्रा ने कहा कि स्पोर्ट ऑफ लाइफ का उद्देश्य खिलाड़ियों की मदद करना है ताकि वह खेलों में सक्रिय रह सकें। हम इस पहल के एक वर्ष के भीतर जरूरतमंद 100 खिलाड़ियों को फिर से करियर शुरू करने के लिए निशुल्क सर्जरी की जाएगी।
खेलों में पुनर्वापसी का मौका
पूर्व फुटबॉलर भूटिया ने कहा कि यह पहल खिलाड़ियों को इलाज कराने और खेल करियर में सक्रिय रूप से वापस आने के लिए लड़ने का मौका देती है। खेलों में, खिलाड़ियों को अपने करियर के दौरान अक्सर चोटों का सामना करना पड़ता है। कई बार उनका पूरा करियर चोट से तबाह हो जाता है।
अब करियर को तबाह होने से बचाएगा यह पहल
दरअसल, खिलाड़ियों का चोट से काफी बार सामना होता है। कई बार ऐसे मौके आते हैं जब आपका पूरा करियर तबाह हो जाता है। वजह यह कि गंभीर चोटों के इलाज सही ढंग से नहीं हो पाने से पूरा करियर प्रभावित हो जाता है। ऐसे खिलाड़ी अक्सर चोटों के इलाज का खर्च वहन नहीं कर पाते। ‘स्पोर्ट ऑफ लाइफ’ पहले के तहत जरूरतमंद खिलाड़ियों को ABFT और Healthium के सहयोग से चोटों से उबरने का मौका मिलेगा।
खिलाड़ियों के बारे में यह रिपोर्ट दिल दहला देगी
पिछले साल एनसीए द्वारा खिलाड़ियों के चोट संबंधी एक रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट के अनुसार 14.75% खिलाड़ी कंधे की चोट, 13.11% खिलाड़ी घुटने में चोट करियर के लिए खतरा बना। क्रूसिएट लिंगामेंट (एसीएल) की चोटों से 74% खिलाड़ी पीड़ित हैं।
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