जीवन शिक्षा
बीन बीन चुन-चुन कर मैंने यह अपना नीड बनाया जब आई सर्दी बरसात तो यह मेरे काम ना आया । समझा था जिसको अपना उसको अपना बनाया
जब आई थी वृद्धावस्था तो वो मेरे काम न आया ।।
ऐसे छोड़ वो भूल गया वो जैसे मैं हो गया हूं पराया चलते चलते राहों पर जिन जिन को अपना बनाया। जबआई अंतिम बेला किसी ने साथ नहीं निभाया ईश्वर ही ऐसी है शक्ति जिसने अंत मेमुझे निभाया।।
जब आता है जीव धरा पर माया मोह में फंस जाता
जिस परम ब्रह्म ने भेजा था उसकोहीभूल जाता।
माया मोह मेंऐसा फसताअच्छे कर्म नहीं कर पाता जीवन की अंतिम बेला मेजीव बहुत तब पछताता।।
किशोर इटावी कचहरी रोड मैनपुरी
ता
