उत्तर प्रदेश के बांदा मेडिकल कॉलेज में मुख्तार अंसारी की इलाज के दौरान मौत हो गई है. 15 जुलाई 2001 को मुख्तार अंसारी के इलाके में घुसकर उसपर जानलेवा रहमला हुआ. गैंगवार में होने वाले हमलों को लेकर मुख्तार अक्सर सतर्क रहता था।
मुखबरी की आशंका को लेकर वह अक्सर बीच रास्तों में गाड़ी बदल लिया करता था।
15 जुलाई को किसी ने मख्तार की मुखबरी कर दी उस दिन जिस काफिल के साथ वो जा रहा था रास्ते में उसकी गाड़ी को रेलवे फाटक के पास घेर लिया गया और उसकी गाड़ी पर अंधाधुंध फायरिंग होने लगी। इसके बाद मुख्तार अंसारी गाड़ी से निकला और खुद की रायफल निकालकर मोर्चा संभाल लिया।
मुख्तार अंसारी इस हमले में किसी तरह से बचकर भाग निकला था, लेकिन इस हमले ने पूरे पूर्वांचल में तहलका मचा दिया था। मुख्तार अंसार तक ये बात पहुंची कि उसके ऊपर हुए हमला बीजेपी नेता कष्णा नंद राय के इशारे पर गैंगस्टर बृजेश सिंह ने हमला किया था।
मुख्तार अंसारी को क्रिकेट बहुत पंसद था. क्रिकेट से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कष्णानंद राय 29 नवंबर 2005 को घर से निकले। उसी रास्ते पर मुख्तार का सूटर मुन्ना बजरंगी खड़ा था।
जिस जगह पर मुख्तार पर गोली चली थी उस जगह से करीब 20 किमी. की दूरी पर मुन्ना बजरंगी ने मुख्तार अंसारी को घेर लिया।
बताया जाता है कि मुख्तार का सूटर मुन्ना बजरंगी और उसके शूटर ने बीजेपी नेता कष्णा नंद राय पर छह एके-47 से 400 राउंड फायरिंग की।
पोस्टमार्टम के दौरान बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय और उनके 6 साथियों के शरीर से 67 गोलियां निकली।
