लखनऊ । एनआरएचएम घोटाले की सुनवाई में पेश न होने को लेकर अदालत ने पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। इस संबंध में अदालत ने ईडी को आदेश दिए हैं कि 15 दिन के अंदर कुशवाहा को गिरफ्तार करके अदालत में पेश किया जाए।
पौने चार साल जेल में रहने के बाद कुशवाहा को जमानत मिल गई थी।
सीबीआइ ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वाथ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले की जांच उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद 2012 में शुरू की थी। वर्ष 2007 से 2012 के बीच मायावती की बहुजन समाज पार्टी की सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन सेहत मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा सहित एक दर्जन से ज्यादा लोगों के खिलाफ सीबीआई ने केस दर्ज करके जांच शुरू की थी।
इनमें कुशवाहा के अलावा पूर्व विधायक राम प्रसाद जायसवाल, डायरेक्टर जनरल परिवार कल्याण एसपी राम,सेवानिवृत्त महाप्रबंधक पीके जैन व जीके बतरा, पूर्व प्रमुख सचिव सेहत प्रदीप शुक्ला, कारोबारी शिव शंकर, प्रदीप टंडन, राकेश टंडन, व अनूप टंडन सहित एक दर्जन से ज्यादा के खिलाफ मामला दर्ज करके जांच शुरू की थी।
तत्कालीन सीएमओ विनोद आर्या, सीएमओ बी.पी सिंह,डा. वाईएस सचान, प्रोजेक्ट मैनेजर विकास गुप्ता, महेन्द्र शर्मा व डा. पवन श्रीवास्तव की हत्या, आत्महत्या व मौतों को इस घोटाले से जोड़कर देखा गया था।
केन्द्र सरकार की तरफ से उत्तर प्रदेश में एनआरएचएम के तहत 10 हजार करोड़ रुपये दिए गए थे। इस ग्रांट से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के 133 अस्पतालों के विकास और आरओ लगाने तथा दवाओं की आपूर्ति के नाम पर पांच हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का गोलमाल करने के आरोप की जांच कर रही सीबीआइ ने 2012 में कुशवाहा व अन्य को गिरफ्तार किया था। अस्पतालों में केवल आरओ लगाने में सरकार को 6 करोड़ तीन लाख का नुकसान हुआ था।
सीबीआइ ने कुशवाहा की पत्नी शिवकन्या से भी पूछताछ की थी कि उनके ट्रस्ट और 10 कंपनियों का आधार क्या है। इसके बाद कुशवाहा के करीबी का गोमती नगर स्थित घर भी सील किया था। साथ ही 196 करोड़ रुपये की संपत्ति भी ईडी ने अटैच की थी।
घोटाले को लेकर सभी पर आरोप तय हो गए थे, लेकिन 2016 तक सीबीआइ केवल 20 गवाहों को ही अदालत में पेश कर पाई थी। इसकी वजह से पौने चार साल जेल में रहने के बाद कुशवाहा को जमानत मिल गई थी। ईडी ने भी इस मामले में कुशवाहा के खिलाफ जांच शुरू की थी।
