सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं है पंजाब की बाढ़
राजेश कुमार पासी
इस समय हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, राजस्थान और पंजाब-हरियाणा विनाशकारी बाढ़ का सामना कर रहे हैं । देखा जाए तो भारी बारिश ने पूरे उत्तर-भारत में तबाही मचाई हुई है । टीवी मीडिया और सोशल मीडिया में आने वाले भयानक दृश्य देखकर पूरे शरीर में सिहरन दौड़ जाती है । हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कई बार बादल फटने की घटनाएं हो चुकी हैं जिसके कारण सैकड़ों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है । इसके अलावा इन पहाड़ी प्रदेशों में सड़कों और पुलों की जबरदस्त तबाही हुई है । इन प्रदेशों में जो बुनियादी ढांचा बर्बाद हुआ है, उसे दोबारा बनाने में काफी समय लगने वाला है । हरियाणा में भी बाढ़ ने भयानक तबाही मचाई है लेकिन पंजाब की बर्बादी परेशान करने वाली है । पंजाब की लगभग तीन लाख एकड़ भूमि बाढ़ के पानी में डूब चुकी है जिसके कारण फसलों की पूरी बर्बादी हो गई है । इसके अलावा कृषि भूमि में नदियों की रेत इस तरह से भर गई है कि दोबारा खेती करने के लिए बहुत मेहनत करनी होगी ।
पंजाब के लगभग 2000 गांव बाढ़ में डूबने से भारी तबाही हुई है. मरे हुए मवेशियों की लाशें तैरती नजर आ रही हैं । इसके अलावा सैकड़ों मवेशी बाढ़ के पानी में बहकर पाकिस्तान जा चुके हैं । बाढ़ के कारण हजारों लोगों की अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है । हिमालय से निकलने वाली जीवनदायिनी नदियों ने अपनी ताकत का अहसास करवाया है । पंजाब को बाढ़ से बचाने के लिए जो बांध बनाए गए थे, वो अपना काम करने में नाकाम रहे हैं । इसके विपरीत इन बांधो ने भी इस समस्या को बढ़ाया है । इस पर विचार करने की जरूरत है कि जिन बांधों को बाढ़ से बचाव के लिए बनाया गया था, क्यों वो अपना काम नहीं कर पाए । पंजाब को पांच नदियों का प्रदेश कहा जाता है. इन नदियों के विकराल रूप ने न केवल भारतीय पंजाब बल्कि पाकिस्तान पंजाब को सहमा दिया है । पंजाब में हुए विनाश को देखते हुए केंद्र सरकार से जनता दखल देने की मांग कर रही है । इस समय पंजाब के बाढ़ पीड़ितों को भोजन, दवाइयों और वित्तीय मदद की जरूरत है । पंजाब में क्रिकेटर, सिंगर, खिलाड़ी, अभिनेता और अन्य सेलिब्रिटी मदद के लिए आगे आए हैं जिससे राहत कार्य चल रहे हैं ।
9 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी भी पंजाब का दौरा कर रहे हैं जबकि केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह पहले ही पंजाब का दौरा कर चुके हैं । उम्मीद है कि प्रधानमंत्री के दौरे के बाद पंजाब के लिए केन्द्र सरकार द्वारा कोई राहत पैकेज घोषित किया जाए । केन्द्र सरकार की समस्या यह है कि भारत के बड़े हिस्से में बाढ़ से तबाही हुई है और सभी उससे राहत पैकेज की मांग कर रहे हैं । वैसे देखा जाए तो पंजाब की समस्या ज्यादा गंभीर दिखाई दे रही है इसलिए केन्द्र सरकार को इस पर ध्यान देना होगा । वैसे हमारे देश में हर मुद्दे पर राजनीति होती है, इसलिए ऐसे मामले सुलझाने में समस्या आती है । पंजाब में विपक्ष की सरकार है इसलिए केन्द्र सरकार से राहत पैकेज के नाम पर इतनी राशि मांगी जा रही है, जिससे राहत पैकेज के बाद राजनीति की जा सके । देखा जाए तो ऐसी विभीषिका से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर काम करना चाहिए लेकिन भारत में राजनीति का स्तर इतना गिर गया है कि देशहित से ऊपर दलहित हो गया है । इस विभीषिका के लिए केन्द्र और राज्य की सरकारों को दलगत हितों से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है ।
हमारे देश की विडम्बना है कि नौकरशाही
