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लेख

कहानी विधवा बहू का त्याग

admin
Last updated: मार्च 2, 2025 10:43 पूर्वाह्न
By admin 27 Views
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10 Min Read
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कहानी
विधवा बहू का त्याग
==========
कैप्टन महेंद्र प्रतापसिंह जब मिलिट्री से रिटायर होकर माधवगढ़गांव आए तो गांव के लोगों ने बड़ा सम्मान से लिया। दो बार उन्हें विधायक बहुमत से चुना। कैबिनेट मंत्री भी रहे ।जब 80 साल के हुए तो उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया। कैप्टन ठाकुर महेंद्र प्रताप सिंह का परिवार गांव का एक खुशहाल परिवार था। 25 वर्षीय पुत्र वीर सिंह गांव के पास राधा वल्लभ इंटर कॉलेज में हिंदी प्रवक्ता था। कैप्टन साहब की 30 वर्षीय पुत्री माधुरी की टीकमगढ़ के रहने वाले प्रोफेसर सुरेश सिंह से 2 वर्ष पहले शादी हो गई थी। ठाकुर कैप्टन महेंद्र सिंह का कोई अब पारिवारिक दायित्व नहीं रह गया था। पूरा परिवार खुशहाली का जीवन जी रहा था। तभी अचानक ठाकुर महेंद्र प्रताप सिंह पर ईश्वरी प्रकोप आया और उनका होनहार पुत्र वीर सिंह एक मार्ग दुर्घटना में दुखद मौत के शिकार हो गए।इस दुखद घटना से ठाकुर साहब के ऊपर दुख का पहाड़ टूट पड़ा । ठाकुर साहब के 25 वर्षीय इकलौता पुत्र वीर सिंह जो इंटर कॉलेज में लेक्चरर था । उस की शादी माधवगढ़ के ठाकुर सुरेंद्र प्रताप की पुत्री रूपवतीसे 1 साल पहले बड़े धूमधाम से हुई थी। जिसमें हजारों लोग भोज में सम्मिलित हुए थे। ठाकुर साहब की पत्नी की उम्र 70 वर्ष की थी। दोनों बुजुर्गों का सहारा यही लड़का था । गांव की औरतें जो भी मिलने आती थी वह यही कहती थी। अभी बहू की शादी हुए 1 साल भी नहीं हुए हैं । पैर की महावर भी अभी नहीं छुट पाई है । बिचारी विधवा हो गई । ठाकुर साहब की 23 वर्षीया बहू का नाम रूपवती जैसा था । सौंदर्य आकर्षण आचरण में वैसे ही रूपवती थी। दोनों बुजुर्गों सास ससुर के लिए रूपवती आदर्श भारतीय नारी थी। अब इन सास ससुर का बुढ़ापा कैसे कटेगा इन्हीं सभी चर्चाओं के बीच 1 साल बीत गया।
रात के बाद सवेरा आता है । परिस्थितियों के अनुसार मनुष्य दुख भी झेल लेता है। एक दिन एकांत में बहू को बुलाकर ससुर ठाकुर साहब ने बहू को समझाते हुए कहा -बहू तुम जानती हो हम 80 वर्ष के हो चुके हैं ।कब्र में पैर लटके हुए हैं ।तुम्हारी सास भी 75 वर्ष की हो गई है ।हम दोनों बुड्ढे हैं। बहुत दिनों तक जीवित नहीं रहेंगे। हम चाहते हैं समाज की कुरीतियों को तोड़कर तुम्हारा किसी अच्छे युवक से शादी करा दूं और तुम्हारी चिंता फुर्सत पा लू। बहू ने आंसू बहाते हुए कहा- पिताजी उनके स्मृति में और आपकी सेवा करके मैं अपनी पूरी जिंदगी काट लूंगी । नारी की शक्ति विपत्ति के बाद ही मुखरित होती है । मेरी शादी अपने कर भी दी तो आप अकेले रह जाएंगे। आपकी कौन देख भाल करेगा ।इसलिए मैं शादी नहीं करूंगी। आप हमारी चिंता छोड़ दीजिए। ससुर बहु की बातों को सुनकर चुप हो गए और बोले जैसा तुम चाहो मैं तुम्हें शादी के लिए अब मजबूर नहीं करूंगा। एक दिन ससुर ने बहु को लेकर जाकर अपने 70 बीघा खेत दिखाएं। बहू घर तथा खेतों का काम संभालने लगी। श्रावणी के त्यौहार पर जमीदार साहब की पुत्री माधुरीअपने पति देवरके साथ राखी का त्यौहार करने आई। दामाद साहब ने ससुर को बताया कि‌ मेरे छोटेभाई धर्मेंद्र आप के गांव के पास राधा बल्लभ इंटर कॉलेज में प्रवक्ता पद पर लग गये है ।अब उसे यही कहीं मकान लेकर रहना पड़ेगा ।दमाद से ससुर बोले –मेरे पास रहे। स्कूल कौन दूर है। मोटर साइकिल से आ जा सकता । दमाद बोला- ठीक है। कल उसे स्कूल में ज्वाइन करवा दूंगा ।आपके पास रहेगा तो उसकी देखभाल भी ठीक तरह से होती रहेगी ।मुझे उसकी चिंता नहीं रहेगी। ठाकुर साहब ने नौकर से कहकर बगल वाले कमरे में धर्मेंद्र के रहने का बंदोबस्त करा दिया ।श्रावणी का त्यौहार करके दमाद और बेटी चले गए ।दमादअपने छोटे भाई को छोड़ गए। धर्मेंद्र मोटर साइकिल से सुबह के समय स्कूल जाते और शाम को लौट आते ।
एक दिन राधावल्लभ इंटर कॉलेज में सामाजिक कुरीतियों पर स्कूल के छात्रों की एक गोष्ठी हुई ।इंटर हाई स्कूल के छात्रों ने अपने-अपने विचार दहेज प्रथा विधवा विवाह पर दिए। अन्य कुरीतियों पर कोई छात्र नहीं बोला। गोष्टी समापन पर लेक्चरार धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि आज के समाज में अनेक कुरीतियां है। मुख्य कुरीतियां में दहेज प्रथा विधवा विवाह प्रमुख होते हुए भी शराब पीना जुआ खेलना आदि भी तमाम हैं। दहेज प्रथा से समाज आज बहुत दुखी है ।गरीब लड़कियों की शादी करने मे बहुत बड़ी परेशानी आती है। इसीलिए भाजपा सरकार गरीब लड़कियों की शादी के लिए सरकारी योजनाएं चल रही है। विधवा विवाह ना होना भी एक बहुत बड़ी समाज में कुरीति है। जवान विधवा को भी अच्छी जिंदगी जीने का अधिकार मिलना चाहिए। आज की युवा पीढ़ी को इस काम के लिए आगे आना चाहिए।यहएक बहुत बड़ी कुरीति है। दूसरे दिन सभी प्रमुख अखबारों में सामाजिककुरीतियां का समाचार प्रकाशित हुआ ।सभी अखबारों ने धर्मेंद्र का भाषण भी छापा। धर्मेंद्र को बहुत से लोगों ने बधाइयां दी । एक दिन प्रेस वालों ने आकर धर्मेंद्र से पूछा- क्या तुम अपनी शादी दहेज रहित करोगे? क्या तुम अपनी शादी किसी विधवा से कर सकते हो? धर्मेंद्र कुछ देर चुप रहा फिर प्रेस वालों से बोला -अगर कभी ऐसा मौका आया तो मैं दहेज नहीं
लूंगा । अगर कोई विधवा मुझ से शादी करना चाहै तो उससे शादी भी कर लूंगा ।धर्मेंद्र के यह विचार अखबारों में बड़े सुर्खियों में छपे। ठाकुर साहब ने जब धर्मेंद्र के यह विचार पढ़े तो बहुत खुश हुए। ठाकुर साहब ने बहु को बुलाकर छपे हुए समाचार
का अखबार बहू को पकडा दिया। बहु अख़बार लेकरचुपचाप अंदर चली गई। होली के दिनठाकुर साहब के दमाद सुरेश और बेटी माधुरीहोली का त्यौहार मनाने के लिए घर आए ।ठाकुर साहब ने बेटी माधुरीकोबुलाकर कहा -मैं बहू की शादी करना चाहता हूं ।तुम अपने देवर से बात करो। अगर वह तैयार हो तो मैं उसके साथ शादी कर दूंगा ।बेटी ने एकांत में बुलाकर देवर से कहा -क्या तुम मेरी भाभी से शादी करना चाहोगे? ।देवर धर्मेंद्र अपनी भाभी की बात पर हंसा और बोला -अब इन सब बातों का निर्णय तो आप ही को करना होगा। मैं क्या जानू? भाभी देवर की मनसा जान गई और देवर से बोली जब मुझे ही निर्णय करना है। तो तुम्हारे हित में होगा वही करूंगी ।मेरीभाभी रूप सौंदर्य आचरण से जैसा है नाम उसके अनुरूप ही वास्तव में रूपवती है। देवर मुस्काया और चुपचाप बाहर चला गया। इसके बाद ठाकुर साहब की बेटी ने अपनी भाभी का अपने देवर के साथ शादी करने की बात कहीतो भाभी भी मुस्कुराई और चुपचाप अपने कमरे में चली गई ।बेटीने आकर अपने पिता को अपने देवर तथा भाभी की मनसा बताई ।ससुर ने एकांत में बुलाकर बहू से कहा -बहू अब मैं चाहता हूं कि तुम्हारी शादी बेटी के देवर के साथ हो जाए। लड़का अच्छा है ।होनहार है मेरी बात को टालना मत ।ससुर से बाहु बोली- मैंने कभी आपकी कोई बात टाली है और यह कहकर अंदर चली गई।
होली के त्यौहार मैं जब रंग एक दूसरे ऊपर डाला जा रहा था तब देवर ने अपनी भाभी के संग अपनी भाभी की भाभी पर रंग डाल दिया। दूसरे दिन धर्मेंद्र को अकेला पाकर रूपवती ने धर्मेंद्र से कहा- तुम सच बताना! तुम मुझसे शादी बिना किसी दबाव के मुझसे करने को तैयार हो ?मेरी यह शर्त रहेगी मैं तुम से भी प्यार करूंगी ।उनकी भी स्मृति नहीं भुला पाऊंगी । अपने सास ससुर के पास भी रहूंगी। पतिकी स्मृति में एक मंदिर बनवाऊगी । एक स्कूल खोलूगी ।तुम्हें इस पर एतराज तो नहीं होगा? धर्मेंद्र बोला — अच्छे काम के लिए मैं क्यों मना करूगा? तुम्हारा सहयोग ही करूंगा ।तुम्हारे आचरण व्यवहार से मैं खुश हूं ।मैं तुम्हें कभी भी दुखी नहीं करूंगा। सास ससुर की सेवा करना बहुत बड़ा पुण्य है।
सब की सहमत से एक दिन धूमधाम से रूपवती धर्मेंद्र की शादी हो गई और समाज में चली आ रही एक कुरीति टूट गई। बहू ने सास ससुर की सेवा के लिए जो त्याग दिखाए उसकी हर जगह चर्चा हुई ‌।
बृज किशोर सक्सेना किशोर इटावी कचहरी रोड मैनपुरी

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