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Tokyo Olympics 2020: टोक्यो में 23 जुलाई से शुरू हुए ओलंपिक का रविवार को रंगारंग कार्यक्रम के साथ समापन हो गया है। टोक्यों में 17 दिनों तक चलने वाले ओलंपिक में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया है। भारत ने इस ओलंपिक में एक स्वर्ण, दो रजत और चार कांस्य पदक जीता है और पदक तालिका में 48वें स्थान पर रहा।
टोक्यो ओलंपिक में नीरज चोपड़ा ने स्वर्ण पदक जीता है। मीराबाई चानू और रवि कुमार दहिया ने सिल्वर मेडल जीता, जबकि पीवी सिंधु, बजरंग पुनिया, लवलीना बोरगोहेन और भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीता है। इन खिलाड़ियों की सफलता में इनके कोच की अहम भूमिका रही है। आईए जानते हैं पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के कोच के बारे में…
नीरज के कोच उवे हॉन
नीरज की इस सफलता में उनके कोच और जर्मनी के महान खिलाड़ी उवे हॉन (Ume Hohn) की अहम भूमिका है। 59 साल के हॉन एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने 100 मीटर से ज्यादा भाला फेंका है। साल 1984 में हॉन ने 104.8 मीटर दूर भाला फेंककर विश्व रिकॉर्ड बना लिया था। उवे हॉन ने यह रिकॉर्ड पुराने भाले से बनाया था। साल 1986 से नये डिजाइन के भाले से जेवलिन थ्रो के आयोजन होता है। नये डिजाइन के भाले का विश्व रिकॉर्ड जैन जेलेगनी ने बनाया है। जेलेगनी ने साल 1996 में जेस्स मीटिंग इवेंट में 98.48 मीटर की दूरी तक जेवलिन थ्रो किया था।
हॉन ने सिर्फ 19 साल की उम्र से ही शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने साल 1981 में यूरोपियन जूनियर चैंपियनशिप में 86.58 दूर भाला फेंककर रिकॉर्ड स्थापित किया था। इसके बाद उन्होंने साल 1982 में यूरोपियन चैंपियनशिप में 91.34 मीटर दूर भाला फेंक गिया। फिर उवे हॉन ने साल 1984 में बर्लिन में एथलेटिक्स मीट में 104.8 दूर भाला फेंककर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। साल 1985 में उन्होंने आईएएएफ विश्व कप में 96.96 मीटर दूर भाला फेंक गोल्ड मेडल अपने नाम किया था।
मीराबाई चानू के कोच विजय शर्मा
ओलंपिक में वेट लिफ्टिंग में भारत को 21 साल बाद कोई पदक मिला है। यह कारनामा मीराबाई चानू ने सिल्वर मेडल जीतकर किया है। मीराबाई की इस सफलता के पीछे उत्तर प्रदेश के मोदीनगर निवासी विजय कुमार शर्मा का हाथ है। चानू के कोच विजय शर्मा बचपन से ही खेल को पंसद करते थे। वह फुटबॉल खेलते थे और दोड़ते थे, लेकिन उन्होंने अपना करियर वेटलिफ्टिंग में चुना।
वेटलिफ्टिंग के बल पर उन्होंने साल 1993 में स्पोर्ट्स कोटे से रेलवे में टीसी की नौकरी पाली। उन्होंने रेलवे को कई गोल्ड मेडल दिलाए। विजय शर्मा इंटर रेलवे चैंपियनशिप में चार बार जीत हासिल की। इसके साथ ही वह साल 1998 व 1999 में वेटलिफ्टिंग में नेशनल चैंपियन बने। 2018 में विजय शर्मा को द्रोणाचार्य अवार्ड दिया गया।
रवि दहिया के कोच
टोक्यो ओलंपिक के कुश्ती में सिल्वर मेडल जीतने वाले रवि कुमार दहिया की सफलता में चीफ कोच जगमेंद्र सिंह की अहम भूमिका है। इसके साथ ही कोच राजीव तोमर ने भी उनकी जीत में बहुत योगदान दिया। उनके दोनों कोच भी ओलंपियन रहे हैं।
जगमेंद्र सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के रहने वाले हैं। साल 1984 ओलंपिक में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था जबकि बागपत जिल के निवासी राजीव तोमर साल 2008 के बीजिंग ओलंपिक में भारत के लिए खेला था। जगमेंद्र सिंह साल 2004 से राष्ट्रीय कोच हैं और राजीव तोमर भी बीते लगभग छह साल से नेशनल कोच की भूमिका निभा रहे हैं। यह दोनों कोच भारत के पहलवानों को कुश्ती के दांवपेंच सिखा रहे हैं।
पीवी सिंधु के कोच पार्क ताई संग
पीवी सिंधु ने टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता है। सिंधु की सफलता में उनके कोच पार्क ताई संग की अहम भूमिका है। पार्क ताई संग ने सिंधु को बैडमिंटन की बारीकियों को सिखाया। पार्क ताई संग ने साल 2002 में बुसान एशियाई खेल में गोल्ड मेडल जीता था। वह साल 2004 की एथेंस ओलंपिक गेम्स के क्वॉर्टर फाइनल में पहुंचे, लेकिन इंडोनेशिया के सोनी कुंकोरो ने उनको हरा दिया। सिंधु के साथ जुड़ने से पहले पार्क साउथ कोरिया की नेशनल बैडमिंटन टीम के साथ 2013 से 2018 तक कोच के रूप में जुड़े रहे।
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