लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी में गवर्नर आनंदी बेन पटेल ने विधान परिषद के लिए छह लोगों को मनोनीत कर दिया है.यहां सोमवार देर रात इसके लिये अधिसूचना जारी कर दी गई. दरअसल, योगी सरकार ने बीते शुक्रवार को इन नामों की लिस्ट राज भवन भेजी थी.
इनका कार्यकाल छह साल के लिए होगा. नामित एमएलसी की सूची में बीजेपी सरकार ने कार्यकर्ता और एजेंडा दोनों साधने की कोशिश की है. हालांकि, राजभवन से जारी लिस्ट में सोशल इंजीनियरिंग का फ़ार्मूला भी बना है. दरअसल, विधानपरिषद के लिए नोमिनेटेड हुए एमएलसी की लिस्ट के जरिए बीजेपी ने कार्यकर्ताओं और एजेंडा दोनों को साधने की कोशिश की है.
राजभवन से जारी इस लिस्ट में बीजेपी ने अपने पुराने साथियों पर तो भरोसा किया ही है, साथ ही जातीय समीकरण का भी ख्याल रखा है. यहां छह एमएलसी के नामों में दो ओबीसी, एक दलित और एक पसमांदा मुसलमान को रखा गया है. इसके साथ ही बीजेपी का परम्परागत वोटर ब्राह्मण और वैश्य को भी शामिल किया गया है. वैश्य वोटरों पर BJP ने किया भरोसा बता दें कि, MLC लिस्ट के नामों में रजनीकांत माहेश्वरी वैश्य ताल्लुक से आते हैं.
जो कासगंज के रहने वाले है. वहीं, रजनीकांत माहेश्वरी इससे पहले बीजेपी से बृज क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं. 2 साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद ही उन्हें इसी महीने पदे से हटाया गया था. साथ ही रजनीकांत ने अपने करियर की शुरूआत बीजेपी में वार्ड लेवल से शुरू की थी.
जबकि, पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखने वाले बनारस से बीजेपी के जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा ने भी 1989 में बूथ लेवल से अपनी शुरुआत की थी. हालांकि, वे इससे पहले यूपी के पू्र्व सीएम कल्याण सिंह के करीबी रहे है और काफी लंबे समय तक राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे. जब कल्याण सिंह ने बीजेपी से अलग होकर राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाई थी, तो हंसराज ने भी उनकी पार्टी से विधानसभा चुनाव लड़ा था. तब से वह 2016 से लगातार जिलाध्यक्ष बने हुए हैं.
UP: गेस्ट हाउस कांड से बदली यूपी की सियासत! सपा-बसपा गठबंधन टूटने के पीछे की ये वजह? 2024 के चुनाव को लेकर BJP ने दलित वोट साधा इसके साथ ही दलित वर्ग से आने वाले अम्बेंडकर महासभा के अध्यक्ष डॉ.लाल जी निर्मल मूल रूप से मिर्जापुर के रहने वाले हैं. डॉ.लाल जी तब सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने सीएम योगी को दलित मित्र से सम्मानित किया था.जिसके बाद सरकार ने इन्हें इनाम के तौर पर अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम का अध्यक्ष पर दिया था. हालांकि, इससे पहले डॉ लाल जी सपा में प्रदेश सचिव के पद रहे थे.
इसके अलावा डॉ लाल के निमंत्रण पर पीएम नरेंद्र मोदी भी 2015 में अंबेडकर महासभा में आए थे. लाल जी बीएसपी के संस्थापक कांशीराम के साथ भी काम कर चुके हैं. सरकारी कर्मचारियों के लिए कांशीराम ने जो संगठन बामसेफ बनाया था, लालजी उसके सक्रिय सदस्य भी रहे. पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र के बेटे साकेत मिश्रा का नाम शामिल इनके अलावा आज़मगढ़ से राम सूरत राजभर का नाम भी सूची में शामिल है.
राजभर बीजेपी के पुराने नेता हैं. जबकि, ब्राह्मण से साकेत मिश्रा को एमएलसी बनाया जा रहा है. वे पीएम मोदी के प्रधान सचिव रहे नृपेंद्र मिश्रा के बेटे है. इसके साथ ही अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ तारिक मंसूर को एमएलसी बनाया गया है.
जो पीएम मोदी की तारीफ करने के बाद सुर्खियों में आए थे. AMU वीसी डॉ मंसूर, PM मोदी की तारीफ कर सुर्खियों में आए हाल ही में डॉ तारिक तब सुर्खियों में आए जब उन्होंने राजस्थान के हिंदू छात्रों को नियमों को दरकिनार करके हुए रहने के लिए हास्टल एलॉट किया था. जबकि, डॉ तारिक मुस्लिम समाज में पिछड़ी बिरादरी मतलब पसमांदा समाज से आते हैं. पीएम मोदी कई बार इस समाज के लोगों को बीजेपी से जोड़ने की वकालत कर चुके हैं.पार्टी का संगठन भी इस पर तेजी से काम कर रहा है. Uttar Pradesh: मायावती को लेकर अखिलेश यादव ने बदला अपना प्लान, BJP के फॉर्मूले से बनी बात?
