ईरान पर अमेरिका-इजरायल का संयुक्त हमला, मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव; भारत में मिली-जुली प्रतिक्रि
मध्य पूर्व में तनाव उस समय और बढ़ गया जब इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने कथित रूप से ईरान पर संयुक्त हमला किया। शनिवार सुबह राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में बमबारी की खबरें सामने आईं। हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में अस्थिरता की स्थिति बन गई है।
सूत्रों के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के कार्यालय के पास भी हमला हुआ। हालांकि, उन्हें पहले ही सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया था।
बताया जा रहा है कि जवाबी कार्रवाई में ईरान ने सऊदी अरब, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात सहित मध्य पूर्व के कई देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
भारत में विरोध प्रदर्शन
ईरान पर हमले को लेकर भारत में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। शिया मुस्लिम संगठनों ने इस कार्रवाई की निंदा की है। जम्मू-कश्मीर के बड़गाम में शिया समुदाय के लोगों ने खामेनेई के पोस्टरों के साथ प्रदर्शन करते हुए अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारेबाजी की।
ऑल इंडिया शिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने हमले को अफसोसजनक बताते हुए कहा कि रमजान के महीने में इस तरह की सैन्य कार्रवाई निंदनीय है। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान इस हमले का जवाब देगा और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकाने निशाने पर आ सकते हैं।
शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने भी हमले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान ने कभी किसी देश पर पहल कर हमला नहीं किया और मौजूदा घटनाक्रम वैश्विक राजनीति का हिस्सा है। उनके अनुसार, अमेरिका की नीतियां पहले भी विफल रही हैं और आगे भी विफल होंगी।
क्षेत्रीय और वैश्विक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब संभावित कूटनीतिक प्रयासों और संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
फिलहाल क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।
