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रूप लुटेर को नारी शक्ति की नसीहत

admin
Last updated: दिसम्बर 21, 2024 8:56 पूर्वाह्न
By admin 8 Views
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16 Min Read
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रूप लुटेर को नारी शक्ति की नसीहत
.===============
इटावा जिले की फफूंद कस्बा में प्रोफेसर किशोर कांत और प्रधान अध्यापिका सुधा दोनों पति-पत्नी रहते थे। पति-पत्नी आपस मैं बहुत प्रेम करते थे।
दोनोंगृहस्थ जीवन बड़े सुखमय रूप से काट रहे थे।पति पत्नी दोनों कोई खर्चीला शौक नहीं करते थे।सुधा धार्मिक प्रवृति की महिला थी। किशोर कांत को जरूर मोबाइल चलाने एक खर्चीला शौक था। सुधा रूप की अप्सरा थी जो रूप रंग में इतनी आकर्षित थी कि जो भी उसे देखता था ।उसके रूप सौंदर्य पर मोहित हो जाता था । पति भी सुंदरता में कामदेव से कम नहीं था। पत्नी के ना चाहने पर भी नरेंद्र अपनी पत्नी सुधा के तमाम फिल्मी स्टाइल के सेक्सी पोज खींचता रहता था और वो मोबाइल में अक्सर डालता रहता था।
दिसंबर का महीना था । सर्दी का प्रकोप था। जब पतिपत्नी रात के समय सोने जा रहे थे । तभी किशोर कांत की मोबाइल की घंटी बज उठी। किशोर ने मोबाइल को ऑन करने के बाद जैसे ही हेलो किया । वैसे ही उधर से आवाज आई – मैं विक्रम को तुम्हारे स्कूल का साथी बोल रहा हूं । किशोर कांत नेकहा- कहां से बोल रहे हो ?इतने दिन बाद कैसे मेरी याद आ गईॽ उधर से विक्रम बोला -मेरे पास तुम्हारा न कोई पता था और न मोबाइल नंबर था। आज फेसबुक में भाभी जी का तुम्हारा फोटो जब देखा ।फेसबुक से नंबर तलाश करके उसी नंबर से तुम्हें फोन कर रहा हूं और शादी की मुबारकबाद
देने के लिए दिल्ली से परसों तुम्हारे पास पहुंच रहा हूं । तुम अपने निवास स्थान का पता दो । नरेंद्र ने मोबाइल द्वारा अपना पूरा घर का पता बता दिया और फोन काट दिया ।
किशोर कांत सुधा से बोला – विक्रम हमारा स्कूल का बड़ा स्नेही मित्र है। वो परसों आ रहा है ।उसका अच्छा अतिथि सत्कार होना चाहिए । कल इतवारहै । सुबह जल्दी उठ कर हम दोनों मिलकर घर की सफाई करेंगे और उसके ठहरने की अच्छी
व्यवस्था करेंगे ।इतना कहकर पति पत्नी दोनों सो गए।इतवार के दिन घर की सफाई की गई। घर को अच्छी तरह से सजाया गया ।
सोमवार के दिन जैसे ही पति पत्नी सो कर उठे उन्हें दरवाजे पर गाड़ी आने की आवाज सुनाई दी ।सुधा ने जल्दी-जल्दी सभी कपड़ों को उठाकर तरकीब बार लगाया और नरेंद्र ने दरवाजे पर जाकर कुंडी खोली। बाहर आकर सीढ़ियों पर चढते विक्रम को गले लगाया और घर के अंदर लाए ।घर के अंदर आने पर विक्रम ने सुधा को हाथ जोड़कर नमस्कार किया और किशोर कांत से बोला मेरी भाभी तो स्वर्ग की किसी अप्सरा से कम नहीं है। भगवान ने तुम्हें नूर हीरा दिया है।
थोड़ी देर बातचीत होने के बाद विक्रम स्नान ग्रह में चले गए और सुधा भोजन व्यवस्था बनाने में लग गयी ।जब टेबल पर लगे भोजन को विक्रम किशोर
कांत सुधा भोजन कर रहे थे तब विक्रम सुधा की ओर सेक्सी निगाहों से देखते हुए किशोर कांतसे बोला -तुम लोग क्या देहाती जीवन जी रहे हो? मेरी मानो तो दिल्ली चलो। मेरी दो फैक्ट्रियां है। तुम दोनों मिलकर उन फैक्ट्रियों को संभालो। मै इन फैक्ट्रियों का बाहर का काम देखता रहूंगा और इनका काम करता रहूंगा । किशोर तुम स्टील की फैक्ट्री का मैनेजर बनकर काम संभालो और सुधा भाभी कपड़ा फैक्ट्री का काम देखेगी ।दोनों को दो दो लाख वेतन मिलेगा। रहने के लिए कोठी तथा फैक्ट्री में पहुंचने के लिए लग्जरी गाड़ी मिलेगी। मैं अकेले दोनों फैक्ट्रियों को नहीं संभाल पा रहा हूं ।विक्रम की बातों को सुनकर जहां किशोर कांत खुश हो रहा था और गुलाबी सपनों में खोया हुआ था । वही सुधा विक्रम की बातों को सुनकर उसे संदेह की निगाह से देख रही थी और उसकी सेक्सी निगाहों को पहचान रही थी। सुधा को विक्रम की निगाहों में खोट दिखाई दे रहा था । खाना खाते समय विक्रम अपने पैरों को बराबर सुधा के पैरों में टकरा रहा था ऊऔर सुधा को सेक्सी निगाहों से देख रहा था।
भोजन करने के बाद विक्रम ने अपनी अटैची खोली और अटैची से निकालकर एक बहुत कीमती साड़ी सोने का हार सुधा के हाथों पर रखते हुए बोला -यह तुम्हारी शादी का उपहार है। भाभी जी साड़ी को पहनकर दिखाइए ।सुधा ने इस उपहार को लेने के लिए इनकार भी किया लेकिन किशोर कांत रुख देखकर तथा पतिके बार बार कहने पर साड़ी और हार हाथ में ले लिया। साड़ी पहनने के लिए सुधा अंदर चली गई। जब साड़ी पहन कर बाहर आई तो विक्रम ने किशोर कांत की ओर देखते हुए कहा -भाभी यह हार तो मैं खुद ही तुम्हेंपहनाऊं गा। तुम मेरी प्यारी भाभी हो। सुधा के ना चाहने पर भी किशोरके रुख को देखते हुए सुधा को विक्रम के हाथों से हार पहनने के लिए मजबूर होना पड़ा और विक्रम की सभी हरकतों को चुप होकर सहना पड़ा। रात के सोते समय किशोर कांत ने धीरे से सुधा
से कहा – उन्नति करने के लिए बार बार मौका नहीं आते है। हमें विक्रम के प्रस्ताव को मान लेना चाहिए और उसके साथ दिल्ली चलकर उसके काम में हाथ बढ़ाना चाहिए । सुधाने पति देवता को समझाते हुए कहा -मुझे तुम्हारे मित्र की निगाहों में कुछ खोट लगता है । हम लोगों को दिल्ली नहींजाना चाहिए। किशोर ने पत्नी को डांटते हुए कहा– तुम्हें तो हर एक की निगाह में खोट नजर आता है । मेरा मित्र अच्छा है ।परसों हम लोग स्कूलों से 3 महीने की छुट्टी लेकर दिल्ली चलेंगे और वहां के रंग ढंग को देखेंगे और तभी आगे के प्लान पर विचार करेंगे। काफी सोच-विचार के बाद सुधा को पति के सामने नतमस्तक होना पड़ा और दिल्ली चलने के लिए मजबूर होना पड़ा ।
दूसरे दिन किशोर कांत ने घर पर ताला डालते हुए घर की चाबी अपने चचेरे भाई को दी और दिल्ली चलने के लिए विक्रम कीलग्जरी गाड़ी पर आकर पति-पत्नी दोनोंबैठ गए। विक्रम ने किशोर कांतसे कहा भाभी दोनों फैक्ट्रियों की मालिक होगी। इस लिए मालिक को आगे बैठना चाहिए । किशोर कांत के कहने पर सुधा आगे वाली सीट पर जाकर बैठ गई और विक्रम ने गाड़ी स्टार्ट कर दी।गाड़ी चलाते हुए रास्ते में विक्रमसुधा से छेड़खानीकरता रहा। सुधा मजबूरी में सब कुछ सहती रही।
शाम के 6:00 बजे थे। विक्रम की लग्जरी गाड़ी एक कोठी के सामने जाकर रुक गई ।विक्रम किशोर कांत सुधा कोठी के अंदर पहुंचे। विक्रम ने सुधा की ओर देखते हुए किशोर कांत से कहा- यह तुम्हारे रहने के लिए कोठी है । इसमें सभी सुविधाएं उपलब्ध है। नौकर के साथ कोठी के अंदरजाइए और विश्राम कीजिए । थोड़ी देर किशोर कांतसे बातें करने के बाद विक्रम अपनी कोठी के लिए चला गया। दूसरे दिन नरेंद्र सुधा सोकर उठ भी नहीं पाए थे उनके विश्राम कक्ष की घंटी बजउठी । किशोर नै दरवाजा खोला । विक्रम की स्टेनो ने सुधा और नरेंद्र को उनके मैनेजर पद की नियुक्ति का आदेश उन्हें पकड़ा दिया और स्टेनो ने कहा -आप लोग जल्दी से तैयार हो जाइए बॉस के साथ सुधा जी कपड़ा फैक्ट्री पर चार्ज लेने पहुंचेगी और मैं आपके साथआयरन फैक्ट्री पर जाऊंगी और आपकास्टाफ से परिचय करा आऊंगी । इतना कहकर स्टेनो चली गई । ठीक 1 घंटे के बाद चपरासी दौड़ता हुआ आया और बोला- साहब बाहर आप लोगों का इंतजार कर रहे हैं। किशोर कांत सुधा कोठी के बाहर पहुंचकर अपनी अपनी गाड़ियों की ओर बढ़ गए। सुधा विक्रम के साथ लग्जरी गाड़ी पर बैठ कर चली गई। किशोर कांत इसके बदअपनी गाड़ी पर स्टेनो के साथ बैठ कर चले गए । किशोर कांत सुधा दोनों ने खुशी-खुशी अपनी फैक्ट्रियों का चार्ज संभाल लिया और स्टाफ के सहयोग से अपनी अपनी फैक्ट्री का काम देखने लगे।
अभी 1 सप्ताह भी नहीं बीता था विक्रम ने कपड़ा फैक्ट्री में आकर सुधा से कहा -मैनेजर साहब !कल आपको मेरे सथ मुंबई चलना है। फिल्म प्रड्यूसर जग्गू राम से फिल्मी ड्रेसओं का एक बहुत बड़ा ऑर्डर लेना है। तुम मैनेजर हो इसीलिए तुम्हारे ही हस्ताक्षर से यह आर्डर मिलेगा ।इतना कहकर विक्रम ने सुधा से चलने के लिए कहा। सुधानेअपने कपड़े ठीक किए फैक्ट्री के बाहर आकर गाड़ी की अगली सीट पर बैठ गई ।रास्ते भर सुधा से मजाक करते हुए विक्रम गाड़ी चलाता हुआ कोठी पर आया ।थोड़ी देर किशोर कांत से बात करके विक्रमअपनी कोठी को चला गया । सुधा ने किशोर कांत से रोते हए विक्रम की अश्लील हरकतों को नरेंद्र को बताया और कहा विक्रम कल मुझे मुंबई ले जाना चाहता है ।मैं जाना नहीं चाहती हूं। किशोर कांत ने हंसकर कहा॒॒॒॒ नौकरी करने पर यह सब करना पड़ेगा। फैक्ट्री काम के लिएतुम्हें विक्रम के साथ मुंबई जाना चाहिए ।नौकरी करनी है तो यह सब करना ही पड़ेगा ।सुधा बोली अगर कोई गलत काम हो गया तो क्या तुम मुझे स्वीकार करोगे। नरेंद्र बड़ी जोर से हंसा और बोला मॉडर्न सभ्यता में यह सब बातें जायज
है ।सुधा ने आंसू बहाते हुए कहा- जानते हो विक्रम हमारे रूप सुंदर को चखना चाहता है ।इसीलिए मुझे अकेला मुंबई ले जाना चाहता है। तुम जानते हुए भीधन के लालच में मुझे खोना चाहते हो, अगरतुम्हेंयहसबबातेंस्वीकार है तो कल अवश्य मैंविक्रमके साथ जाऊंगी। जो होगा उसे हंस-हंसकर बर्दाश्त करूंगी ।सुधा की बातों पर किशोर कांत कुछ नहीं बोला।
दूसरे दिन सज धज कर सुधा विक्रम की कोठीपरअकेलीपहुंची और मुस्कुराते हुए विक्रम से बोली मैं परसोंतम्हारे साथ
मुंबई चलूंगी। मैं जानती हूं कि तुम मुझे मुंबई क्यों लिए जा रहे हो तुम्हें मेरे रूप सौंदर्य को चखना है। सुधा अपनीबत पू री भी ना कर पई थी विक्रम बीच में ही बोलपड़ा। मैं तुम्हारे रूप सौंदर्य पर मोहित हूं ।इसीलिए तुम्हें अपना बनाना चहता हूं। मुस्कुरा कर सुधा बोली मैं किशोर कांतकी जिंदगी बर्बाद नहीं करना चाहती हूं। तुम्हें किशोर कांतके नाम कोठी और मिल करना पड़ेगा। जब आज तुम यह सब काम कर दोगे तो कल तुम्हारे साथ चलूंगी। विक्रम सिंह ने किशोर कांतके नाम कोठी ़ं स्टील मिल की रजिस्ट्री कर दी।
दूसरे दिन सुधा विक्रम सिंह के साथ मुंबई पहुंच गई। विक्रम ने बहुत पहले से से ही डबल बेड का रूम बुक करा रखा था ।होटल पर पहुंचते ही होटल नौकरों ने वह रूम खोल दिया ।
रातके समय सुधाअपने पलंग पर लेटी हुई होने वाली कहानी पर गंभीरता से सोच रही थी। तभी विक्रम अपने पलंग से उठकर सुधा के पलंग पर आकर बैठ गया और सुधा की छाती गुलाबी गालों पर कामुक निगाहों से हाथ फेरने लगा। सुधा ने कोई विरोध नहीं किया। नारी शक्ति को जागृत करके सुधा उठ कर बैठ गई और विक्रम की ओर देखते हए मुस्कुराते हुए विक्रम से कहा तुम अपने पलंग पर पहुंचे ।मैं साड़ी उतार कर तुम्हारे पलंग पर पहुंचूंगी ।
विक्रमखशी से अपने पलंग पर जा पहुंचा औररंगीन सपने देखने लगा ।तभी सुधा ने मौका पाकर अपने पलंग से उठकरअपनी चोली से छोटी सी रिवाल्वर
निकाल कर बोली मैं क्षत्राणी हूं ।अपने सतीत्व की रक्षा करना अच्छी तरह जानती हूं। तुमने शराब पी ली है ।अब चुप चुप चाप अपने पलंग पर लेटे रहो । पिस्तौल देखकर विक्रम के होश उड़ गए। जो वह सेक्सी सपने देख रहा था वह हवा में उड़
गए ।सुधा से डरते हुए विक्रम ने जागते हुए रात काटी। सुबह होते ही वह चुपचाप सुधा को लेकर दिल्ली लौट आया। सुधाने आकर पूरी कहानी किशोरकात को बताई तो किशोर को अपने धन लालच के सोच पर बहुत पश्चाताप हुआ । सुधा ने दिल्ली में रह रहे पुलिस विभाग के बड़े अधिकारीअपने मामा को फोन किया और पूरी बातबताकरकोठी का पता देकर उन्हें जल्दी आने के लिए कहा। भांजी की खबर पाते ही मामा कोठी पर आ गए। विक्रम अपनी कोठी से भाग गया सुधाने पूरी कहानी जब मामा को बताई तो मामा ने सुधा की
हिम्मत को बधाई देते हुए कहा -यह पश्चात सभ्यता के रूप लुटेरे पति पत्नी और सुंदर स्त्रियों को रंगीन सपने दिखाकर नारी इज्जत को इसी तरह से लूटते रहते हैं। बहुत सी महिलाएं इन के माया जाल में फंस कर अपनी इज्जत गमा बैठतीहै । पाश्चात्य सभ्यता की आंधी में अंधे होकर कामी लोग नारी शक्ति को नहीं जान पाते हैं और कभी कभी अपनी जान गवां बैठते हैं। किशोर कांत सुधा विक्रम रूप लुटेरे की कोठी से मामा के साथ मामा के घर चले गये ।इसके बाद कानूनी ढंग से सुधा और किशोर कांत ने कोठी और स्टील मिल पर कब्जा कर लिया और रूप लुटेरे कामी विक्रम को सबक सिखा दिया।
बृज किशोर सक्सेना किशोर इटावी कचहरी रोड मैनपुरी

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