इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा मामले में मुख्य आरोपी बनाए गए IMC पार्टी के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा खान की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि इस बात का गंभीर जोखिम है कि जमानत मिलने पर वह फिर से खास समुदाय को उकसा सकते हैं और शांति एवं सौहार्द को बिगाड़ सकते हैं।
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने टिप्पणी की कि गवाहों के बयान और वीडियो क्लिप से ये संकेत मिलता है कि तौकीर रजा खान ने भड़काऊ भाषण देकर भीड़ को इकट्ठा होने के लिए प्रेरित किया और भीड़ द्वारा किए गए अपराध के लिए मुख्य साजिशकर्ता होने के नाते खान पूरी तरह जिम्मेदार हैं, क्योंकि उनके द्वारा भड़काने के बाद ही भीड़ ने कानून- व्यवस्था हाथ में ली गई. इस हिंसा में कई पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आई थीं।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए नोट किया कि भीड़ द्वारा ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा’ जैसे विवादित नारे लगाना देश के कानून की सत्ता के साथ-साथ भारत की संप्रभुता और अखंडता को एक सीधी चुनौती है. ये कृत्य सीधे तौर पर एक सशस्त्र (हथियार) विद्रोह की अपील करता है।
