जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक सम्पन्न, स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता व जवाबदेही पर जोर
एटा।कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों, योजनाओं एवं वित्तीय प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि स्वास्थ्य विभाग से संबंधित सभी कार्य एवं वित्तीय प्रस्ताव समिति के समक्ष समय से प्रस्तुत किए जाएं, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होने के साथ-साथ समयबद्ध स्वीकृति प्राप्त हो सके।
बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की बिंदुवार समीक्षा करते हुए उन्होंने अपेक्षित प्रगति लाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग आमजन से सीधे जुड़ा हुआ है, अतः सभी चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा एवं जिम्मेदारी के साथ करें।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी चिकित्सक समय से उपस्थित रहकर मरीजों को समुचित उपचार उपलब्ध कराएं। किसी भी प्रकार की लापरवाही को कदापि बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत गठित टीमों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही टीबी रोगियों की सतत निगरानी करते हुए उन्हें पूर्णतः स्वस्थ होने तक दवा उपलब्ध कराने एवं सेवन सुनिश्चित कराने पर जोर दिया।
जिलाधिकारी ने कहा कि जनमानस को टीकाकरण के प्रति जागरूक करते हुए शत-प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए। सभी एमओआईसी को निर्देशित किया गया कि वे आशा एवं एएनएम के साथ साप्ताहिक बैठक कर प्रगति की नियमित समीक्षा करें।
आयुष्मान कार्ड निर्माण की समीक्षा के दौरान 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लाभार्थियों के कार्ड लक्ष्य के सापेक्ष कम पाए जाने पर जिलाधिकारी ने तत्काल सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना अत्यंत महत्वपूर्ण जनहितकारी योजना है, जिसके अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को ₹5 लाख तक का निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाता है, अतः इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी।
जिलाधिकारी ने सभी पीएचसी एवं सीएचसी पर साफ-सफाई, विद्युत, पेयजल, रंगाई-पुताई एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए।
उन्होंने संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने पर बल देते हुए कहा कि आशा एवं एएनएम के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में प्रसव हेतु प्रेरित किया जाए तथा प्रसूता को कम से कम 48 घंटे तक स्वास्थ्य केंद्र पर ठहरने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र प्रसाद मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद, समस्त अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, एमओआईसी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
