NCRT किताबों के आदेश हवा-हवाई…
जिले के लगभग सभी स्कूलों में धड़ल्ले से हो रही किताबों वाली लूट
सब-एडिटर: अमित माथुर
एटा। जिले में संचालित प्राईवेट स्कूल शासन-प्रशासन के दावे दरकिनार कर धड़ल्ले से किताबों वाली लूट का व्यापार कर रहे हैं।
स्कूलों में किताबों के नाम पर होने वाली लूट को रोकने के शासन-प्रशासन के बड़े-बड़े दावे, आदेश और जांच समितियां, जांच टीमें सिर्फ कागजों और समाचार-पत्रों की खबरों तक सिमट कर रह गए हैं। जमीनी स्तर पर बड़े-बड़े दावे अब-तक कागजी शेर साबित हुए हैं ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि शासन-प्रशासन की मंशा इस लूट को रोकना नहीं बल्कि लोगों को मूर्ख बनाने का हथकंडा है, आखिर जनता को यह भी दिखाना हैं कि सरकार जनता के हितों का भी ध्यान रखती है।
प्राईवेट स्कूलों में किताबों के नाम पर लंबे समय से लूट का नंगा नाच चलता आ रहा है, प्रत्येक वर्ष इस लूट को लेकर आवाज भी उठतीं हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में आवाज भी चुप हो जाती हैं और मीडिया का शोर भी, इस वर्ष जिस तरह शासन-प्रशासन द्वारा जनपद एवं प्रदेश की जनता को किताबों वाली लूट रोकने का लाॅलीपोप दिया गया ऐसा जमीनीस्तर पर कुछ भी होता नहीं दिख रहा है, स्कूल प्रबंधक खुलेआम छात्रों के परिजनों को लूट रहे हैं।
स्कूल प्रबंधन स्वयं ही मनमानी रेट वाले कोर्स चिपका रहें हैं, स्कूल प्रबंधन द्वारा स्कूलों में कोर्स खरीद कर पहले ही रख लिए गए हैं वो ही मुनाफाखोरी किताबें कोर्स में दी जा रही हैं, कमाल की बात यह है कि कुछ स्कूलों में किताबें दुकानों पर नहीं बल्कि विद्यालयों में गोदामों में रखी हुई हैं और स्कूल स्वयं ही मोटी रकम वसूल कर किताबें बेच रहे हैं।
प्रशासनिक अधिकारी स्कूलों में चेकिंग करने की बजाय कागजी घोड़े दौड़ा रहे हैं, स्कूलों में NCRT किताबें चलाने के दावे सिर्फ और सिर्फ एक जुमला साबित हो रहा है।
सवाल…
आखिर अधिकारियों ने अब-तक कितने स्कूलों में छापे मारे तो इसका जबाव यह है छापे तो नहीं मारे लेकिन कागजी घोड़े दौड़ाने और लोगों को मूर्ख बनाने में अब-तक अधिकारी अव्वल साबित हुए हैं।
चुनाव में एक-एक गांव तक पहुंचने अधिकारी गिने-चुने स्कूलों तक पहुंचने में पीछे क्यों हैं..? अधिकारियों की मंशा इस लूट को रोकना है या फिर मात्र सरकार के जुमले को जमीनीस्तर पर उतारने की बजाय सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाना है यह सवाल हर किसी की जुबान पर है।
