
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ऑफिस में कुष्ठरोग विभाग के स्वीपर धीरज की मौत हो गई. करोड़पति स्वीपर धीरज ने को टीवी हो गई थी, बावजूद इसके, उसने अपने इलाज के लिए भी बैंक से रकम नहीं निकाली. दैनिक खर्चों की पूर्ति भी वह दूसरे लोगों से रुपये मांग कर कर लेता था. यह स्थिति उस समय है जब धीरज के नाम काफी सारा जमीन जायदाद के साथ बैंक में 70 लाख रुपये से अधिक रकम पड़ी है.
धीरज के पिता भी कुष्ठ रोग विभाग में तैनात थे. नौकरी के दौरान ही करीब दस साल पहले उनकी मौत हो गई और मृतक आश्रित कोटे में उनके स्थान पर धीरज को नौकरी मिल गई. बताया जा रहा है कि नौकरी पर आने के बाद धीरज रुपये निकालने के लिए कभी बैंक नहीं गया. फटे पुराने कपड़े पहनने वाला धीरज आमतौर पर दैनिक खर्चों की पूर्ति भी अपने साथियों व अन्य लोगों से रुपये मांग कर लेता था. लोगों से रुपये मांगने के लिए वह उनके पैर तक पकड़ लेता था. लोग उसे गरीब समझ कर रुपये दे भी देते थे. लेकिन एक दिन अचानक जब उसे ढूंढते हुए बैंक वाले उसके दफ्तर पहुंचे तो पता चला कि भिखारी की भेष भूषा वाला यह स्वीपर गरीब नहीं, बल्कि करोड़ों की संपत्ति का मालिक है. बैंक में ही उसके खाते में 70 लाख रुपये से अधिक की राशि पड़ी है.
नहीं की शादी, मां के साथ रहता था
इतना अमीर होने के बावजूद धीरज ने कभी समझने का प्रयास भी नहीं किया कि लग्जरी क्या होता है. उसने शादी भी नहीं की. बताया जा रहा है कि उसने शादी भी केवल इसलिए नहीं की रुपये खर्च हो जाएंगे. वह अपने घर में 80 वर्षीय मां के साथ रहता था और न्यूनतम जरूरतों को मुश्किल से पूरी कर जैसे तैसे अपना जीवन यापन करता था. बताया जा रहा है कि वह मानसिक रूप से थोड़ा कमजोर भी था.
हर साल दाखिल करता था ITR
धीरज के सहकर्मियों की माने तो वह काम बड़ी मेहनत और लगन के साथ करता था. वह ना केवल अपने काम के प्रति इमानदार था, बल्कि सरकार को अपनी आय का टैक्स भी पूरी इमानदारी के साथ जमा करता था. इसके लिए वह हर साल समय से इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करता था. बैंक अधिकारियों के मुताबिक उसकी कमाई में पाई पाई का पूरा हिसाब मेंटेन है.
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