
रूस-यूक्रेन (Russia-Ukraine War) के बीच तीन महीने से अधिक समय से युद्ध जारी है. इस बीच दुनियाभर में खाद्यान्न (Food grains) संकट गहराया हुआ है. मसलन बीते महीनों से कई देशों में गेहूं की आपूर्ति प्रभावित हुई है. इस बीच भारतीय गेहूं (Indian Wheat) दुनियाभर में अपनी पहचान बनाने में सफल रहा. जिसके तहत दुनियाभर में गहराए खाद्यान्न संकट के बीच विश्व के कई देशों में भारतीय गेहूं ने अपनी जगह बनाई, लेकिन भारतीय गेहूं की इस पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बुधवार को बड़ा धक्का लगा है. जिसमें एशिया और यूरोप के द्वार कहे जाने वाले तुर्की ने भारतीय गेहूं को ना कहा है. मसलन तुर्की ने भारतीय गेहूं से लदे एक जहाज को वापस लौटाने का फैसला लिया है. तुर्की के इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय गेहूं को लेकर एक नई चर्चा शुरू होने के आसार हैं. आईए समझते हैं कि यह प्रकरण क्या है और इस फैसले से देश-विदेश में भारतीय गेहूं के बाजार पर क्या असर पड़ेगा.
तुर्की ने गेहूं में रूबेला वायरस होने के हवाला देते हुए लौटाया जहाज
तुर्की ने बीते दिनों 56 हजार मिलियन टन भारतीय अनाज लदे जहाज को लौटाने का फैसला किया है. हालांकि तुर्की सरकार की तरफ से आधिकारिक तौर पर भारतीय गेहूं को ना करने की कोई वजह नहीं बताई गई है, लेकिन अमेरिका व्यवसायिक संस्थान S&P Global ने इससे जुड़ी एक रिपोर्ट में तुर्की के हवाले से कहा है कि उसने फाइटोसैनिटरी चिंताओं (पेड़-पौधों से जुड़ी बीमारी) का हवाला देते हुए भारतीय गेहूं की खेप को ना कहा है. दैनिक भास्कर ने अपनी एक रिपोर्ट इस्तांबुल के एक व्यवसायी के हवाले से कहा है कि तुर्की कृषि मंत्रालय को भारतीय की तरफ से भेजी गई खेप में रूबेला वायरस होने का पता चला है. इस कारण खेप का वापस भेजने का फैसला लिया गया है.
महामारी के दौर में भारतीय गेहूं के लिए खतरनाक हो सकता है रूबेला वायरस वाला दाग
तुर्की सरकार ने रूबेला वायरस का हवाला देते हुए भारतीय गेहूं की खेप को वापस लौटाने का फैसला लिया है. कोरोना महामारी के दौर में भारतीय गेहूं पर लगा रूबेला वायरस का यह दाग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खतरनाक हो सकता है. असल में रूबेला को जर्मन खसरा भी कहा जाता है. जो रूबेला वायरस की वजह से होता है. रूबेला का संक्रमण 3 से 5 दिन तक रहता है, जबकि इसका फैलाव भी कोरोना की तरह संक्रमित व्यक्ति की छींंक, नाक और गले के स्त्राव और बुंदों के कारण होता है. ऐसे समय में जब पूरा विश्व कोरोना महामारी के दौर से गुजर रहा है, तब भारतीय गेहूं में रूबेला वायरस मिलने का आरोप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय गेहूं की पहचान के लिए नुकसान देय साबित हो सकती है.
देश-विदेश में कम हो सकते हैं गेहूं के दाम
भारतीय गेहूं को लेकर तुर्की की तरफ से लिए गए फैसले के बाद देश-विदेश में इसकी मांग पर विपरित असर पड़ सकता है. जिससे सीधे तौर पर देश-विदेश में गेहूं के दाम कम हो सकते हैं. असल में युद्ध की वजह से उपजे वैश्विक खाद्यान्न संकट के चलते भारतीय गेहूं की मांग दुनियाभर से हुई थी. हालांकि इस बारभारत में गेहूं का उत्पादन कम हुआ है, जिसे देखते हुए भारत ने गेहूं के निर्यात पर रोक लगाई हुई है. हालांकि भारत उन देशों को गेहूं निर्यात करेगा, जिन्हें निर्यात पर बंदी के फैसले से गेहूं भेजने की मंजूरी दे दी गई थी, लेकिन निर्यात पर इस रोक के बाद भी देश के कई शहरों में गेहूं के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से अधिक चल रहे हैं. जिसका मुख्य कारण यह है कि किसानों समेत व्यापारियों को भविष्य में निर्यात पर लगी रोक हटने की उम्मीद है. ऐसे में कई राज्यों में किसानों की तरफ से गेहूं स्टोर करने की खबरें भी आती रही है, लेकिन इस बीच तुर्की का फैसला अंतरराष्ट्रीय स्तप पर भारतीय गेहूं के प्रभाव को कम कर सकता है. नतीजन गेहूं के दाम देश-विदेश में कम हो सकते हैं.
तुर्की की चाल! रूस और यूक्रेन से गेहूं मंगाने की योजना पर कर रहा है काम
तुर्की की भारतीय गेहूं की खेप को तब लौटाया गया है, जब वह रूस और यूक्रेन से गेहूं मंगाने की योजना पर काम रहा है. जिसके बारे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जानकारी सार्वजनिक है. जानकारी के मुताबिक तुर्की अब रूस और यूक्रेन से एक कोरिडोर के जरिए गेहूं मंगवाने पर बातचीत कर रहा है. माना जा रहा है की तुर्की की यह बातचीत अंतिम चरण पर पहुंच गई है. जिसके बाद उसने भारत के गेहूं को ना कहा है.
मिस्त्र ने जांच के बाद भारतीय गेहूं को दी है मंजूरी
तुर्की की तरफ से भारतीय गेहूं में रूबेला वायरस होने का आरोप तब लगाया जा रहा है, जब मिस्त्र सरकार ने जांच के बाद भारतीय गेहूं के निर्यात को मंजूरी दी गई है. असल में अप्रैल में मिस्त्र के प्रतिनिधिमंडल ने कई राज्यों में खेत में खड़ी गेहूं की फसल की मुआयना किया था. जिसकी आवश्यक जांच के बाद मिस्त्र ने भारत से गेहूं आयात करने की मंजूरी दी थी. ऐसे में तुर्की की तरफ से भारतीय गेहूं को वापस भेजने के फैसले को कई दूसरे एंगलों से भी देखा जा रहा है.
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