मंडी शुल्क और किसानों की लूट कर रहे हैं मंडी से बाहर 15 धान खरीद केन्द्र, घटतौली करते कांटे
मंडी से बाहर बने धान खरीद केन्द्र बने हैं प्रमुख मार्गों में जाम का कारण
एटा। कृषि उत्पादन मंडी समिति एटा में अंधेर नगरी चौपट राजा का राज चल रहा है। यहां सभी नियम कायदे ताक पर रखकर मंडी सचिव मंडी स्थल से बाहर अनगिनत धान खरीद केन्द्र बनवाकर मंडी शुल्क और किसानों की लूट करा रहे हैं। जीटी रोड और अलीगंज रोड पर स्थापित कई निजी धर्म कांटे किसानों के अनाज की घटतौली पर्ची में दर्शाकर आढ़तियों को लाभ पहुंचाने का काम कर रहे हैं। मंडी से बाहर बने धान खरीद केन्द्र ही जिला मुख्यालय के दोनों प्रमुख मार्गों पर जाम का कारण बने हुए हैं।
उ0प्र0 सरकार द्वारा प्रदेश के प्रत्येक जनपद में जनपद ही नहीं कस्बा स्तर तक में मंडी स्थलों का निर्माण कराकर उन्हें चारदीवारी से बन्द करा दिया गया है ताकि किसानों के खाद्यान्न की खरीद मंडी में लाइसेंस लेकर बैठे कमीशन एवं थोक आढ़तियों द्वारा उचित मूल्य पर की जाए वहीं स्थानीय मंडी से बाहर की मंडियों में जाने वाले खाद्यान्न पर लगने वाले मंडी शुल्क की हेरा-फेरी न की जा सके। लेकिन विगत वर्षों से मंडी सचिव से ताल-मेल कर थोक आढ़तियों द्वारा मंडी से बाहर धान खरीद केन्द्र बना लिए जाते हैं जिन पर प्रतिदिन हजारों कंुतल धान खरीदा जाता है और बड़े-बड़े लोडरों में लादकर बाहर भेज दिया जाता है। बताया गया है कि मंडी के बाहर से लोड होने वाले ट्रकों की मंडी कर्मचारियों द्वारा कोई निगरानी नहीं है। मंडी से बाहर अलीगंज रोड पर 8 धान खरीद केन्द्र और जीटी रोड पर 7 धान खरीद केन्द्रों को राष्ट्रीय कोहिनूर की टीम द्वारा देखा गया है। इनके अतिरिक्त ऐसे और भी कई धान केन्द्र होंगे जो गोपनीय स्थलों पर चलाये जा रहे होंगे। जिनकी जानकारी मंडी कर्मचारियों को भी नहीं होगी। अलीगंज रोड पर बी.एस. धर्मकांटे से लेकर कुसाड़ी गांव में स्थित रोमो कोल्ड स्टोरेज के बाद तक सड़क के दोनों ओर 8 धान खरीद केन्द्र बनाये गये हैं वहीं जीटी रोड पर गोपाल गौशाला के बाद से सड़क की इसी साइड में हाईवे के निकट स्थित खाटू श्याम कालोनी और खाटू श्याम धाम के अंदर तक 7 धान खरीद केन्द्र संचालित हैं। वर्तमान में एटा से प्रतिदिन लगभग 300 से 350 ट्रक धान बाहर के चावल मिलों को भेजा जा रहा है। बताया गया है कि बाहर जाने वाले ट्रकों की संख्या इससे अधिक तो हो सकती है लेकिन कम नहीं होगी।
मंडी समिति से बाहर स्थित धर्मकांटों पर आढ़तियों द्वारा ट्रेक्टरों को इसलिए तुलवाया जाता है कि निजी धर्मकांटे वाले प्रति ट्रेक्टर 70 किलो से 1 कुंतल तक कम खाद्यान्न की तौल दर्शाकर खरीददारों को लाभ पहुंचाते हैं। धर्मकांटे मंडी में भी लगे हुए हैं और संचालित भी है किसानों का खाद्यान्न सरकारी धर्मकांटों पर ही तौला जाना चाहिए। प्रमुख मार्गों पर कांटा कराने के लिए बार-बार ट्रेक्टरों की आवाजाही ही जाम का प्रमुख कारण है। मंडी स्थल से बाहर नियम विरूद्ध स्थापित धान खरीद केन्द्रों को बंद कराया जाना चाहिए ताकि प्रमुख मार्गों पर लगने वाले जाम और प्रतिदिन होने वाली लाखों रूपये की मंडी शुल्क की चोरी रोकी जा सके।
उल्लेखनीय है कि पूर्व जिलाधिकारी अरविन्द सिंह ने बिना मंडी टैक्स चुकाये रेलवे की रैकों को लोडकर बाहर भेजे गये प्रकरणों का खुलासा किया था। जब रेल की पूरी रैक बिना मंडी शुल्क दिये लोड की जा सकती है तो मंडी स्थल से बाहर होने वाली खरीद पर कितना गेटपास बनवाया जायेगा यह तो खरीददार पर निर्भर करता है क्योंकि मंडी से बाहर बने धान खरीद केन्द्रों की गिनती और स्थान भी मंडी सचिव और उनके निरीक्षकों को मालूम नहीं है।
जिलाधिकारी महोदया से अपेक्षा है कि जनपद के मुख्य मार्गों पर जाम का कारण बने मंडी स्थल से बाहर संचालित अवैध धान खरीद केन्द्रों पर छापामार कार्यवाही कर बंद करायें ताकि प्रतिदिन मंडी शुल्क की लाखों रूपये की होने वाली चोरी को रोका जा सके वहीं जनपद की जनता को मुख्य मार्गों पर जाम लगने से होने वाली परेशानी से निजात मिल सके।
