निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकें अनिवार्य हों, अभिभावकों को मिले आर्थिक राहत
एटा। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य रेनू गौड़ ने माध्यमिक एवं मूलभूत शिक्षा राज्य मंत्री को पत्र भेजकर प्रदेश के सभी निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों को अनिवार्य रूप से लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विभिन्न जनपदों के भ्रमण के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि अनेक निजी विद्यालय एनसीईआरटी की पुस्तकों के स्थान पर स्वनिर्धारित एवं महंगी पुस्तकों का प्रयोग करा रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
रेनू गौड़ ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि यह प्रवृत्ति शैक्षिक समानता के सिद्धांत के विपरीत है। उन्होंने आग्रह किया कि सभी निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम ही लागू किया जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तक आधारित ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना भी है। इसलिए एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के साथ सह-पाठ्यक्रमीय एवं कौशलवर्धक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
उन्होंने विद्यालयों में प्रतिवर्ष वर्दी परिवर्तन की प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि हर साल नई वर्दी खरीदना अभिभावकों के लिए आर्थिक रूप से कष्टप्रद है। उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यालयी वर्दी कम से कम पांच वर्षों तक यथावत रखी जाए, जिससे अभिभावकों को राहत मिल सके।
इसके अतिरिक्त ‘हाउस प्रणाली’ के अंतर्गत हर वर्ष हाउस परिवर्तन के कारण अतिरिक्त वर्दी एवं सामग्री खरीदने की आवश्यकता पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। उन्होंने मांग की कि किसी भी छात्र-छात्रा को न्यूनतम तीन वर्षों तक एक ही हाउस में रखा जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
अंत में रेनू गौड़ ने संबंधित विभाग से इन बिंदुओं पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर सभी निजी विद्यालयों में सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया, जिससे विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के हितों की रक्षा हो सके और शिक्षा व्यवस्था अधिक समान एवं जनोन्मुख बन सके।
