मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा तेज धूप एवं लू (Heat Wave) से पशुधन को सुरक्षित रखने हेतु एडवाइजरी जारी
एटा। गर्मी के मौसम में तेज धूप एवं लू (Heat Wave) के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा० राम प्रकाश शर्मा द्वारा जनपद के समस्त पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की गई है। उन्होंने बताया कि इस मौसम में पशुधन को कई प्रकार की विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें पानी की कमी, चारे का अभाव, अत्यधिक तापमान के कारण शारीरिक बीमारियाँ तथा संक्रामक रोगों का खतरा प्रमुख है। इससे पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और दुग्ध उत्पादन में गिरावट के साथ पशुपालकों को आर्थिक हानि उठानी पड़ती है।
क्या करें (Do’s): आवास एवं छाया की व्यवस्था पशुओं को सदैव छायादार एवं हवादार स्थान पर रखें। शेड की छत यदि टिन या कंक्रीट की हो तो उस पर पुआल या बोरी डालकर पानी का छिड़काव करें। पशुशाला में पंखे, एग्जॉस्ट फैन तथा डेयरी फार्म में फॉगर्स/मिस्टर्स का उपयोग लाभकारी है।
पानी एवं आहार प्रबंधन पशुओं को 24 घंटे स्वच्छ एवं ठंडा पानी उपलब्ध कराएं। गर्मियों में एक वयस्क गाय/भैंस को प्रतिदिन लगभग 80–100 लीटर पानी की आवश्यकता होती है, चारा सुबह एवं शाम के ठंडे समय में दें तथा हरे चारे की मात्रा बढ़ाएं, पशु चिकित्सक की सलाह से खनिज मिश्रण एवं नमक की मात्रा भी बढ़ाई जा सकती है, शरीर को ठंडा रखना, भैंसों एवं संकर नस्ल की गायों को दिन में कम से कम दो बार ठंडे पानी से नहलाएं, यदि संभव हो तो भैंसों को दोपहर में तालाब या पोखर में बैठने दें।
क्या न करें (Don’ts): दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक पशुओं को धूप में न रखें और न ही चरने भेजें, गर्मी के समय पशुओं से अधिक कार्य न कराएं और न ही उन पर भार डालें, पशुशाला में अधिक भीड़ न करें, इससे उमस बढ़ती है, बासी, दूषित या गर्म पानी पशुओं को न पिलाएं, अचानक पशुओं के आहार में बदलाव न करें।
लू (Heat Stroke) के लक्षण: अत्यधिक हांफना, मुँह से लार या झाग आना, जीभ बाहर निकालकर तेज सांस लेना, सुस्ती, आँखों का लाल होना, दूध उत्पादन में कमी, शरीर का तापमान 105°F से 107°F तक पहुंचना
तत्काल प्राथमिक उपचार: यदि किसी पशु को लू लग जाए, तो उसे तुरंत ठंडी व छायादार जगह पर ले जाएं। उसके शरीर पर ठंडा पानी डालें तथा नमक व गुड़/ग्लूकोज मिला पानी पिलाएं। तत्पश्चात नजदीकी पशु चिकित्सालय या टोल फ्री नंबर 1962 पर संपर्क करें।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे इस एडवाइजरी का पालन कर अपने पशुधन को सुरक्षित रखें एवं गर्मी के दुष्प्रभावों से बचाएं।
