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उत्तर प्रदेशराज्य

मर्डर मिस्ट्री: डीएसपी ने किया शक, और महिला डॉक्टर की हत्या का हुआ खुलासा

Admin
Last updated: अक्टूबर 20, 2021 4:34 अपराह्न
By Admin 8 Views
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14 Min Read
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कहते हैं जुर्म करने वाला कितना ही शातिर हो, लेकिन वो कानून की आंखों से नहीं छुप सकता. क्योंकि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं. कोई भी अपराधी कानून की गिरफ्त से नहीं बचकर भाग नहीं सकता. और जो भागता है या कानून को धोखा देने की कोशिश करता है, वो एक दिन कानून के शिकंजे में ज़रूर फंसता है. इसी बात की मिसाल एक बार फिर उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में देखने को मिली. जहां एक कत्ल हुआ और कातिल ने उस कत्ल को खुदकुशी बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. लेकिन जब पुलिस मौका-ए-वारदात पर पहुंची तो वहां लाश ने खुद एक ऐसा सुराग पुलिस को दे दिया कि मर्डर का वो संगीन मामला खुल गया और कानून के हाथ कातिल तक जा पहुंचे.

शाम को जब तरुण अग्रवाल अपने भाई अरुण के घर पहुंचे, तो घर का दरवाज़ा बाहर से बंद था. एक रोज़ पहले यानी 12 तारीख को अरुण अपने 10 और 7 साल के दोनों बच्चों को अपने बड़े भाई तरुण के घर पर छोड़ कर कहीं काम से गया था. ऐसे में जब दूसरे दिन तरुण को अपने भाई के घर का दरवाज़ा बाहर से बंद मिला, तो वो दरवाज़ा खोल कर अंदर गए. लेकिन वो जितनी तेज़ी से अंदर गए थे, उतनी ही तेज़ी से चीखते हुए बाहर भी निकल आए. क्योंकि घर के अंदर अरुण की बीवी आस्था की लाश फंदे से लटक रही थी और अपनी भाभी को इस हाल में देख कर तरुण बुरी तरह घबरा गए थे. आस्था की इस रहस्यमयी मौत की खबर अलीगढ़ पुलिस को भी मिल चुकी थी. क्वार्सी थाने की पुलिस रमेश विहार कॉलोनी के उस मकान में पहुंची, जहां लाश मिली थी. पुलिस ने वहां सबूत की तलाश में घर का कोना-कोना छाना. पुलिस ने देखा कि आस्था की लाश कमरे के पीछे बने वाशिंग एरिया की छत पर लगे लोहे के वेंटिलेशन जाल से लटक रही है. शुरुआती छानबीन में ही पुलिस को ये भी पता चल गया कि आस्था और अरुण के बीच पिछले कुछ दिनों से काफी तनातनी चल रही थी और अरुण इन दिनों घर से बाहर अपनी फैक्ट्री में ही सो रहा था. अरुण के घरवालों को भी इस मामले में किसी पर कोई शक नहीं था.

शुरुआती छानबीन भी खुदकुशी की तरफ ही इशारा कर रही थी. डॉक्टर आस्था और अरुण एक दूसरे को शादी के पहले से जानते थे. दोनों ने लव मैरिज की थी. कुछ सालों तक दोनों की ज़िंदगी अच्छी चलती रही. डॉ. आस्था को जहां एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में नौकरी मिल गई थी, वहीं अरुण ने ऑक्सीजन फैक्ट्री की शुरुआत की थी. लेकिन फिर बाद में दोनों में अनबन होने लगी थी. दोनों के रिश्ते अब अच्छे नहीं थे.

मुआयने के दौरान नज़र आई अजीब सी चीज़

मौके पर पहुंचे डीएसपी श्वेताभ पांडेय ने फंदे से लटकती लाश का बारीकी से मुआयना किया और इस दौरान उन्हें एक अजीब सी चीज़ नज़र आई. डीएसपी ने देखा कि लाश के मुंह से खून निकल कर सूख चुका है. आम तौर पर फंदा लगा कर खुदकुशी करने पर ऐसा नहीं होता. मरनेवाले के मुंह से खून नहीं निकलता. तो क्या ये मामला खुदकुशी का नहीं है? डीएसपी पांडेय के दिमाग में ये सवाल कुलबुलाने लगा. उधर, नियम के मुताबिक पुलिस ने आस्था की लाश को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया. चूंकि मामला नाज़ुक था, लिहाजा अलीगढ़ में डॉक्टरों की एक टीम ने लाश का पोस्टमार्टम किया और फॉरेंसिक एग्ज़ामिनेशन में चौंकानेवाला नतीजा सामने आया. डॉक्टरों ने बताया कि आस्था की मौत गले में फंदा लगा कर लटकने की वजह से नहीं हुई, बल्कि फंदे से लटकाए जाने से पहले किसी ने गला घोंट कर उसकी जान ली और तब उसे फंदे से लटकाया गया. यानी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक ये मामला खुदकुशी का नहीं, बल्कि कत्ल का था.

लेकिन अभी पुलिस क़त्ल के इस पेचीदा मामले में अपनी तफ्तीश आगे बढ़ाती, तब तक उसे एक और चौंकानेवाली जानकारी मिली. एक लड़की ने अलीगढ़ पुलिस के कांटैक्ट किया और बताया कि जिस रोज़ आस्था की मौत हुई, आस्था ने उसी रोज़ रात करीब 8 बजे के आस-पास उसे एक व्हाट्सएप मैसेज बेजा था. मैसेज में उसने लिखा था… “माइ लाइफ़ इज़ इन डेंजर। इफ़ आई डाइ, काइंडली हैंडोवर द कस्टडी ऑफ़ माइ किड्स टू माइ सिस्टर.” यानी मेरी ज़िंदगी ख़तरे में है. अगर मेरी जान चली जाती है, तो प्लीज़ मेरे दोनों बच्चों को मेरी बहन को सौंप देना. इत्तेफ़ाक से आस्था ने 12 अक्टूबर की रात को अपनी जिस फ्रेंड को ये मैसेज भेजा था, उसका मोबाइल फ़ोन का इंटरनेट पैक उसी रोज़ ख़त्म हो गया था. जिसके चलते आस्था का ये मैसेज उसे वक़्त पर डिलिवर नहीं हुआ. अगले दिन जब आस्था की दोस्त ने अपने मोबाइल का इंटरनेट पैक रिचार्ज करवाया, तो आस्था का ये मैसेज देख कर चौंक गई. लेकिन इससे पहले कि वो इस मैसेज पर रिएक्ट कर पाती, आस्था इस दुनिया से दूर जा चुकी थी. सचमुच आस्था की जान जा चुकी थी. ऐसे में उस दोस्त ने आस्था के इस मैसेज के बारे में पुलिस को बताना ठीक समझा. ये अपने-आप में आस्था की मौत को क़त्ल साबित करने के लिए काफ़ी था.

पूरे मामले में शक की सुई पहले दिन से ही आस्था के पति अरुण की तरफ़ घूम रही थी. ऊपर से आस्था की मौत के दो दिन गुज़रने के बाद भी जब अरुण का कोई अता-पता नहीं था, तो पुलिस का शक यकीन में बदलने लगा. पुलिस से लेकर घरवालों तक ने अरुण को कई बार फ़ोन किया. इस वारदात के बारे में बताने की कोशिश की, लेकिन हर बार अरुण का फ़ोन स्विच्ड ऑफ़ आता रहा. लेकिन अरुण तक पहुंचने से पहले पुलिस इस मामले में ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी जुटा लेना चाहती थी. मसलन, आस्था का कत्ल ठीक कितने बजे हुआ? क्या अकेले अरुण ने ही उसकी जान ली या फिर उसके साथ इस कत्ल में कोई और था? वैसे भी किसी की जान लेने के बाद उसे फंदे से लटका देना अकेले इंसान का काम नहीं हो सकता था. इसलिए पुलिस इस पहलू को अभी खंगालना चाहती थी. कुछ इसी इरादे के साथ पुलिस ने रमेश विहार कॉलोनी की सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए. पुलिस ने आस्था और अरुण के घर के आस-पास लगे तमाम कैमरों के साथ-साथ पूरी कॉलोनी और आस-पास के सौ से ज़्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का मुआयना किया और इसी दौरान पुलिस को कई संदिग्ध तस्वीरें नज़र आईं.

पुलिस ने देखा कि 12 अक्टूबर की रात अरुण अपने साथ तीन और लोगों को कार में लेकर अपने घर पहुंचा था. लेकिन पहले वो कार से अकेला ही उतर कर घर के अंदर गया. इसके बाद वो करीब 15 से 20 मिनट बाद फिर कार में मौजूद लोगों के पास पहुंचा. कुछ देर तक उनके साथ रहा और फिर सभी एक-एक कर अरुण के घर चले गए. इसी बीच जब कार में बैठे लोग देर तक अरुण का इंतज़ार कर रहे थे, तो वो कुछ देर के लिए गाड़ी से नीचे उतरकर गली में टहल रहे थे और इस दौरान उनकी तस्वीरें कैमरे में क़ैद हो चुकी थीं. यानी मामला साफ़ था कि अरुण ने अपने तीन और साथियों की मदद से अपनी बीवी आस्था का क़त्ल किया था. अब पुलिस हाथ धो कर अरुण के पीछे पड़ी थी. लेकिन वो लगातार अलीगढ़ से बाहर रह कर पुलिस को चकमा दे रहा था. इसी बीच 17 और 18 अक्टूबर की रात पुलिस को अचानक अरुण के मोबाइल फ़ोन की लोकेशन अलीगढ़ में नज़र आई. दरअसल, भागते-भागते उसके पैसे ख़त्म हो गए थे और जब वो अलीगढ़ में अपनी फैक्ट्री में रुपये लेने पहुंचा, तो पुलिस ने उसे धर धबोचा. पकड़े जाने पर अरुण ने आस्था के क़त्ल का गुनाह कुबूल कर लिया. जब उसने पूछताछ में क़त्ल की वजह से लेकर पूरी साज़िश की कहानी सुनाई, तो एक बारगी पुलिसवाले भी हैरान रह गए.

आस्था की ज़िंदगी में एक और लड़के की एंट्री

पुलिस के मुताबिक आस्था और अरुण ने 2008 में लव मैरिज की थी. शादी के कुछ साल तक तो सबकुछ ठीक रहा. लेकिन कुछ समय बाद आस्था की ज़िंदगी में एक और लड़के की एंट्री हो गई. आस्था घंटों उस लड़के से बातें करती थीं और कई बार उसे घर भी बुलाती थी. इसे लेकर अक्सर आस्था और अरुण के बीच झगड़ा होता था. इससे नाराज होकर अरुण अक्सर रात को अपनी फैक्ट्री में ही सो जाता था. ऐसे में आस्था भी अरुण पर शक करने लगी थी और उनके रिश्ते बद से बदतर होते चले गए.

अब आस्था अरुण पर उसकी प्रॉपर्टी को अपने और बच्चों के नाम कराने के लिए दबाव बनाने लगी थी. क्योंकि आस्था को लगता था कि अगर उसे कुछ हो गया, तो कम से कम प्रॉपर्टी होने से उसके बच्चों की ज़िंदगी सुरक्षित रहेगी. 28 सितंबर को कुछ इन्हीं बातों को लेकर आस्था और अरुण के बीच फिर से लड़ाई हुई थी और उसी दिन आस्था ने वो काम कर दिया, जो अरुण के लिए एक बड़ा झटका था. झगड़े के बाद आस्था ने फ़ोन कर अपने दोस्त को घर बुला लिया. आस्था का दोस्त सुबह चार बजे उनके घर पहुंचा और पहुंचते ही उसने अरुण से मारपीट शुरू कर दी. इस मारपीट की वजह से बच्चे भी जग गए. अरुण की पिटाई भी हुई और बेइज्जती भी. और बस यही वो पल था, जब अरुण ने आस्था के क़त्ल का फ़ैसला कर लिया था.

किराये के क़ातिल

इसके बाद अरुण सीधे अपनी फैक्ट्री पहुंचा. उसने फैक्ट्री के गार्ड विकास को सारी बात बताई और आस्था का क़त्ल करवाने की इच्छा जताई. विकास ने कहा कि वो दो सुपारी किलर्स को जानता है, जो ये काम कर देंगे. इसके बाद विकास ने अरुण को अशोक उर्फ़ टशन और पवन नाम के दो किराये के क़ातिलों से मिलवाया. दोनों ने पहले दो लाख रुपये मांगे. लेकिन फिर बात एक लाख रुपये में तय हुई और गुस्साए अरुण ने 60 हज़ार रुपये एडवांस के तौर पर क़ातिलों को दे दिए. प्लान के मुताबिक 12 अक्टूबर की शाम को अरुण आस्था के क़ातिलों को लेकर अपने घर पहुंचा. तब बच्चे ट्यूशन पढ़ रहे थे. इस दौरान अरुण ने गाड़ी में बैठे क़ातिलों को शराब पिलाई और खुद भी पी. बाद में जैसे ही ट्यूशन टीचर घर से चला गया, अरुण ने क़ातिलों को अंदर बुला लिया और चारों ने मिलकर पहले आस्था की जान ली और फिर उसकी लाश छत से लटका दिया. इस दौरान अरुण ने अपने दोनों बच्चों को टीवी वाले कमरे में बिठा दिया और टीवी की आवाज़ तेज़ कर दी. फिर क़त्ल के बाद क़ातिल अपने रास्ते चले गए और अरुण अपने दोनों बच्चों को अपने बड़े भाई तरुण के घर छोड़ कर दिल्ली के लिए निकल गया.

यहां खास बात ये है कि अरुण ने अपने भाई तरुण को आस्था के क़त्ल की बात 12 अक्टूबर की रात को ही बता दी थी और उन्हें ही घर की चाबी भी सौंप दी थी. लेकिन अरुण के भाई तरुण ने करीब 24 घंटे बाद घर पहुंच कर लाश देखने और घबराने का ड्रामा किया. मौत को खुदकुशी साबित करने की कोशिश की. ऐसे में पुलिस ने क़त्ल के मास्टरमाइंड अरुण और सुपारी किलर्स के साथ-साथ अरुण के भाई तरुण को भी सबूत मिटाने के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया.

कलप्रिट तहलका (राष्ट्रीय हिन्दी साप्ताहिक) भारत/उप्र सरकार से मान्यता प्राप्त वर्ष 2002 से प्रकाशित। आप सभी के सहयोग से अब वेब माध्यम से आपके सामने उपस्थित है।
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