मुख्यमंत्री जी आप ही संभालिए! एटा के विकास विभाग को, सचिवों का संगठन अधिकारियों को नहीं करने देता भ्रष्टाचार की जांच
नहीं करते अधिकारियों के आदेशों का अनुपालन, हर वर्ष होता है पंचायतों के कार्यों में करोड़ों का घोटाला
जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए लगाते हैं कमीशन मांगने और प्रताड़ित करने का आरोप
–मदन गोपाल शर्मा
एटा। मुख्यमंत्री जी एटा का विकास विभाग बेलगाम होता जा रहा है जिसे आप ही संभाल सकते हैं जिला स्तरीय अधिकारियों को तो सचिवों का संगठन काम ही नहीं करने देता है। सचिव अधिकारियों के आदेशों का अनुपालन ही नहीं करते, संगठन की मजबूती के बल पर वर्षों से एक ही ब्लाक में कार्यरत सचिवों पर ही कई-कई ग्राम पंचायतों का प्रभार है, कार्य अधिक होने का बहाना बनाकर ग्राम पंचायतों के कार्यों में हर वर्ष बड़ा घोटाला किया जाता है। जब-जब अधिकारियों ने जांच में किसी भी सचिव को दोषी पाते हुए कोई छोटी सी कार्यवाही भी की है, तभी सचिवों का संगठन तत्काल अधिकारियों पर कमीशन मांगने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए शहीद पार्क अथवा विकास भवन में धरना प्रदर्शन शुरू कर कार्य बहिष्कार करने की धमकी दे देता है और मजबूरन जिला प्रशासन को जांच प्रक्रियाओं को रोकना पड़ता है अनेकों जांच आज भी ठंडे बस्ते में पड़ी हुई हैं। अनेकों अधिकारी कमीशन मांगने और प्रताड़ित किये जाने के आरोप का दंश झेल चुके हैं लेकिन पंचायत सचिवों का बाल भी बांका नहीं हुआ। यह प्रक्रिया कई वर्षों से अपनाई जा रही है और भ्रष्टाचार को बेलगाम होकर अंजाम दिया जा रहा है।
विगत कुछ दिनों पूर्व प्रभारी डीपीआरओ/एसडीएम राजकुमार मौर्य ने जिला पंचायत राज अधिकारी का चार्ज संभालने के बाद अलीगंज विकास खण्ड की ग्राम पंचायत अंगरैया जमुनाई का निरीक्षण किया तो उन्हें वित्तीय अनियमिततायें अधिक मिलीं। धनराशि के भुगतानों में हेरफेर मिला तो उन्होंने आख्या तैयार कराते हुए पत्रावलियों की जांच करना शुरू किया। बताया गया है कि प्रभारी डीपीआरओ जांच में जीएसटी विभाग को शामिल कर हर पहलू पर जांच करा रहे हैं।
दूसरा प्रकरण अवागढ़ विकास खण्ड की ग्राम पंचायत बरई कल्यानपुर का है वहां उन्होंने आरआर सेंटर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान वर्मी कम्पोस्ट पिट उपलों से भरा मिला, निर्माण कार्य अधूरा तथा शौचालय में गंदगी के अतिरिक्त पंचायत भवन में भी कमियां मिलीं। यहां तैनात सचिव को नोटिस दिया गया है और एडीओ पंचायत के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
प्रभारी डीपीआरओ राजकुमार मौर्य ने ग्राम पंचायत अंगरैया के सचिव रजनीश को वित्तीय अनियमितताओं के कारण तथा बरई कल्यानपुर की सचिव नम्रता को निरीक्षण में मिली खामियों के कारण निलम्बित कर जांच कमेटी का गठन किया है। बताया जा रहा है कि वह अन्य ग्राम पंचायतों का भी निरीक्षण करने वाले हैं, जिसके कारण स्थानीय ग्राम पंचायतों के सचिवों के संगठन में खलबली मच गई है। आनन-फानन में उन्होंने पहले आजमाये नुस्खे पर काम करना शुरू कर दिया है, जिसके तहत ग्राम पंचायत सचिव संगठन ने शहीद पार्क में बैठक कर प्रभारी डीपीआरओ/एसडीएम राजकुमार मौर्य पर उत्पीड़न का आरोप लगा दिया, वहीं उनके कार्यालय में तैनात दो संविदाकर्मियों पर भी दस प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप लगा दिया है।
सचिव संगठन ने एसडीएम/प्रभारी डीपीआरओ राजकुमार मौर्य से जिला पंचायत राज अधिकारी का प्रभार हटाने की मांग भी की है। आखिर यह कब तक चलेगा? कब तक ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों की जांच नहीं की जायेगी? इससे पूर्व विगत वर्ष भी जब ग्राम पंचायत सचिवों की शिकायतें हुईं तो शहीद पार्क में धरना भी हुआ, विकास खण्ड शीतलपुर के हाॅल में एक पत्रकार के साथ सचिवों द्वारा मारपीट भी की गई। शिकायतों पर होने वाली जांचों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और फिर निर्भयता के साथ विकास कार्यों में भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया।
प्रति वर्ष ग्रामीण विकास के लिए आने वाली धनराशि में से करोड़ों रूपये भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाते हैं, अधिकारियों को संगठन भयभीत करता रहता है। सवाल यह भी है कि क्या ग्राम पंचायतों का निरीक्षण करने वाला हर अधिकारी बेईमान और भ्रष्टाचारी है? क्या ग्राम पंचायत सचिवों के लिए जनपद में कोई ईमानदार अधिकारी नहीं है? तो फिर ग्राम पंचायतों की जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज से करानी चाहिए जिसमें इनकी सम्पत्ति की जांच भी शामिल की जानी चाहिए।
हकीकत तो कुछ और ही है, यदि ग्राम पंचायत सचिव ईमानदार हैं, तो निविदायें/टेण्डर गोपनीय तरीके से क्यों प्रकाशित कराये जाते हैं? यदि ग्राम पंचायत सचिवों और एडीओ पंचायत कमीशन का खेल नहीं खेलते हैं तो कैसे इलाहाबाद व अन्य स्थानों से प्रकाशित समाचार पत्र जो सरकार द्वारा विज्ञापन मान्यता प्राप्त भी नहीं है, उसमें पूरे-पूरे विकास खण्डों की समस्त ग्राम पंचायतों के विज्ञापन क्यों छपवाये जाते हैं? बिना विज्ञापन मान्यता प्राप्त अखबार एक पम्पलेट से अधिक नहीं होता है। इस सम्बंध में कई बार ग्राम पंचायत सचिवों को निर्देशित किया गया है, लेकिन मानते ही नहीं। गत वर्ष मुख्य विकास अधिकारी एटा के पत्र सं0 135/एस0टी0/विविध/2025-26 दि0 29 अप्रैल 2025 के द्वारा समस्त खण्ड विकास अधिकारी को निर्देशित किया गया था कि कार्य योजना और लागत धनराशि के उल्लेख के बगैर प्रकाशित कराई गई निविदाओं/टेण्डरों का प्रकाशन कराया गया है तो ऐसे प्रकरणों की जांच कर आख्या प्रस्तुत करें, साथ ही जांच में सत्यता पाई जाए तो सम्बंधित का उत्तरदायित्व निर्धारित कर उनके विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की जाए/प्रस्तावित करें। इसी पत्र को जिला पंचायत राज अधिकारी एटा को प्रेषित करते हुए निर्देशित किया गया कि यदि कार्ययोजना और लागत धनराशि के उल्लेख के बगैर प्रकाशित कराई गई निविदाओं/टेण्डरों का प्रकाशन कराया गया है तो ऐसे प्रकरणों में सत्यता पाए जाने पर सम्बंधित का उत्तरदायित्व निर्धारित कर उनके विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की जाए/प्रस्तावित करें। साथ ही भुगतान न किये जाने सम्बंधी कार्यवाही हेतु सम्बंधित को अपने स्तर से निर्देशित करें। मुख्य विकास अधिकारी के पत्र के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी एटा के पत्रांक-346/पं0-07/डी0पी0एम0/टेण्डर/निविदा/2025-26 दि0 01-05-2025 के द्वारा समस्त सचिव ग्राम पंचायत द्वारा सम्बंधित सहायक विकास अधिकारी (पं0) को लिखा गया। इस कार्यवाही के बाद शहीद पार्क में सचिवों के संगठन ने एकत्रित होकर तत्कालीन अधिकारियों पर उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए कार्य बहिष्कार की धमकी दी थी, उसके बाद मुख्य विकास अधिकारी के पत्र पर क्या कार्यवाही हुई वह पत्र किस रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया किसी को नहीं मालूम?
उच्च अधिकारियों के आदेशों का अनुपालन करना ग्राम पंचायत सचिवों ने सीखा ही नहीं है। जिला पंचायत राज अधिकारी एटा के पत्र सं0-3870/07-पं0/स्था0प्र0/विज्ञापन-प्रकाशन/2024-25 दिनांक 06-03-2025 के द्वारा समस्त सचिव, ग्राम पंचायत द्वारा समस्त सहायक विकास अधिकारी (पं0) जनपद एटा को निर्देशित किया गया था कि मुख्य विकास अधिकारी महोदय एटा के आदेश सं0 883 दिनांक 28-02-2025 के संदर्भ में निदेशक सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग उ0प्र0 लखनऊ के पत्र सं0 1331 दिनांक 24 दिसम्बर 2024 के अनुपालन के सम्बंध में सभी विज्ञापनों का प्रकाशन/प्रसारण हेतु सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग उ0प्र0 लखनऊ को प्रस्ताव प्रेषित करने के सम्बंध में दिये गये निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन कराया जाना सुनिश्चित करें। अधिकारी आदेश देते रहते हैं लेकिन विकास विभाग में ग्राम सचिव स्तर का कर्मचारी है कि वह अपने विकास में संलग्न रहकर आदेशों को रद्दी की टोकरी में डालकर धन को अपने घर ले जाने में लगा हुआ है। मुख्य विकास अधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी को तो विकास विभाग में रोज ठेंगे पर मारा जाता है। मुख्यमंत्री जी ग्राम विकास के लिए भेजे गये धन की जांच करने का अधिकार सभी अधिकारियों से छीन लीजिए ताकि यह सभी ग्राम विकास अधिकारी मनमाना आचरण कर सकें। यदि यह सम्भव न हो तो आप ही कुछ इलाज कीजिए ताकि ग्राम पंचायतों में विकास के लिए भेजी गई धनराशि से गांवों का विकास हो सके। यदि एटा जनपद के गांवों में विकास कार्य कराना है तो यहां तैनात समस्त सचिवों/ग्राम विकास अधिकारियों का स्थानांतरण अन्य जनपदों में करते हुए इनके द्वारा विगत 5 वर्ष में किये गये कार्यों/घोटालों की जांच कराकर इनके विरूद्ध कड़ी कार्यवाही करायी जाये तभी ग्राम विकास अधिकारियों को मालूम होगा कि शासन और प्रशासन भी होता है, अभी तक एटा में तैनात ग्राम विकास अधिकारियों को सिर्फ यही मालूम है कि ग्राम विकास एवं पंचायत अधिकारी संगठन ही सबसे शक्तिशाली है जिसके दम पर जितना चाहे घोटाला करो और पकड़े जाने पर अधिकारी पर यह आरोप लगा दो कि वह उत्पीड़न कर रहा है अथवा कमीशन की मांग कर रहा है।
