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उत्तर प्रदेश

Court ने 43 पुलिसकर्मियों की उम्रकैद की सजा बदली, पीलीभीत एनकाउंटर में मारे गए थे 10 सिख

Admin
Last updated: दिसम्बर 16, 2022 3:27 पूर्वाह्न
By Admin 13 Views
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3 Min Read
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1991 पीलीभीत फर्जी मुठभेड़ मामले में 43 पुलिसकर्मियों को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को सात साल के सश्रम कारावास में बदल दिया है. इस फर्जी मुठभेड़ में 10 सिखों को आतंकवादी बताकर उनकी हत्या कर दी गई थी. मामले में दोषी 57 पुलिसकर्मियों में से 10 की मौत हो चुकी है.

कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा पुलिसकर्मियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत सुनाई गई सजा को दरकिनार करते हुए कहा कि मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 303 के अपवाद 3 के तहत आता है तो गैर इरादतन हत्या का मामला बनता है. यदि अपराधी लोक सेवक होने या लोक सेवक की सहायता करने के कारण किसी ऐसे कार्य द्वारा मृत्यु कारित करता है, जिसे वह विधिसम्मत समझता है. उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने निर्देश दिया कि दोषी अपनी जेल की सजा काटेंगे और प्रत्येक पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया.

10 सिखों को मारा

हालांकि, दोषी पुलिसकर्मियों के वकील आत्म सुरक्षा का हवाला देते रहे, लेकिन कोर्ट ने एक न सुनी. दरअसल, 1991 में पीलीभीत के अलग-अलग इलाके से सिख समुदाय के लोग तीर्थ यात्रा के लिए बस से जा रहे थे. इस बीच 10 निहत्थे सिखों को पुलिसकर्मियों ने आतंकवादी करार देते हुए फर्जी एनकाउंटर में मौत की नींद सुला दी थी, मरने वालों में पीलीभीत, न्यूरिया, बिलसंडा सहित कई जगह के सिख यात्री थे.

कोर्ट ने सुनाई सजा

31 साल बाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने फर्जी मुठभेड़ मामले में कोर्ट पुलिस कर्मियों को दोषी ठहराते हुए 7 साल की सजा और 10 हजार रुपए के जुर्माने का फैसला सुनाया, न्याय की इस जीत के बाद पीड़ित सिखों के परिजनों की आंखे भर आईं. इंसाफ की लड़ाई लड़ने के लिए सिखों के परिजनों ने अपनी जमीनों तक को बेच डाला. यही नहीं दहशत की वजह से कुछ लोग अपना घर छोड़कर विदेश चले गए. दरअसल यात्रा जाने के दौरान पुलिस ने बस से उतार कर सभी को अलग-अलग जगह ले जाकर मार डाला था.उस रात गायब हुए 11 बच्चे आज भी लापता माने जाते हैं, जिनका आज तक कोई सुराग नहीं लग सका .

कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंपा था

सुप्रीम कोर्ट में मामला जाने के बाद कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंपा. इसके बाद सीबीआई ने 57 पुलिस कर्मियों को दोषी पाया था. साल 2016 में लखनऊ की सीबीआई कोर्ट ने 47 पुलिसकर्मियों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी. सजा के खिलाफ दोषी पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी, जिसम 31 साल बाद हाईकोर्ट ने पुलिस कर्मियों को दोषी मानते हुए 7 साल की सजा और 10 हजार जुर्माने का फैसला सुनाया है . (भाषा के इनपुट के साथ)

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