जनपद में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता,कृषक बन्धु अनावश्यक भंडारण न करें : जिला कृषि अधिकारी
एटा। जनपद एटा में खरीफ सीजन के दृष्टिगत सभी प्रकार के उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित है। जिला कृषि कार्यालय ने किसान भाइयों से अपील की है कि वे उर्वरकों को लेकर किसी प्रकार की भ्रांति में न आएं तथा आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक क्रय करें।
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि गत वर्ष मई माह में 11,338.9 मीट्रिक टन यूरिया का विक्रय हुआ था, जबकि मई 2026 में 11,666 मीट्रिक टन यूरिया का विक्रय हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 327.1 मीट्रिक टन अधिक है। दिनांक 01 जून 2026 तक जनपद में लगभग 30,186.8 मीट्रिक टन यूरिया तथा 12,898.6 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि जनपद के बफर गोदामों में सामान्य एवं प्री-पोजिशनिंग स्टॉक सहित कुल 9,851.6 मीट्रिक टन यूरिया तथा 8,461 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। सहकारिता विभाग द्वारा सभी समितियों को उनकी मांग के अनुरूप निरंतर उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है तथा किसी भी समिति अथवा क्षेत्र में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है।
जिला कृषि अधिकारी द्वारा निरंतर समितियों, गोदामों एवं विक्रय केंद्रों का भ्रमण कर उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था की नियमित समीक्षा की जा रही है, जिससे किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराई जा सके। निरीक्षण के दौरान कहीं भी उर्वरकों की कमी की स्थिति नहीं पाई गई है।
किसानों को अवगत कराया गया है कि उत्तर प्रदेश शासन के आदेशानुसार कृषकों को उनकी कृषि भूमि के प्रति हेक्टेयर के आधार पर अधिकतम 5 बैग डीएपी एवं 7 बैग यूरिया उपलब्ध कराया जाएगा। निर्धारित सीमा से अधिक भंडारण उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित) (नियंत्रण) आदेश, 1985 के प्रावधानों का उल्लंघन माना जाएगा।
जिला प्रशासन ने किसान भाइयों से संतुलित उर्वरक उपयोग करने की अपील करते हुए कहा है कि खेत बचाओ अभियान के तहत नाइट्रोजन आधारित रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर यूरिया, का आवश्यकता से अधिक प्रयोग न करें। अत्यधिक यूरिया के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है तथा मिट्टी एवं भू-जल की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित एनपीके का संतुलित अनुपात 4:2:1 है, जबकि वर्तमान में यह अनुपात बढ़कर लगभग 22:6:1 तक पहुंच गया है, जो चिंता का विषय है।
जनपद के समस्त किसान भाइयों से अनुरोध है कि वे फसलों में संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करें, मिट्टी परीक्षण के आधार पर पोषक तत्वों का उपयोग करें तथा किसी भी प्रकार के उर्वरकों का अनावश्यक भंडारण न करें।
