अरिंद नदी की समस्या के स्थायी समाधान के लिए जिलाधिकारी ने शासन स्तर पर उठाया प्रभावी कदम
जनपद एटा के निधौली क्षेत्र में अरिंद नदी को ड्रेन के रूप में परिभाषित करते हुए सिंचाई विभाग की उच्च स्तरीय तकनीकी टीम से सर्वे कराया जाए
तटबंध की मरम्मत, सिल्ट सफाई एवं जलप्रवाह सुचारु करने के लिए प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन को भेजा पत्र
एटा। जनपद एटा के तहसील सदर क्षेत्र के विकासखंड निधौली कलां सहित आसपास के क्षेत्रों में प्रत्येक वर्ष वर्षाकाल के दौरान उत्पन्न होने वाली जलभराव एवं बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए जिलाधिकारी अरविन्द सिंह द्वारा गंभीरता से प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जिलाधिकारी ने प्रमुख सचिव, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ को पत्र भेजकर अरिंद नदी के तटबंध की मरम्मत, सिल्ट सफाई तथा जलप्रवाह को सुचारु बनाए जाने के संबंध में समुचित एवं तकनीकी रूप से व्यवहारिक कार्यवाही कराए जाने का अनुरोध किया है।
जिलाधिकारी ने शासन को अवगत कराया है कि अरिंद नदी/ड्रेन का उद्गम जनपद अलीगढ़ में है तथा यह जनपद हाथरस होते हुए जनपद एटा के विभिन्न क्षेत्रों से होकर प्रवाहित होती है, अलीगढ़ एवं हाथरस जनपदों में नदी/ड्रेन के अंतर्गत आवश्यक सिल्ट सफाई एवं अन्य अनुरक्षण संबंधी कार्य कराए गए हैं, जबकि जनपद एटा में अपेक्षित स्तर पर सिल्ट सफाई, तटबंध मरम्मत एवं जलप्रवाह को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्य समयबद्ध रूप से न होने के कारण नदी की जल धारण एवं जल निकासी क्षमता प्रभावित हो रही है, जनपद एटा में नदी के कई हिस्सों में लंबे समय से सिल्ट जमा होने, झाड़-झंखाड़ एवं अन्य अवरोधों तथा तटबंध के विभिन्न स्थानों पर आवश्यक मरम्मत न होने के कारण जलप्रवाह बाधित हो रहा है। परिणामस्वरूप वर्षा के दौरान नदी का पानी अपेक्षित गति से आगे प्रवाहित न हो पाने के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव एवं बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है। इससे किसानों की फसलों को क्षति पहुंचने के साथ-साथ ग्रामीण जनजीवन भी प्रभावित होता है।
जिलाधिकारी अरविन्द सिंह द्वारा शासन के संज्ञान में यह भी लाया गया है कि समस्या केवल अत्यधिक वर्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि नदी के संपूर्ण प्रवाह क्षेत्र में जलधारण एवं जलनिकासी क्षमता बनाए रखने के लिए नियमित अनुरक्षण कार्य आवश्यक हैं। विशेषकर जनपद एटा की सीमा में सिल्ट सफाई, तटबंध की मरम्मत, नदी की वास्तविक जलधारा को अवरोधमुक्त करने तथा जलप्रवाह को सुचारु बनाए जाने के कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराए जाने आवश्यक हैं। इन कार्यों के अभाव में प्रत्येक वर्ष वर्षाकाल में जलभराव एवं बाढ़ की समस्या पुनः उत्पन्न होने की स्थिति बनी रहती है।
जिलाधिकारी ने इस तकनीकी विषय के स्थायी समाधान के लिए शासन स्तर पर उच्चस्तरीय तकनीकी समिति गठित किए जाने का भी अनुरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि अरिंद नदी की वास्तविक जलधारा (Water Stream) एवं इसकी तकनीकी/भौतिक सीमा का वैज्ञानिक एवं तकनीकी परीक्षण कराया जाना आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित क्षेत्र में इसे नदी अथवा ड्रेन के रूप में किस प्रकार परिभाषित किया जाना है तथा इसके अनुरक्षण एवं बाढ़ नियंत्रण के लिए किस प्रकार की स्थायी कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए।
जिलाधिकारी ने अनुरोध किया है कि तकनीकी विशेषज्ञों एवं जल अभियंत्रण से जुड़े अधिकारियों की समिति गठित कर अलीगढ़, हाथरस एवं एटा जनपदों में नदी/ड्रेन के संपूर्ण प्रवाह क्षेत्र का समग्र परीक्षण कराया जाए। साथ ही, जहां आवश्यक हो वहां सिल्ट सफाई, तटबंध मरम्मत, जलधारा से अवरोध हटाने एवं जलप्रवाह क्षमता बढ़ाने के कार्यों की तकनीकी रूप से जांच कराकर प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि समस्या का समाधान केवल अस्थायी रूप से नहीं बल्कि दीर्घकालिक एवं स्थायी रूप से सुनिश्चित हो सके।
जिलाधिकारी अरविन्द सिंह द्वारा जनपदवासियों, विशेषकर बाढ़ एवं जलभराव से प्रभावित किसानों की समस्या को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्थानीय स्तर पर संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे हैं। साथ ही, उन्होंने शासन स्तर पर भी प्रभावी पैरवी करते हुए यह प्रयास किया है कि अरिंद नदी के संपूर्ण प्रवाह क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए तकनीकी एवं समन्वित कार्ययोजना तैयार हो। इससे जनपद एटा में नदी के जलप्रवाह को सुचारु बनाने, जलभराव एवं बाढ़ की समस्या को नियंत्रित करने तथा किसानों एवं ग्रामीणों को प्रतिवर्ष होने वाली परेशानी से स्थायी राहत दिलाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।
