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उत्तर प्रदेश

नवजातों को नदी में छोड़ने की वर्षों पुरानी परंपरा, पूर्णा माई निसंतान दंपत्ति को देती है संतान होने का आशीर्वाद!

admin
Last updated: नवम्बर 10, 2022 8:10 अपराह्न
By admin 7 Views
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3 Min Read
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कहते हैं आस्था में विश्वास है तो सब कुछ मुमकिन है, मध्य प्रदेश में आने वाले आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले के अंतर्गत आने वाले भैंसदेही विकासखंड में एक नदी ऐसी है. जिसे जिलेवासी मां पूर्णा के नाम से संबोधित करते हैं. चंद्र पुत्री पूर्णा नदी पर हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर हर साल मेला लगता है. कार्तिक पूर्णिमा के बाद तीन दिन तक यहां पर नवजात बच्चों को पालना में डाल कर नदी में छोड़ा जाता है. पूर्णा माई की खासियत यह है कि यह नि:संतान दंपत्ति को संतान होने का आशीर्वाद प्रदान करती है.

पूर्णा माई के तट पर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश भर से नि:संतान दंपत्ति गोद हरी होने के लिए मन्नत मांगने आते हैं. मन्नत पूरी होने पर पूर्णा माई के पालने में अपने लालने को (प्रतीक स्वरूप) छोड़ते हैं. पूजा अर्चना करते हैं. यह परंपरा सालों से चली आ रही है.पूर्णा माई के आशीर्वाद से कई निसंतान दंपत्ति के घर-आंगन में किलकारियां गूंज चुकी है.

यह जुड़ी है मान्यता

ऐसी मान्यता है कि नि:संतान दंपत्ति पूर्णा मां के पास आकर बच्चे होने की मन्नत मांगते हैं. मन्नत पूरी होने पर अपने बच्चे को पालने में रखकर प्रतीक स्वरूप पूर्णा माई की गोद में कुछ देर के लिए छोड़ते हैं. इस दौरान अभिभावक सहित भगत भी मौजूद रहते हैं. पूर्णा नदी के बारे में लोगों की मान्यता है की संतान हीन दम्पत्तियों को यहां आने पर संतान की प्राप्ति होती है इसलिए प्रति वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर पूर्णा नदी के किनारे एक बड़ा मेला लगता है और बड़ी संख्या में लोग इस मेले में शामिल होते है इनमे वे लोग भी होते है जिनको संतान नहीं होती या यहां की मन्नत से संतान होती है. ऐसे लोग अपने बच्चे को लाते है और नदी में भगत के माध्यम से पूजा करा कर बच्चे को पालने में डालते हैं.

मंदिर के पुजारी पिंटू सोलंकी का कहना है कि चंद्र पुत्री है और यहां के राजा के पास अठासी हजार ऋषि मुनि आये थे और उन्होंने ने राजा से दुग्ध के साथ आहार का दान मांगा था, जिसको लेकर राजा ने भगवान शंकर की तपस्या की थी. बच्चों को इस तरह पालने में रख कर नदी में डालने पर डॉ एमएस सेवरिया बीएमओ भैंसदेही) का कहना है कि नदी में पूजा सामग्री डालने के कारण पानी गंदा हो जाता है, जिससे कई तरह की बीमारी हो सकती है. इससे स्किन की बीमारी हो सकती है और पानी पीने के कारण निमोनिया हो सकता है.

कलप्रिट तहलका (राष्ट्रीय हिन्दी साप्ताहिक) भारत/उप्र सरकार से मान्यता प्राप्त वर्ष 2002 से प्रकाशित। आप सभी के सहयोग से अब वेब माध्यम से आपके सामने उपस्थित है।
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