बैगलैस डे पर जैविक खेती, मृदा परीक्षण एवं जल संरक्षण के प्रति किया गया जागरूक
एटा। पी.एम. श्री उच्च प्राथमिक विद्यालय (1-8) पिदौरा, विकास खण्ड-मारहरा, जनपद-एटा में विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान के अंतर्गत जैविक खेती एवं प्राकृतिक कृषि का परिचय, मृदा परीक्षण, जल संरक्षण तथा वर्षा जल संचयन के विषय में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बताया गया कि जैविक खेती में रासायनिक उर्वरकों एवं हानिकारक कीटनाशकों के स्थान पर गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट तथा अन्य जैविक संसाधनों का प्रयोग किया जाता है। प्राकृतिक कृषि के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता एवं पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण फसल उत्पादन किया जा सकता है। विद्यार्थियों को मृदा परीक्षण के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि मिट्टी की जांच से उसमें उपलब्ध पोषक तत्वों एवं मिट्टी की गुणवत्ता का पता लगाया जा सकता है। इसके आधार पर फसलों के लिए उचित उर्वरकों एवं पोषक तत्वों का चयन किया जाता है। कार्यक्रम में जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन पर विशेष चर्चा की गई। विद्यार्थियों को समझाया गया कि वर्षा के जल को संरक्षित कर भविष्य में जल की आवश्यकता को पूरा किया जा सकता है। जल की प्रत्येक बूंद को बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। विद्यालय में विद्यार्थियों ने इन विषयों के प्रति रुचि दिखाते हुए पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ कृषि एवं जल बचाने का संकल्प लिया तथा संबंधित विषयों पर सुन्दर चित्र बनाए। इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा कृषि एवं पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
