IDBI बैंक के निजीकरण के विरोध में बैंक कर्मचारी-अधिकारी लामबंद, सरकार को देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
नई दिल्ली । लाभ में चल रहे सरकारी बैंक को निजी हाथों में सौंपने के फैसले पर उठे सवाल, कर्मचारी संगठनों ने फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की । केंद्र सरकार द्वारा IDBI बैंक के निजीकरण की दिशा में उठाए गए कदम को लेकर बैंकिंग क्षेत्र में विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बैंक के प्रस्तावित विनिवेश को लेकर आर्थिक जगत में चर्चा तेज हो गई है। बैंक कर्मचारी एवं अधिकारी संगठनों ने सरकार के इस फैसले पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग व्यवस्था और कर्मचारियों के भविष्य के लिए चिंताजनक बताया है।
बैंक कर्मचारी एवं अधिकारी संगठनों का कहना है कि एक ओर केंद्र सरकार देशवासियों से स्वदेशी अपनाने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का आह्वान करती है, वहीं दूसरी ओर देश के महत्वपूर्ण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। संगठनों ने सवाल उठाया है कि जब IDBI बैंक लगातार पांच वर्षों से लाभ अर्जित कर रहा है और सरकार को लाभांश भी दे रहा है, तो ऐसे संस्थान के निजीकरण की आवश्यकता क्यों है? बैंक कर्मचारी संगठनों के अनुसार, IDBI बैंक देश की आर्थिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण संस्थान है। बैंक के लगातार लाभ में रहने के बावजूद इसके निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाना कई सवाल खड़े करता है। उनका मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं, बल्कि आम नागरिकों, किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और समाज के कमजोर वर्गों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाना भी है।
कर्मचारी संगठनों ने आशंका जताई है कि बैंक के निजी हाथों में जाने से कर्मचारियों की सेवा शर्तों, रोजगार की सुरक्षा और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे बैंक में कार्यरत कर्मचारियों के साथ-साथ उन पर आश्रित परिवारों की आजीविका और भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ गई है ।
IDBI बैंक के विनिवेश को लेकर कनाडाई मूल के भारतीय कारोबारी प्रेम वत्स से जुड़ी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की संभावित भूमिका भी चर्चा में है। इस संबंध में विनिवेश की मौजूदा स्थिति, खरीदार की हिस्सेदारी और लेन-देन की शर्तों की आधिकारिक पुष्टि के आधार पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। बैंक कर्मचारी संगठनों ने सार्वजनिक क्षेत्र के इस महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थान के स्वामित्व में बदलाव को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है।
फैसला वापस नहीं हुआ तो कर्मचारी और उनके परिवार देशव्यापी आंदोलन करेंगे । बैंक यूनियन के अध्यक्ष सौरव कुमार और महासचिव विट्ठल कोटेश्वर राव ने इस फैसले का विरोध करते हुए सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। संगठन की ओर से चेतावनी दी गई है कि यदि सरकार उनकी मांग पर विचार नहीं करती है, तो बैंक कर्मचारी एवं अधिकारी आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे। विरोध को व्यापक रूप देने के लिए अनिश्चितकालीन देशव्यापी हड़ताल और आंदोलन का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।
संगठन का कहना है कि कर्मचारी अपने रोजगार, सेवा सुरक्षा और सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था की रक्षा के लिए संघर्ष करेंगे। जरूरत पड़ने पर कर्मचारी अपने परिवारों के साथ भी विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे। IDBI बैंक के प्रस्तावित निजीकरण का मुद्दा अब केवल एक बैंक के स्वामित्व में बदलाव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की भूमिका, आर्थिक नीतियों और रोजगार सुरक्षा से भी जुड़ गया है। बैंक कर्मचारी एवं अधिकारी संगठनों ने सरकार से मांग की है कि वह इस फैसले पर पुनर्विचार करे और देश की जनता तथा बैंक कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता दे। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार बैंक कर्मचारी संगठनों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और IDBI बैंक के विनिवेश को लेकर आगे क्या निर्णय लिया जाता है। विरोध दर्ज करने वालों में कर्मचारी यूनियन यूनिट से राजकुमार सिंह,कपिल सिंगला,माधुरी कुमारी, राहुल, गगन यादव,लालतेन्दु केशरी, जयकला, फ़नीन्द्र, पीयूष मौर्य, राजीव श्रीवास्तव, रमेश चंद्र यादव,शलभ सोनकर, विपिन जयसवाल,आजाद बहादुर सिंह, दीपक सिंह आदि ।
