अकल्पनीय शक्ति के
स्रोत हैं शब्द
शब्दों की शक्ति कितनी होती है इसकी कल्पना भी हमारे लिए अकल्पनीय है क्योंकि शब्द अकल्पनीय शक्ति के स्रोत हैं । जब हम इसके बारे में वास्तविकता से जान जाते हैं तो स्तब्ध रह जाते हैं क्योंकि शब्दों की शक्ति के आधार ध्वनि, लहजा और अर्थ हैं । कहा जाता है कि ऊँ की ध्वनि से ही सृष्टि का जन्म हुआ हैं ।
जानें शब्द का एक और मर्म।इसके विपरीत गलत शब्द या गलत लहजे से बोले गए शब्द मिथ्या भ्रम उत्पन्न कर सकते हैं ।शांत वातावरण को अकारण ही गर्म कर सकते हैं । मनुष्य के अंदर सबसे बड़ी शक्ति है तो वो है उसके शब्द।शब्दों की ताक़त किसी से कम नहीं हैं । हम जो कुछ भी बोलते हैं वो ब्रह्मांड में परिक्रमा करते रहते हैं और वो नीयत समय पर अपना प्रभाव भी दिखाते हैं।वैसे हम सभी विदित हैं कि समय-समय पर मंत्रों का उच्चारण करते हैं।वो शब्द ही होते हैं जिसका प्रभाव ज़रूर दिखायी देता है। वो शब्द ही होते हैं जिसके कारण कोई हमारा अति प्रिय बन जाता है और कड़वे शब्द बोलने से दुश्मन।अतीत में ज़रूरत के अनुसार विशेष ध्वनि के प्रयोग से बिन मौसम बरसात भी हो जाती थी और मंत्रों के उच्चारण से अग्नि भी प्रज्वलित हो जाती थी।एक इंसान की पहचान उसके वाणी से भी की जा सकती है। इसलिये शब्द की महिमा अपरम्पार है।अतः जब भी बोलो तो बहुत सोच कर और तोल कर बोलो।क्योंकि कमान से निकला तीर तो वापिस आ सकता है पर एक बार मुख से निकले शब्द वापिस कभी भी नहीं आते है वापिस कुछ आता है तो उन शब्दों की प्रति ध्वनि। अतः सब समय न केवल उपयुक्त शब्दों का ही अपितु सही लहजे से भी शब्दों का प्रयोग किया जाए ।
प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़ )
अकल्पनीय शक्ति के स्रोत हैं शब्द
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