27 अगस्त की खबर से मची खलबली, अब खाद्य निरीक्षक की गाड़ी में ‘प्राइवेट’ व्यक्ति पर सवाल
जलेसर में मुकेश जादौन की भूमिका पर उठे सवाल, विभागीय कार्रवाई के दौरान साथ घूमने का आरोप; निजी वाहन के चालक की भूमिका भी जांच के घेरे में
जलेसर/एटा। खाद्य सुरक्षा विभाग में कथित अवैध वसूली को लेकर 28 अगस्त को प्रकाशित खबर के बाद मामला और गरमा गया है। अब जलेसर तहसील क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा निरीक्षक की गाड़ी में एक निजी व्यक्ति के घूमने की तस्वीर सामने आने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। तस्वीर में नजर आ रहे व्यक्ति की पहचान मुकेश जादौन के रूप में बताई जा रही है।
पूर्व में प्रकाशित खबर में खाद्य कारोबारियों से कथित अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाए गए थे। अब सवाल यह उठ रहा है कि विभागीय निरीक्षण और कार्रवाई के दौरान यदि कोई निजी व्यक्ति निरीक्षक के साथ रहता है तो उसकी अधिकृत भूमिका क्या है और उसे विभागीय गतिविधियों में साथ रखने की अनुमति किस स्तर से मिली है?
बताया जा रहा है कि मुकेश जादौन पूर्व में भी खाद्य सुरक्षा निरीक्षक के साथ नजर आ चुका है। यदि यह तथ्य सही है तो विभागीय अधिकारियों के लिए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि संबंधित व्यक्ति का विभाग से क्या संबंध है और वह निरीक्षण टीम के साथ किस अधिकार के तहत क्षेत्र में भ्रमण करता है।
रक्षाबंधन पर्व के दौरान खाद्य पदार्थों की बिक्री बढ़ने के बीच जलेसर क्षेत्र में कथित वसूली को लेकर भी चर्चाएं सामने आई हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ दुकानदारों और खाद्य कारोबारियों पर विभागीय कार्रवाई का दबाव बनाकर रकम मांगी गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और कथित रकम के संबंध में कोई आधिकारिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है।
विभागीय कार्य में लगी निजी गाड़ी के चालक की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच का विषय यह है कि चालक को किन अधिकारियों ने अधिकृत किया था और क्या विभागीय निरीक्षण के दौरान निजी व्यक्ति की मौजूदगी तथा कारोबारियों से उसके संपर्क की जानकारी संबंधित अधिकारियों को थी।
मामले में सबसे अहम बात यह है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में यह स्पष्ट किया जा सकता है कि खाद्य कारोबारियों से कथित वसूली हुई या नहीं, मुकेश जादौन की वास्तविक भूमिका क्या है और निजी वाहन चालक की इसमें कोई भूमिका रही या नहीं।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारी अथवा अन्य व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं आरोप निराधार पाए जाने पर विभाग को भी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अब निगाहें विभागीय उच्चाधिकारियों की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।
